36.1 C
Bhubaneswar
June 4, 2026
Blog

भगवद गीता श्लोक 11: समाज के हर सदस्य की भूमिका और कर्तव्य

अयनेषु च सर्वेषु यथाभागमवस्थिता: | भीष्ममेवाभिरक्षन्तु भवन्त: सर्व एव हि || 11||

एक समय की बात है, एक छोटे से गाँव में दो मित्र रहते थे – सूरज और राधा। दोनों बचपन से ही एक-दूसरे के बहुत अच्छे दोस्त थे। सूरज गाँव के एक छोटे से स्कूल में शिक्षक था, और राधा एक सशक्त महिला समाजसेवी थी। लेकिन एक दिन गाँव में बड़ा संकट आ गया। गाँव में कुछ बाहरी लोग आकर वहाँ की जमीन पर कब्जा करना चाहते थे। गाँववालों ने निर्णय लिया कि अब उनकी प्रतिष्ठा और इज़्ज़त बचाने का समय आ गया है, और इसके लिए उन्हें एकजुट होना होगा।

राधा और सूरज ने भी अपनी-अपनी भूमिका तय की। राधा ने गाँववालों को एकत्र किया और सूरज ने स्कूल के बच्चों को प्रेरित किया। दोनों ने अपने-अपने कर्तव्यों को समझा और सबको उनके हिस्से की जिम्मेदारी समझाई। जैसे भगवान श्री कृष्ण ने भगवद गीता में कहा था – “सभी को अपनी-अपनी भूमिका निभानी चाहिए।”

राधा को लगता था कि यह सिर्फ उसके संघर्ष का समय है, लेकिन सूरज ने उसे समझाया, “तू अकेले कुछ नहीं कर सकती। सभी को अपनी भूमिका निभानी होगी, चाहे वो बड़ों का समर्थन हो या बच्चों का उत्साह बढ़ाना।”

समाज में हर व्यक्ति का योगदान महत्व रखता है। सूरज और राधा दोनों ने एकजुट होकर गाँव को बचाया। गाँववालों ने दिखाया कि जब सभी अपने हिस्से का काम सही ढंग से करते हैं, तो कोई भी संकट जीतने से नहीं रोक सकता।

अंत में सूरज ने राधा से कहा, “देखा, जैसे श्री कृष्ण ने कहा था – अगर हर कोई अपनी भूमिका निभाए, तो बड़ी से बड़ी चुनौतियाँ भी पार हो जाती हैं।”

यह कहानी हमें बताती है कि समाज की प्रगति और सुरक्षा में हर व्यक्ति का योगदान महत्वपूर्ण होता है। अगर हम सभी एकजुट होकर अपनी जिम्मेदारियाँ समझें और निभाएं, तो हम किसी भी संकट का सामना कर सकते हैं।

याद रखो, हर किसी का संघर्ष अलग होता है, लेकिन अगर हम सब अपनी भूमिका निभाएं, तो हम सब मिलकर बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं।

Related posts

राधा नाम जप से खुलता है भगवान का द्वार: श्री हित प्रेमानंद जी

Bimal Kumar Dash

सच्चे संतों की पहचान: परम पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज का प्रेरक संदेश

Bimal Kumar Dash

नौ का जादू: 9 सितंबर 2025 को खुलने वाला रहस्यमयी पोर्टल, चिकित्सा और सिद्धि का केंद्र

Bimal Kumar Dash