Mangal Bhavan Amangal Hari | मंगल भवन अमंगल हारी | Hari Anant Hari Katha Ananta: दोस्तों नमस्कार, आज हम आप लोगों को इस पोस्ट के माध्यम से मंगल भवन अमंगल हारी मंत्र के बारे में बताएँगे। दोस्तों जब अधर्म बढ़ जाता है तब पृथ्वी पर संपूर्ण ब्रह्मांड के संरक्षक प्रभु श्री राम अवतार लेते हैं। भगवान राम का अर्थ है आनंददायक या रमणीय। जो भक्तों पर शुभ कृपा वर्षा करते हैं। तो आइये सुमिरन करते हैं मंगल भवन अमंगल हारी:
मंगल भवन अमंगल हारी
मंगल भवन अमंगल हारी
द्रबहु सुदसरथ अजिर बिहारी
राम सिया राम सिया राम जय जय राम
हो, होइहै वही जो राम रचि राखा
को करे तरफ़ बढ़ाए साखा
राम सिया राम सिया राम जय जय राम
हो, धीरज धरम मित्र अरु नारी
आपद काल परखिये चारी
राम सिया राम सिया राम जय जय राम
हो, जेहिके जेहि पर सत्य सनेहू
सो तेहि मिलय न कछु सन्देहू
राम सिया राम सिया राम जय जय राम
हो, जाकी रही भावना जैसी
प्रभु मूरति देखी तिन्ह तैसी
राम सिया राम सिया राम जय जय राम
रघुकुल रीत सदा चली आई
प्राण जाए पर वचन न जाई
राम सिया राम सिया राम जय जय राम
हो, हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता
कहहि सुनहि बहुविधि सब संता
राम सिया राम सिया राम जय जय राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम,
राम सिया राम सिया राम जय जय राम,
राम सिया राम सिया राम जय जय राम
Mangal Bhavan Amangal Hari
Mangal Bhavan Amangal Hari
Drabahu Sudasarath Achar Bihari
Ram Siya Ram Siya Ram Jay Jay Ram
Ho, Hoihai Vahi Jo Ram Rachi Rakha
Ko Kare Taraf Badhae Sakha
Ram Siya Ram Siya Ram Jay Jay Ram
Ho, Dhiraj Dharam Mitra Aru Naarii
Apad Kal Parakhiye Chari
Ram Siya Ram Siya Ram Jay Jay Ram
Ho, Jehike Jehi Par Satya Sanehu
So Tehi Milay Na Kachhu Sandehu
Ram Siya Ram Siya Ram Jay Jay Ram
Ho, Jaki Rahi Bhavana Jaisi
Prabhu Murat Dekhi Tin Taisi
Ram Siya Ram Siya Ram Jay Jay Ram
Raghukul Rit Sada ChalI Aai
Pran Jae Par Vachan Na Jai
Ram Siya Ram Siya Ram Jay Jay Ram
Ho, Hari Anant Hari Katha Ananta
Kahahi Sunahi Bahuvidhi Sab Santa
Ram Siya Ram Siya Ram Jay Jay Ram
ମଙ୍ଗଲ ଭବନ ଅମଂଗଲ ହାରୀ
ମଂଗଲ ଭବନ ଅମଂଗଲ ହାରୀ
ଦ୍ରବହୁ ସୁଦସରଥ ଅଚର ବିହାରୀ
ରାମ ସିଯା ରାମ ସିଯା ରାମ ଜଯ ଜଯ ରାମ
ହୋ, ହୋଇହୈ ବହୀ ଜୋ ରାମ ରଚି ରାଖା
କୋ କରେ ତରଫ ବଢ଼ାଏ ସାଖା
ରାମ ସିଯା ରାମ ସିଯା ରାମ ଜଯ ଜଯ ରାମ
ହୋ, ଧୀରଜ ଧରମ ମିତ୍ର ଅରୁ ନାରୀ
ଆପଦ କାଲ ପରଖିଯେ ଚାରୀ
ରାମ ସିଯା ରାମ ସିଯା ରାମ ଜଯ ଜଯ ରାମ
ହୋ, ଜେହିକେ ଜେହି ପର ସତ୍ଯ ସନେହୂ
ସୋ ତେହି ମିଲଯ ନ କଛୁ ସନ୍ଦେହୂ
ରାମ ସିଯା ରାମ ସିଯା ରାମ ଜଯ ଜଯ ରାମ
ହୋ, ଜାକୀ ରହୀ ଭାବନା ଜୈସୀ
ପ୍ରଘୁ ମୂରତି ଦେଖୀ ତିନ ତୈସୀ
ରାମ ସିଯା ରାମ ସିଯା ରାମ ଜଯ ଜଯ ରାମ
ରଘୁକୁଲ ରୀତ ସଦା ଚଲୀ ଆଈ
ପ୍ରାଣ ଜାଏ ପର ବଚନ ନ ଜାଈ
ରାମ ସିଯା ରାମ ସିଯା ରାମ ଜଯ ଜଯ ରାମ
ହୋ, ହରି ଅନନ୍ତ ହରି କଥା ଅନନ୍ତା
କହହି ସୁନହି ବହୁବିଧି ସବ ସଂତା
ରାମ ସିଯା ରାମ ସିଯା ରାମ ଜଯ ଜଯ ରାମ
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