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September 22, 2026
Bhajan

Alakh Niranjan Aadesh | अलख निरंजन आदेश

Alakh Niranjan Aadesh

Alakh Niranjan Aadesh | अलख निरंजन आदेश: दोस्तों नमस्कार, आज हम आपको इस लेख के जरिए अलख निरंजन आदेश के बारे में बात करेंगे। इस भजन को सुनते ही मन शांत होने लगता है और भीतर एक गहरी ऊर्जा महसूस होती है। अलखिया कभी रुक के आलेख नहीं लेते। साधु एक जगह रुककर भिक्षा इसलिए नहीं लेते क्योंकि उनका जीवन ‘प्रवाह’ में होता है। जैसे बहता पानी कभी दूषित नहीं होता, वैसे ही एक सच्चा संत सांसारिक मोह-माया, एक स्थान और एक ही घर में बंधकर नहीं रह सकता।

Alakh Niranjan Aadesh

अलख निरंजन आदेश

माया लेके आये मच्छिंदर
झोली में गुड़, भस्म, अंबर
रुद्र माला, वैराग्य छाया
भोग-मोक्ष का भेद दिखाया

नाथ पंथ के दादा गुरु
काया पलटे सत्य शुरू
अलख निरंजन आदेश!
एक ही संदेश, आदेश!

काल कर्म वलेश भस्म
जोगी निर्विशेष
आदेश! आदेश!
आगे आगे गोरख जागे
अलख निरंजन!

काल का लेखा, पल में जले
अघोर अग्नि में, भाग्य ढले
ॐ रं रं रं, हूं- हूं फट्
क्रीं कालाग्नये आदेश तत्

अलख निरंजन, आदेश! आदेश!
जड से चेतन, टूटे हर बंधन
अलख निरंजन! आदेश! आदेश!
शब्द सांचा पिंड कंचा
चलो मन्त्र ईश्वरो वाचा

भगवा वेश, हाथ में खप्पर
भैरव रूप, शिव का जपकर
जहाँ – जहाँ जाऊँ नगर-डगर
लगे वहाँ फिर जोगी मेला
शिव का धुना, गोरख तापे
काल कंटक थर-थर कांपे
हूं फट्!, हूं फट्!, हूं फट्!

नव नाथ करें मेरी रक्षा
चारों युग में साथ की यक्षा
हनुमंत बलवान,
करे भय का नाश
रोग–शोक कटे पल में आज
रिद्धि – सिद्धि आंगन आए
अन्नपूर्णा अन्न बरसाये
मैं ना देह, मैं ना नाम
मैं केवल ज्वाला, केवल राम
शब्द सांचा, पिंड काचा
ईश्वरो वाचा, सत्य राचा
जो कहा सो हुआ
नाथ की वाणी ब्रह्म सत्य
ॐ, क्रीं हूं फट्
काल कर्म क्लेश भस्म
स्वाहा! आदेश! आदेश! आदेश!

ॐ गुरु जी
गोरख जती, मच्छेन्द्र का चेला
शिव के रूप में दिखे अलबेला
कानों कुंडल, गले में नादी
हाथ त्रिशूल, नाथ हैं आदि
अलख पुरुष को करूँ आदेश
जन्म-जन्म के काटो कलेश
भगवा वेश हाथ में खप्पर
भैरव शिव का चेला
जहाँ-जहाँ जाऊं नगर डगर
लगे वहां फिर मेला
शिव का धुना गोरख तापे
काल कंटक थर-थर कांपे
मेरी रक्षा करे नव नाथ
राम दूत, हनुमंत बलवंत
रिद्धि – सिद्धि आंगन विराजे
माई अन्नपूर्णा सुखवंत
शब्द सांचा पिंड काचा
चलो मन्त्र ईश्वरो वाचा
अलख निरंजन,आदेश! आदेश!

सब में समाया एक ही प्रकाश
ना ऊँचा कोई, ना कोई नीचा
एक समान ज्योत का आश
अलख निरंजन, आदेश! आदेश!
शिव में जीव, सहज ही लीन
अनंत से अनंत तक
पाये शिवत्व योगी प्रवीण
घट में ज्योत है, ज्योत में घट
जो खोजे बाहर, वो भीतर ही बसे
ॐ शिवगोरक्ष
आदेश! आदेश! आदेश!

Credit the Video : Aditya YouTube Channel

Credit the Video : वैदिक मंत्र YouTube Channel

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