June 9, 2026
Bhajan

Gale Mein Lipta Naag Hai | गले में लिपटा नाग है और कंठ भरा है ज़हर से

Gale Mein Lipata Naag Hai

Gale Mein Lipta Naag Hai | गले में लिपटा नाग है और कंठ भरा है ज़हर से: दोस्तों नमस्कार, आज हम आपको इस लेख के जरिए गले में लिपटा नाग है और कंठ भरा है ज़हर से भजन के बारे में बात करेंगे।

Gale Mein Lipta Naag Hai

गले में लिपटा नाग है और कंठ भरा है ज़हर से

गले में लिपटा नाग है और कंठ भरा है ज़हर से
जटा में गंगा धारन किए, शांत खड़े वो पर्वत से।

श्मशान की रज ओढ़े तन पे, भस्म से खुद को सजाते हैं
भूतों प्रेतों के संग बैठ, सबको अपना बनाते हैं।

ना ऊँच-नीच का भेद वहाँ, ना कोई बड़ा ना छोटा है
जो सच्चे मन से पुकारे, उसका हर दुख वो धोता है।

त्रिनेत्र खुल जब जाए तो, समय भी ठहर सा जाता है
डमरू की एक नाद से, नया स्वर बन जाता है।

विनाश में भी सृजन छुपा, ये रहस्य हमें समझाते हैं,
मिटा अहंकार जगत का सारा, फिर नया जग वो बसाते हैं।

नंदी संग कैलाश पे बैठे, भक्तों की राह सजाते हैं
कौन आया किस भाव से, पल में पता लगाते हैं।

ऊंचा पर्वत धाम उनका, कैलाश जहां वो रहते हैं
कोई भोला कोई शंकर, ना जाने क्या क्या उन्हें कहते हैं।

ना दिन उनका ना रात कोई, ना जन्म ना कोई अंत
हर कण कण में बसे हुए हैं, वही सत्य वही अनंत।

जो त्यागे सब मोह माया, वही उनको पाता है
और के बार जो जान लिया, फिर उनका ही हो जाता है।

ना कठिन कोई साधना, ना भारी कोई विधान चाहिए
बस “शिव शिव” जप ले मन से, अगर शंकर भगवान चाहिए

गले में नाग, जटा में गंगा, नयन में करुणा अपार है
ऐसे भोले, ऐसे शंकर, जो करते सबका उद्धार हैं

Credit the Video : ShivRaga AI Studio YouTube Channel

Disclaimer: Bhakti Bharat Ki / भक्ति भारत की (https://bhaktibharatki.com) वेबसाइट का उद्देश्य किसी की आस्था या भावनाओं को ठेस पहुंचना नहीं है। इस वेबसाइट पर प्रकाशित उपाय, रचना और जानकारी को भिन्न – भिन्न लोगों की मान्यता, जानकारियों के अनुसार और इंटरनेट पर मौजूदा जानकारियों को ध्यान पूर्वक पढ़कर, और शोधन कर लिखा गया है। इस पोस्ट पर दिए गए जानकारी केवल सामान्य ज्ञान और शैक्षिक उद्देश्य के लिए बनाया गया है। यहां यह बताना जरूरी है कि Bhakti Bharat Ki / भक्ति भारत की (https://bhaktibharatki.com) इसमें चर्चा की गई किसी भी तरह जानकारी, मान्यता, सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता की पूर्ण रूप से गारंटी नहीं देते। गले में लिपटा नाग है और कंठ भरा है ज़हर से भजन का अर्थ और महत्व को अमल में लाने से पहले कृपया संबंधित योग्य विशेषज्ञ अथवा पंड़ित की सलाह अवश्य लें। गले में लिपटा नाग है और कंठ भरा है ज़हर से भजन का उच्चारण करना या ना करना आपके विवेक पर निर्भर करता है। इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी का उपयोग पूरी तरह से उपयोगकर्ता की अपनी ज़िम्मेदारी पर है। किसी भी प्रकार की हानि, नुकसान, या परिणाम के लिए हम प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार नहीं होंगे।

Facebook
Instagram
YouTube

Related posts

Amrit Hai Hari Naam Jagat Me | अमृत ​​है हरि नाम जगत में

bbkbbsr24

Jab Shree Ram Se Mile Hanuman | जब श्री राम से मिले हनुमान

Bimal Kumar Dash

Haath Chhoda Jo Tune | हाथ छोड़ा जो तूने: हे कृष्णा, तू ही बता फिर कौन बचाएगा मुझे

Bimal Kumar Dash