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Sri Hanuman Pratha Smaran | श्री हनुमान प्रातः स्मरण

Sri Hanuman Pratha Smaran

Sri Hanuman Pratha Smaran | श्री हनुमान प्रातः स्मरण: दोस्तों नमस्कार, आज हम आपको इस लेख के जरिए श्री हनुमान प्रातः स्मरण (Sri Hanuman Pratha Smaran) के बारे में बात करेंगे। प्रातःकाल में हनुमानजी का स्मरण करने से मन, शरीर और जीवन में दिव्य ऊर्जा का संचार होता है। श्री हनुमान जी की यह श्लोक के पाठ और श्रवण मात्र से हनुमान जी अति प्रसन्न होते है। इस श्लोक का पाठ जीवन में सकारात्मकता लाने वाला माना गया है। श्री हनुमान जी अपने भक्तों की सभी इच्छाओं को भी पूरा करते है।

Sri Hanuman Pratha Smaran

श्री हनुमान प्रातः स्मरण

Yatra Yatra Raghunatha Keertanam,
Tatra Tatra Kruta-Mastaka Anjalim ।
Bhashpa Vari Paripurna Lochanam,
Marutim Namata Rakashasa Antakam ॥

यत्र यत्र रघुनाथकीर्तनं
तत्र तत्र कृतमस्तकांजलिम् ।
बाष्पवारिपरिपूर्णालोचनं
मारुतिं नमत राक्षसान्तकम् ॥

अर्थ: जहाँ-जहाँ भगवान राम का कीर्तन होता है, वहाँ-वहाँ हनुमान जी विनम्रता से हाथ जोड़कर उन्हें प्रणाम करते हुए, उपस्थित रहते हैं। ऐसे राक्षसों का अंत करने वाले पवनपुत्र हनुमान जी को नमस्कार।

Manojavam Marutha Thulya Vegam,
Jithendriyam Budhimatham Varishtam ।
Vathathmajam Vanara Yudha Mukyam,
Sree Rama Dhootham Sirasa Namami ॥

मनोजवं मारुततुल्यवेगं
जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम् ।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं
श्री रामदूतं शरणं प्रपद्ये ॥

अर्थ: जिनकी गति मन के समान है, और जिनका वेग वायु के समान है। जो परम जितेन्दिय और बुद्धिमानों में श्रेष्ठ हैं, उन पवनपुत्र वानरों में प्रमुख श्रीरामदूत की मैं शरण लेता हूं।

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