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October 2, 2026
Mantra

Mangal Mangal Ho Jagat Mein Sab Mangalmay Ho | Mangal Bhavna | मंगल भावना

Mangal Mangal Ho Jagat Mein

मंगल भावना | Mangal Bhavna: मुनि श्री प्रमाण सागर जी द्वारा रचित यह मंगल भावना पाठ जगत शांति एवं सर्व प्राणियों के लिए परम् हितकारी भावनाओं से परिपूर्ण है।

Mangal Mangal ho Jagat Mein

Mangal Bhavna

मंगल भावना

मंगल-मंगल होय जगत में, सब मंगलमय होय ।
इस धरती के हर प्राणी का, मन मंगलमय होय ॥

कहीं क्लेश का लेष रहे ना, दुःख कहीं भी होय ।
मन में चिन्ता भय न सतावे, रोग-शोक नहीं होय॥

नहीं बैर अभिमान हो मन में, क्षोभ कभी नहीं होय ।
मैत्री प्रेम का भाव रहे नित, मन मंगलमय होय ॥

॥ मंगल-मंगल होय जगत में, सब मंगलमय होय ॥

मन का सब संताप मिटे अरु, अंतर उज्ज्वल होय ।
राग-द्वेष औ मोह मिट जाए, आतम निर्मल होय ॥

प्रभु का मंगलगान करें सब, पापों का क्षय होय ।
इस जग के हर प्राणी का हर दिन, मंगलमय होय ॥

॥ मंगल-मंगल होय जगत में, सब मंगलमय होय ॥

गुरु हो मंगल, प्रभु हो मंगल, धर्म सुमंगल होय ।
मात-पिता का जीवन मंगल, परिजन मंगल होय ॥

जग का जंगल, गण का मंगल, मन का मंगल होय ।
राजा-प्रजा सभी का मंगल, धरा धर्ममय होय ॥

॥ मंगल-मंगल होय जगत में, सब मंगलमय होय ॥

मंगलमय हो प्रात हमारा, रात सुमंगल होय ॥
जीवन के हर पल क्षण की बात सुमंगल होय ॥

घर-घर में मंगल छा जावे, जन-जन मंगल होय ।
इस धरती का कण-कण पावन औ मंगलमय होय ॥

॥ मंगल-मंगल होय जगत में, सब मंगलमय होय ॥

॥ दोहा ॥

सब जग में मंगल बढ़े, टले अमंगल भाव ।
है ‘प्रमाण’ की भावना, सब में हो सद्भाव ॥

॥ मुनि श्री प्रमाणसागर कृत ॥

Credit the Video: Muni Shri 108 Praman Sagar Ji (मुनि श्री १०८ प्रमाणसागर जी) YouTube Channel

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