Sri Chandra Kavacham | Chandra Kavacham | श्री चन्द्र कवचम्: दोस्तों नमस्कार, आज हम आप लोगों को इस लेख के माध्यम से श्री चन्द्र कवचम् के बारे में बताने वाले हैं। हिंदू ज्योतिष में श्री चंद्र देव नौ नवग्रहों में से एक हैं। श्री चंद्र देव को हमारे मन, भावनाओं, विचारों और भाग्य को प्रभावित करने वाले ग्रह के रूप में वर्णित हैं। श्री चंद्र देव के कवच का श्रवण करने से चंद्र ग्रह के अशुभ प्रभावों से रक्षा होता है। श्री चंद्र देव को नक्षत्रों के स्वामी ग्रह के रूप में जाना जाता है।
Sri Chandra Kavacham
Chandra Kavacham
श्री चन्द्र कवचम्
विनियोगः
अस्य श्रीचन्द्र कवचस्तोत्र महामन्त्रस्य गौतम ऋषिः,
अनुष्टुप् छन्दः, सोमो देवता, रं बीजं, सं शक्तिः,
ओं कीलकं, सोमग्रह प्रसादसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ।
करन्यासः
वां अङ्गुष्ठाभ्यां नमः ।
वीं तर्जनीभ्यां नमः ।
वूं मध्यमाभ्यां नमः ।
वैं अनामिकाभ्यां नमः ।
वौं कनिष्ठिकाभ्यां नमः ।
वः करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः ।
अङ्गन्यासः
वां हृदयाय नमः ।
वीं शिरसे स्वाहा ।
वूं शिखायै वषट् ।
वैं कवचाय हुम् ।
वौं नेत्रत्रयाय वौषट् ।
वः अस्त्राय फट् ।
ध्यानम्
सोमं द्विभुजपद्मं च शुक्लाम्बरधरं शुभं
श्वेतगन्धानुलेपं च मुक्ताभरणभूषणम् ।
श्वेताश्वरथमारूढं मेरुं चैव प्रदक्षिणं
सोमं चतुर्भुजं देवं केयूरमकुटोज्ज्वलम् ॥ १ ॥
वासुदेवस्य नयनं शङ्करस्य च भूषणम् ।
एवं ध्यात्वा जपेन्नित्यं चन्द्रस्य कवचं मुदा ॥ २ ॥
अथ कवचम्
शशी पातु शिरोदेशे फालं पातु कलानिधिः ।
चक्षुषी चन्द्रमाः पातु श्रुती पातु कलात्मकः ॥ १ ॥
घ्राणं पक्षकरः पातु मुखं कुमुदबान्धवः ।
सोमः करौ तु मे पातु स्कन्धौ पातु सुधात्मकः ॥ २ ॥
ऊरू मैत्रीनिधिः पातु मध्यं पातु निशाकरः ।
कटिं सुधाकरः पातु उरः पातु शशन्धरः ॥ ३ ॥
मृगाङ्को जानुनी पातु जङ्घे पात्वमृताब्धिजः ।
पादौ हिमकरः पातु पातु चन्द्रोऽखिलं वपुः ॥ ४ ॥
फलश्रुति
एतद्धि कवचं पुण्यं भुक्तिमुक्तिप्रदायकम् ।
यः पठेच्छृणुयाद्वापि सर्वत्र विजयी भवेत् ॥ ५ ॥
इति श्रीब्रह्मवैवर्त महापुराणे दक्षिणखण्डे श्री चन्द्र कवचम् सम्पूर्णम् ।
Credit the Video: Rajshri Soul YouTube Channel
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