Raghunandan Raghav Ram Hare | रघुनन्दन राघव राम हरे: दोस्तो नमस्कार, आज हम आप लोगों को इसी पोस्ट के माध्यम से रघुनन्दन राघव राम हरे के बारे में बताएंगे। चैत्र मास, शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को भगवान राम का प्राकट्य हुआ था।
इस दिन को राम नवमी के रुप में मनाया जाता है। भगवान राम के इस भजन का पाठ व्यक्ति का मन शांति, धैर्य, और सुख समृद्धि प्राप्ति होती है। भगवान राम को प्रसन्न करने और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए के लिए इस भजन का प्रतिदिन श्रद्धा एवं भक्ति भाव से पाठ करें।
Raghunandan Raghav Ram Hare
रघुनन्दन राघव राम हरे
रघुनन्दन राघव राम हरे, सीताराम हरे सीताराम हरे।
बृजनन्दन माधव श्याम हरे, राधेश्याम हरे, राधेश्याम हरे॥
हे अवतारी, जगहितकारी, दुष्ट विनाशक, भवभय हारी।
दोष दलन की शक्ति हमें दो, अपनी निर्मल भक्ति हमें दो॥
वह भक्ति जो सबसे प्रेम करे, सीताराम हरे सीताराम हरे॥
तुमने पिछड़ों को अपनाया, प्रेम दिया सम्मान दिलाया।
हम को भी यह कला सिखा दो, भेदभाव का भूत भगा दो॥
हों सिद्ध आपके भक्त खरे, राधेश्याम हरे, राधेश्याम हरे॥
मायावी बढ़ रही असुरता, विकल हो रही आज मनुजता।
जन- जन में देवत्व जगा दो, जीवन में, सहयोग बढ़ा दो॥
फिर विकल मनुजता धीर- धरे, सीताराम हरे सीताराम हरे॥
मानव की बढ़ गई शक्तियाँ, दानव सी क्यों हुई वृत्तियाँ।
प्रभु! सबके मन स्वच्छ बना दो, सबमें शुभ सद्भाव जगा दो॥
कर दो सबके मन हरे- भरे, राधेश्याम हरे, राधेश्याम हरे॥
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