Ramaya Ramabhadraya Mantra | रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे: दोस्तों नमस्कार, आज हम आप लोगों को इस पोस्ट के माध्यम से रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे मंत्र के बारे में बताएँगे। जीवन में सफलता पाने के लिए रामरक्षास्तोत्र में दिया गया रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे मंत्र एक महान मंत्र है। इस मंत्र का जाप करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। पापों से मुक्ति मिलने के साथ मोक्ष का द्वार भी खुलता है।
सांस-सांस से नाम जप, नहीं नाम की होड़
एक सांस में होत है, सिमरन सत्तर करोड़
भगवान श्री राम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा गया है। राम का नाम विशाल है। राम नाम एक महामणि है। मुनियों के मन को हरने वाले राम सकल स्वरूप है। नेत्रों को आनंद देने वाला मेघ के समान राम प्रत्येक घर में समाया हुआ है। राम-नाम का आश्रय लेने से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष रूपी चारों परमार्थों का प्राप्ति होती है। इस राम नाम के अमृत का अमृतपान करने से मनुष्यों को प्रारब्धजन्य कष्ट भी कट जाते हैं। मान्यता के अनुसार प्रभु श्री राम का नाम लेते ही जीवन की सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं। धार्मिक शास्त्र के अनुसार, श्री राम मंत्र का जाप करने से ब्रह्मज्ञान की प्राप्ति होती है
रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे
रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे ।
रघुनाथाय नाथाय सीताया: पतये नम: ॥
Ramaya Ramabhadraya Mantra
Ramaya Ramabhadraya
Ramacandraya Vadhase ।
Raghunathaya Nathaya
Sitayah Pataye Namah ॥
अर्थ: भगवान् श्रीराम, रामभद्र, रामचन्द्र, सर्वकारणों के कारण परम-कर्ता, विधात स्वरूप (वेधस), रघुनाथ, सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के स्वामी (नाथ), सीतापति को मैं नमस्कार करता हूँ।
- ब्रह्मर्षि वशिष्ठ, शिव इत्यादि प्रभु को “राम” कहते हैं।
- तो महाराज दशरथ प्रभु को प्रेम से “रामभद्र” कहते हैं।
- महारानी कौसल्या अपने लाल का मुखचुम्बन कर “रामचंद्र” कहती हैं।
- वेदों के ऋषि “वेधस” (परमकारण-कर्ता, विधात स्वरूप) कहते हैं।
- प्रभु की प्रजा उन्हें हमारे नाथ “रघुनाथजी” कहती है।
- सीता जी प्रभु को “नाथ” (मेरे स्वामि!) कहती हैं।
- प्रभु के सखा-सखियाँ प्रभु को “सीतापति” कहते हैं।
- मैं माता श्री सीता जी के स्वामी श्री रघुनाथ जी की वंदना करता हूँ।
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