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August 28, 2026
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Shri Krishnachandrani Manas Pooja | श्री कृष्णचंद्रनी मानस पूजा | श्री विष्णु प्रार्थना

Shri Krishnachandrani Manas Pooja

Shri Krishnachandrani Manas Pooja | श्री कृष्णचंद्रनी मानस पूजा | श्री विष्णु प्रार्थना: दोस्तो नमस्कार, आज हम आप लोगों को इसी पोस्ट के माध्यम से श्री कृष्णचंद्रनी मानस पूजा के बारे में बताएंगे।

Shri Krishnachandrani Manas Pooja

श्री कृष्णचंद्रनी मानस पूजा

श्री विष्णु प्रार्थना

सदा श्री राधा ने कमल सम नेत्रे निरखता।
रूपाला श्यामांगे मम हृदय कुंजे विहरता।
गले गुंजा मोती रतन मणिमाला लटकती।
मृगांका भाजेवी मुकुट मणि शोभा झलकती।
शशि शोभा जेव्हा मुख कमल थी हास्य हसता॥

लई हस्ते वेणु निज मुख थकी नाद पुरता।
रही राधा संगे हरि विजय पामो हर घड़ी।
रटो प्रेमे भक्तो मधुमथन नामो गड़गड़ी।
सुधा व्याथी आवो हृदय गृह माछै शुभ घड़ी।
बिराजो रत्नोथी जड़ित वर सिंहासन चढ़ी॥

सुचिन्न श्रीवाला पदकमल नेहुं प्रणमिने।
सुपुष्पोने दूर्वा जल अर्घ्य अर्पूं जनमिने।
स्वीकारो गंगा ना विमल जलनु आचमन सुखे।
रहो श्रद्धा साथे तव सुभग नामो मम मुखे।
समर्प्युं जे पंचामृत ग्रहण भावे वळी करो॥

श्रुति नाम मंत्रोने मुख थकी भव्याथी भय हरो।
करो कालिंदी ना सुभग जल थी स्नान ज तमे।
शिवादि देवोने स्तवन तव सेवा बहु गमे।
करुं धारा हाथे लई कनक नो कुंज जननी।
नहीं थाये प्राप्ति हरि-विमुख ने एज पड़नी॥

स्वीकारो आ पीतांबर भलु लई आचमन करी।
वळी अर्पु यज्ञो पवित्र शुभ कंठे तव हरि।
तमे दैत्यो मारी रुक्मिणि विवाहें करि वरिया।
पछी जाम्बवंती प्रियतम पिता पावन करिया।
करुं कस्तूरी ने कुमकुम घसी भाल अर्चा॥

निहाळे जे तेनी जम नहीं करे लेश चर्चा।
तुम्हारे कंठे हूं कुसुम तुलसी माळ अर्पूं।
करी धूपें हूं तो मह मह तता रोज तर्पुण।
शशांक भाजे हूं मुख कमल ने दीपक कंकू।
धरूं प्रक्षालिने कर सुरभि गंधी जल भलु॥

स्वभावै छौ पूरा सतत वळी हूं तो पण हरि।
अति प्रेमे भव्यो षट्-रस जमाडू मन करी।
पदार्थो सो नाना मणि जड़ित ताटे बहुविधि।
रसोथी स्वादिष्ट अर्पण करया छे निरवधि।
कचोरी ने पूर घृत मद दहीओ दलवळी॥

मुरब्बो बासुंदी। सरस दूध मासा कर भळी।
जलेबी ने खाजा। वळी सुतर फेणी घृतभरी।
कली लाडू पेड़ा बरफी दूध पाके सहधरी।
सुवाली श्रीखंडे सहित कुमळी रोटली वळी।
शिरो सेवो झीणी अति रुचिर घारी घृत तळी॥

प्रिय श्री विष्णुने घृतवती भर्या घेबर वळी।
मृदु रंगे रूडी पुरण भरिने वेढमी भली।
बदामी पाके छे बर्ख हिमना जे चळकता।
पदार्थो छे सर्वे मणिकनक ताटे झळकता॥

अनंतो छे शाको मठड़ी मटियां पापड़ तळ्या।
गळी खाटी केरी रस मधुरती खावणी गळ्या।
अथाणा छे सर्वे वळी चटनियों जे विविध धनी।
रसोई रूडी छे जमण करवा पांच विधनी।
प्रसाद आकांक्षी। तव सकल मित्रो तव हरि।
जमो राधा संगे परम सुखने धारण करी॥

पीवा ल्यो जारीने विमल यमुना ना जल भरी।
पधारो चौपाने शुभग जलनु आचमन करी।
करी अर्पो इंदु सम सरस तांबूल तुजने।
तमारी सेवामां अनुचर करि राख मुजने॥

सुगंधीने अर्पो फल कुसुम साथे बहुवळी।
सुरतनोनी साथे अर्पण करी काय सघळी।
थवा पूजा पूरी परम सुखमां आरती करूं।
तमारी राधाने सहृदयमां ध्यान ज धरूं॥

सुपुष्पोने बिल्व दल तुलसी दूर्वा अंकुर तणी।
समर्पूं हूं पुष्पांजलि मुखवडे मंत्र ज भणी।
फरी चारे फेरा तव परिक्रमाओ वळी करी।
जन्म मृत्यु भीति दर्शन करीने परहरी॥

करी शाष्टांगें नमन करूं छुं हूं हरि तणुं।
हर्यांनां दुःखो ने हरिना मनमां छे बळ घणुं।
गाई तारुं गाणुं नर तन करूं हूं भाव वर्णी।
स्तुति हे श्री विष्णु व्रत थकी करूं छुं शिखरिणी॥

तमारा छुं कामी भव भव तणो नाथ जीवन।
प्रभाव ए छो स्वामी अखिल जगदाधार शिवना॥

सदा जे श्री कृष्णे चपळ मनने सुस्थिर करे।
जनो मध्यें ते तो अमर थईने निर्भय फरे।
हरिनी सेवाथी भव तरि गया भक्त सुखमां।
न ते माना गर्भे पुनरपि ह्या दास दुःखमां॥

वपु कांती छायो घन सदृश छे श्यामळ घणो।
लीधो हर्षे लाडू कर कमलमां माखण तणो।
करे शोभे वेणु हृदय चिरता गोपीजनना।
रूपाळा वृक्षो जे सरस करीने पत्र रचना॥

रही मित्रो साथे रमत रमता जे हर घड़ी।
रमाडे गोपीने कदंब तरु छे ते पर चढ़ी॥

तमारी सेवामां कई रही गयुं होय मुजथी।
कृपाळु श्री विष्णु परिपूर्ण ते थाव तुजथी।
सदा हो विष्णुनो विजय सघळा काम करता।
हरिना नेत्रोथी दर्शन मने थाव मरता॥

तमारी पूजाने तन मन थकी मानस करे।
वधाय दुःखोंने पर हरि हरिनो कर धरे।
कृपासिंधु विष्णु तव गुणकथा कर्णपुटमां।
प्रवेशी भक्तोंना हृदय कमळे रोज सुखमां॥

तमारा भक्तोने धन यश मळेम विहरो।
तमारी भक्तिथी भव जल तरे एम ज करो॥

श्री हरि केरा चरणमा मानस पूजा संग।
कृष्ण लाल जी अर्पिने नमन करे शाष्टांग।
मानस पूजा जे करे धरी हरिनुं ध्यान।
ते जनने अंते पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान॥

Credit the Video : Anuradha Paudwal Official YouTube Channel

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