वृंदावन: पूज्य संत प्रेमानंद महाराज ने अपने प्रवचन में गलती और पाप के बीच का अंतर बेहद सरल उदाहरणों से समझाया। उनके वचनों ने भक्तों के मन में उठता यह पुराना सवाल शांत कर दिया कि आखिर गलती और पाप में फर्क क्या होता है?
महाराज ने स्पष्ट किया कि गलती वह होती है जो बिना सोचे-समझे, अनजाने में या लापरवाही से हो जाए। इसमें किसी प्रकार की बुरी मंशा नहीं होती। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, “जैसे चलते-चलते किसी से अनजाने में टक्कर हो जाए, तो वह एक साधारण भूल है।”
वहीं दूसरी तरफ, पाप वह होता है जो व्यक्ति जान-बूझकर, इच्छा और संकल्प से करता है। जब कोई व्यक्ति सही-गलत जानते हुए भी गलत रास्ता चुनता है, तो वह पाप कहलाता है। इसलिए, पाप में व्यक्ति की मंशा और निर्णय दोनों शामिल होते हैं।
प्रायश्चित के विषय में प्रेमानंद महाराज ने कहा कि भगवान का नाम ही सच्चा उपाय है—“चाहे गलती हो या पाप, जब व्यक्ति ईमानदारी से भगवान का नाम लेता है, कीर्तन करता है और भक्ति में मन लगाता है, तो मन शुद्ध होता है और दिल को शांति मिलती है।”
उन्होंने भक्तों से आग्रह किया कि नियमित रूप से नाम जप करें, व्यवहार को सुधारें और भक्ति में मन लगाएँ। यही सच्चा प्रायश्चित है और जीवन को पवित्र व सार्थक बनाता है।

