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Radha Ashtami | राधा अष्टमी व्रत कैसे करें

Radha Ashtami

Radha Ashtami | राधा अष्टमी व्रत कैसे करें: दोस्तों नमस्कार, आज हम आप लोगों को इस लेख के माध्यम से राधा अष्टमी व्रत कैसे करें के बारे में बताने वाले हैं। ब्रज मंडल में राधाष्टमी उत्सव जन्माष्टमी से भी बड़ा होता है। ठाकुर जी का जन्मोत्सव रात्रि 12:00 बजे मनाया जाता है। पर किशोरी जी जो उदया उदया भाव से प्रकट हुई। जैसे ही सूर्य की प्रथम किरण पृथ्वी पर पड़ी है, तभी किशोरी जी का प्रादुर्भाव हुआ।

Radha Ashtami | राधा अष्टमी व्रत कैसे करें

आप जन्माष्टमी और राधाष्टमी को रात भर नाचो गाओ आनंद करो। सुबह 4:30 बजे घर में किशोरी जी को अभिषेक करो। सुंदर सुंदर कमल के पुष्प के बीच में किशोरी जी के श्री विग्रह को विराजमान रखो। कमल के मध्य से ही किशोरी जी शयन अवस्था में प्रकट हुई, तो कमल मध्य में किशोरी जी को विराजमान करो। घर पर ठाकुर जी है तो ठाकुर जी को विराजमान करो। प्रातः काल 4 बजे शंखनाद, सुंदर घंटे, घड़ियाल, नगाड़े आदि से बधाई गायन करो। इसके बाद दीप प्रज्वलन करके किशोरी जी को प्रादुर्भाव करो। फिर पंचामृत से अभिषेक करो। पंचामृत अभिषेक करने के बाद में सुंदर किशोरी जी को श्रृंगार करो। श्रृंगार करने के बाद भोग धरा के फिर किशोरी जी की आरती करो। यदि संभव हो तो श्री राधा रानी किशोरी जी को आरती, भोग आदि पूजन के बाद 1000 (एक हजार कमल) कमल से श्री चरणों की अर्चना करो। गोपाल जी के नाम से एक एक कमल किशोरी जी के चरण में अर्पित करें।

इसके पश्चात नाचते नाचते, उत्सव करते करते, किशोरी जी के आगे, ठाकुर जी के आगे, नाचते रहो। इसके बाद श्रद्धापूर्वक राधाष्टमी का व्रत रखें। पूरे दिन किशोरी जी के लिए प्रेमपूर्वक अच्छे-अच्छे व्यंजन बनाएँ और उन्हें भोग के रूप में अर्पित करें। भोग लगाने के बाद प्रसाद को भक्तों और परिवारजनों में वितरित करें। जब अगले दिन नवमी तिथि लगे तब उसी प्रसाद को प्रसाद रूप में ग्रहण करके अपने व्रत का पारण करें। राधाष्टमी का व्रत करना पुण्यदायक माना गया है, तो किशोरी जी की कृपा और भक्ति प्राप्त के लिए व्रत करना चाहिए।

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