Shree Ganesh Dwadash Naam Stotram | गणेश द्वादश नाम स्तोत्रम्: दोस्तों नमस्कार, आज हम आपको इस लेख के जरिए गणेश द्वादश नाम स्तोत्रम् के बारे में बात करेंगे। कहते हैं, भगवान गणपति जीवन का वह दिव्य पासवर्ड हैं। जैसे सही पासवर्ड के बिना ताला नहीं खुलता, यदि किसी भी शुभ कार्य से पहले उनका स्मरण नहीं करेंगे, तो सफलता और शुभता के द्वार नहीं खुलेंगे।इसलिए विद्या आरम्भ, विवाह, यात्रा, नए कार्य, परीक्षा, शुभ कार्यों से पहले विशेष रूप से यह स्तोत्र सुनना फलदायी माना जाता है। ऋषि-मुनियों ने भगवान गणपति के इन 12 नामों को बहुत सोच-समझकर एक विशेष क्रम में रखा है। प्रत्येक नाम भगवान गणेश के एक विशेष गुण और स्वरूप का स्मरण कराता है। जब आप अपने मुख से भगवान गणपति के इन 12 पवित्र नामों का उच्चारण करते हैं, तो आपकी वाक्-शक्ति से, आपके मन में भगवान गणपति का दिव्य स्वरूप बना देते हैं।
Shree Ganesh Dwadash Naam Stotram
गणेश द्वादश नाम स्तोत्रम्
श्री गणेशाय नमः
सुमुखश्चैकदन्तश्च कपिलो गजकर्णकः।
लम्बोदरश्च विकटो विघ्न नाशो विनायकः॥
धूम्रकेतुर्गणाध्यक्षो भालचन्द्रो गजाननः।
द्वादशैतानि नामानि यः पठेच्छृणुयादपि॥
विद्यारम्भे विवाहे च प्रवेशे निर्गमे तथा।
संग्राम संकटे चैव विघ्नस्तश्य न जायते॥
॥इति श्रीगणेशद्वादशनामस्तोत्रं सम्पूर्णम॥
द्वादश नामों का अर्थ:
वक्रतुण्ड: टेढ़ी सूंड वाले। एकदन्त: एक दांत वाले। कृष्णपिङ्गाक्ष: गहरी पीली-काली आँखों वाले। गजवक्त्र: हाथी के मुख वाले। लम्बोदर: बड़े पेट वाले। विकट: विशाल या विपरीत परिस्थितियों में रक्षा करने वाले। विघ्नराज (विघ्ननाशक): बाधाओं को दूर करने वाले। धूम्रवर्ण: धुएँ के समान वर्ण वाले। भालचन्द्र: मस्तक पर चंद्रमा धारण करने वाले। विनायक: सबके विशेष नायक। गणपति: गणों के स्वामी। गजानन: हाथी के समान मुख वाले।
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