Brundabati Stuti | ଶ୍ରୀ ବୃନ୍ଦାବତୀଙ୍କ ସ୍ତୁତି: दोस्तो नमस्कार, आज हम आप लोगों को इसी पोस्ट के माध्यम से Brundabati Stuti के बारे में बताएंगे।
Brundabati Stuti
ଶ୍ରୀ ବୃନ୍ଦାବତୀଙ୍କ ସ୍ତୁତି
ଶ୍ରୀ ବୃନ୍ଦାବତୀଙ୍କ ସ୍ତୁତି
ମାଗୋ ତୁଳସୀ ଦେବୀ,
ଅଟୁ ଶ୍ରୀକୃଷ୍ଣ ପ୍ରାଣବଲ୍ଲଭୀ ।
ପ୍ରଭାତୁ ଉଠିଣ ତୋ ମୁଖ ଚାହିଁଣ
ସନ୍ଧ୍ୟାକାଳେ ସନ୍ଧ୍ୟା ଦେଇ ।
ଓଦା ବସ୍ତ୍ର ପିନ୍ଧି ତୋ ପାଦ ସେବିଲେ
ବୈକୁଣ୍ଠ ଲଭିବା ପାଇଁ ।
ଚାରିପାଶେ ଚାରି ଚାମର ଢ଼ାଳନ୍ତି
ରୁକ୍ମଣୀ ଲିପେ ଚଉରା ।
ଚାରିପାଶେ ଚାରି ତପି ବସିଛନ୍ତି
ମଧ୍ୟ ବସେ ବସୁନ୍ଧରା ।
ସତ୍ୟଯୁଗେ ତୋର ସତ୍ୟବତୀ ନାମେ
ତ୍ରେତା ଯୁଗରେ ମାଳତୀ ।
ଦ୍ଵାପର ଯୁଗରେ ନାମ ଯେ ତ୍ରିପୁରା
କଳିଯୁଗେ ବୃନ୍ଦାବତୀ ।
ତୁଳସୀର ମାଳ ତୁଳସୀର ଦଳ
ତୁଳସୀ ଭୂଷଣ ହୋଇ ।
ତୁଳସୀ ମୂଳରେ ଲୟ ଲଗାଇଲେ
ନୀଳଚକ୍ର ଦିଶୁଥାଇ ।
ମୂଳେ ତୋର ଗଙ୍ଗା ଡ଼ାଳେ
ତୋର ବିଷ୍ଣୁ ପତ୍ରେ ଦେବତାଙ୍କ ବାସ ।
ତୋ ପତ୍ର ପଡ଼ିଲେ ମଣୋହି ହୁଅଇ
କହଇ ଗୋଲକ ଦାସ ।
Credit the Video : Minarani Dash YouTube Channel
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