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September 2, 2026
Ashtakam

Bhoothnath Ashtakam | भूतनाथ अष्टकम्

Bhootnath Ashtakam

Bhoothnath Ashtakam | भूतनाथ अष्टकम्: दोस्तों नमस्कार, आज हम आप लोगों को इस लेख के माध्यम से भूतनाथ अष्टकम् के बारे में बताने वाले हैं। भूतनाथ अष्टकम जो भगवान शिव को समर्पित आठ छंद हैं। जो शिव की गुणों, शक्तियों और बहुमुखी प्रकृति को दर्शाते हैं। उनको कई नामों से जाना जाता है, जैसे भोलेनाथ, भूतनाथ, नागनाथ, महादेव, महाकाल, आदिदेव, किरात, शंकर, चन्द्रशेखर, जटाधारी, मृत्युंजय, त्रयंबक, महेश, विश्वेश, महारुद्र, विषधर, नीलकंठ, महाशिव, उमापति, काल भैरव, त्रिलोचन चंद्र-आभूषण, आदि। भूतनाथ अष्टकम के माध्यम से भक्त भगवान शिव के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा व्यक्त करते हैं।

Bhoothnath Ashtakam

भूतनाथ अष्टकम्

शिव शिव शक्तिनाथं संहारं शं स्वरूपम्
नव नव नित्यनृत्यं ताण्डवं तं तन्नादम् ।
घन घन घूर्णिमेघं घङ्घोरं घं त्रिनादम्
भज भज भस्मलेपं भजामि भूतनाथम् ॥ १॥

कल कल कालरूपं कल्लोलं कं करालम्
डम डम डमनादं डम्बुरुं डंकनादम् ।
सम सम शक्तग्रीवं सर्वभूतं सुरेशम्
भज भज भस्मलेपं भजामि भूतनाथम् ॥ २॥

रम रम रामभक्तं रमेशं रां रारावम्
मम मम मुक्तहस्तं महेशं मं मधुरम् ।
बम बम ब्रह्मरूपं वामेशं बं विनाशम्
भज भज भस्मलेपं भजामि भूतनाथम् ॥ ३॥

हर हर हरिप्रियं त्रितापं हं संहारम्
खम खम क्षमाशीलं सपापं खं क्षमणम् ।
द्दग द्दग ध्यानमूर्त्तिं सगुणं धं धारणम्
भज भज भस्मलेपं भजामि भूतनाथम् ॥ ४॥

पम पम पापनाशं प्रज्वलं पं प्रकाशम्
गम गम गुह्यतत्त्वं गिरीशं गं गणानाम् ।
दम दम दानहस्तं धुन्दरं दं दारुणम्
भज भज भस्मलेपं भजामि भूतनाथम् ॥ ५॥

गम गम गीतनाथं दूर्गमं गं गंतव्यम्
टम टम रुण्डमालं टङ्कारं टंकनादम्।
भम भम भ्रं भ्रमरं भैरवं क्षेत्रपाळम्
भज भज भस्मलेपं भजामि भूतनाथम् ॥ ६॥

त्रिशूलधारी संहारकारी गिरिजानाथं ईश्वरम्
पार्वतीपति त्वं मायापति शुभ्रवर्णं महेश्वरम् ।
कैलासनाथ सतिप्राणनाथ महाकालं कालेश्वरम्
अर्धचन्द्रं शिरकिरीटं भूतनाथं शिवं भजे ॥ ७॥

नीलकण्ठाय सत्स्वरूपाय सदाशिवाय नमो नमः
यक्षरूपाय जटाधराय नागदेवाय नमो नमः
इन्द्रहाराय त्रिलोचनाय गङ्गाधराय नमो नमः
अर्धचन्द्रं शिरकिरीटं भूतनाथं शिवं भजे ॥ ८॥

तव कृपा कृष्णदासः भजति भूतनाथम्
तव कृपा कृष्णदासः स्मरति भूतनाथम् ।
तव कृपा कृष्णदासः पश्यति भूतनाथम्
तव कृपा कृष्णदासः पिबति भूतनाथम् ॥ ९॥

यः पठति निष्कामभावेन सः शिवलोकं सगच्छति॥
॥ इति श्री कृष्णदास विरचित भूतनाथ अष्टकम् सम्पूर्णम् ॥

Credit the Video: H-Spiritual YouTube Channel

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