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September 10, 2026
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Gale Mein Lipta Naag Hai | गले में लिपटा नाग है और कंठ भरा है ज़हर से

Gale Mein Lipata Naag Hai

Gale Mein Lipta Naag Hai | गले में लिपटा नाग है और कंठ भरा है ज़हर से: दोस्तों नमस्कार, आज हम आपको इस लेख के जरिए गले में लिपटा नाग है और कंठ भरा है ज़हर से भजन के बारे में बात करेंगे।

Gale Mein Lipta Naag Hai

गले में लिपटा नाग है और कंठ भरा है ज़हर से

गले में लिपटा नाग है और कंठ भरा है ज़हर से
जटा में गंगा धारन किए, शांत खड़े वो पर्वत से।

श्मशान की रज ओढ़े तन पे, भस्म से खुद को सजाते हैं
भूतों प्रेतों के संग बैठ, सबको अपना बनाते हैं।

ना ऊँच-नीच का भेद वहाँ, ना कोई बड़ा ना छोटा है
जो सच्चे मन से पुकारे, उसका हर दुख वो धोता है।

त्रिनेत्र खुल जब जाए तो, समय भी ठहर सा जाता है
डमरू की एक नाद से, नया स्वर बन जाता है।

विनाश में भी सृजन छुपा, ये रहस्य हमें समझाते हैं,
मिटा अहंकार जगत का सारा, फिर नया जग वो बसाते हैं।

नंदी संग कैलाश पे बैठे, भक्तों की राह सजाते हैं
कौन आया किस भाव से, पल में पता लगाते हैं।

ऊंचा पर्वत धाम उनका, कैलाश जहां वो रहते हैं
कोई भोला कोई शंकर, ना जाने क्या क्या उन्हें कहते हैं।

ना दिन उनका ना रात कोई, ना जन्म ना कोई अंत
हर कण कण में बसे हुए हैं, वही सत्य वही अनंत।

जो त्यागे सब मोह माया, वही उनको पाता है
और के बार जो जान लिया, फिर उनका ही हो जाता है।

ना कठिन कोई साधना, ना भारी कोई विधान चाहिए
बस “शिव शिव” जप ले मन से, अगर शंकर भगवान चाहिए

गले में नाग, जटा में गंगा, नयन में करुणा अपार है
ऐसे भोले, ऐसे शंकर, जो करते सबका उद्धार हैं

Credit the Video : ShivRaga AI Studio YouTube Channel

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