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April 28, 2026
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Annapurna Ashtakam | Goddess Annapoorneshwari | श्री अन्नपूर्णा अष्टकम

Annapurna Ashtakam

Annapurna Ashtakam | Goddess Annapoorneshwari | श्री अन्नपूर्णा अष्टकम: दोस्तों नमस्कार, आज हम आपको इस लेख के जरिए श्री अन्नपूर्णा अष्टकम के बारे में बात करेंगे।

श्री अन्नपूर्णा अष्टकम की रचना आदि शंकराचार्य जी ने की थी। “अन्न” का अर्थ है भोजन और धान्य, तथा “पूर्णा” का अर्थ है पूर्ण या सम्पूर्ण। इस प्रकार अन्नपूर्णा का वास्तविक अर्थ है वह देवी जो अन्न से परिपूर्ण हों। माता अन्नपूर्णा एक हाथ में रत्नजड़ित पात्र धारण करती हैं, जो अन्न और धान्य से भरा होता है, और दूसरे हाथ में दिव्य चमच धारण करती हैं, जो समस्त जीवों के लिए उनके असीम पोषण और कृपा का प्रतीक है। वे जगत जननी हैं और समस्त प्राणियों का पालन-पोषण करने वाली देवी हैं। माता अन्नपूर्णा देवी आदिशक्ति का एक स्वरूप हैं और हिंदू धर्म में भोजन, समृद्धि तथा पालन की देवी के रूप में पूजित हैं। हिंदू धर्म में भोजन देना और प्रेमपूर्वक अन्न परोसना अत्यंत पुण्य माना गया है, इसलिए माता अन्नपूर्णा को अत्यंत लोकप्रिय देवी माना जाता है।

उनके कई मंदिर भारत में स्थित हैं, जिनमें सबसे प्रसिद्ध वाराणसी का अन्नपूर्णा देवी मंदिर है। उन्हें वाराणसी की अधिष्ठात्री माता भी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि अक्षय तृतीया माता अन्नपूर्णा का प्राकट्य दिवस है। अन्नपूर्णा पूजा ग्रीष्म ऋतु में चैत्र मास के शुक्ल पक्ष में की जाती है, जो अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार अप्रैल माह में आता है। माता अन्नपूर्णा की कृपा प्राप्त करने, दरिद्रता दूर करने तथा सुख-समृद्धि बनाए रखने हेतु भक्तजन अन्नपूर्णा शतनाम स्तोत्र (१०८ नाम) और अन्नपूर्णा सहस्रनाम स्तोत्र (१००८ नाम) का पाठ करते हैं।

माता अन्नपूर्णा के प्रमुख नाम:

विशालाक्षी (Visalakshi) – बड़ी नेत्रों वाली देवी
विश्वशक्ति (Visvasakti) – समस्त जगत की शक्ति
विश्वमाता (Visvamata) – संसार की माता
सृष्टिहेतुकवर्धनी (Srstihetukavardani) – संसार के कल्याण हेतु वरदान देने वाली
भुवनेश्वरी (Bhuvanesvari) – पृथ्वी एवं लोकों की अधिष्ठात्री देवी
रेणु (Renu) – परमाणु स्वरूप देवी
अन्नदा (Annada) – अन्न प्रदान करने वाली देवी

श्री अन्नपूर्णा अष्टकम

नित्यानन्दकरी वराभयकरी सौन्दर्यरत्नाकरी
निर्धूताखिलघोरपावनकरी प्रत्यक्षमाहेश्वरी ।
प्रालेयाचलवंशपावनकरी काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी ॥ १ ॥

नानारत्नविचित्रभूषणकरी हेमाम्बराडम्बरी
मुक्ताहारविलम्बमान विलसत् वक्षोजकुम्भान्तरी ।
काश्मीरागरुवासिता रुचिकरी काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी ॥ २ ॥

योगानन्दकरी रिपुक्षयकरी धर्मार्थनिष्ठाकरी
चन्द्रार्कानलभासमानलहरी त्रैलोक्यरक्षाकरी ।
सर्वैश्वर्यसमस्तवाञ्छितकरी काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी ॥ ३ ॥

कैलासाचलकन्दरालयकरी गौरी उमा शङ्करी
कौमारी निगमार्थगोचरकरी ओङ्कारबीजाक्षरी ।
मोक्षद्वारकपाटपाटनकरी काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी ॥ ४ ॥

दृश्यादृश्य विभूतिवाहनकरी ब्रह्माण्डभाण्डोदरी
लीलानाटकसूत्रभेदनकरी विज्ञानदीपाङ्कुरी ।
श्रीविश्वेशमनः प्रसादनकरी काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी ॥ ५ ॥

उर्वी सर्वजनेश्वरी भगवती माताऽन्नपूर्णेश्वरी
वेणीनीलसमानकुन्तलधरी नित्यान्नदानेश्वरी ।
सर्वानन्दकरी सदाशुभकरी काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी ॥ ६ ॥

आदिक्षान्तसमस्तवर्णनकरी शम्भोस्त्रिभावाकरी
काश्मीरा त्रिजलेश्वरी त्रिलहरी नित्याङ्कुरा शर्वरी ।
कामाकाङ्क्षकरी जनोदयकरी काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी ॥ ७ ॥

देवी सर्वविचित्ररत्नरचिता दाक्षायणी सुन्दरी
वामे स्वादुपयोधरा प्रियकरी सौभाग्य माहेश्वरी ।
भक्ताभीष्टकरी सदाशुभकरी काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी ॥ ८ ॥

चन्द्रार्कानलकोटिकोटिसदृशा चन्द्रांशुबिम्बाधरी
चन्द्रार्काग्निसमानकुण्डलधरी चन्द्रार्कवर्णेश्वरी ।
मालापुस्तकपाशसाङ्कुशधरी काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी ॥ ९ ॥

क्षत्रत्राणकरी महाऽभयकरी माता कृपासागरी
साक्षान्मोक्षकरी सदा शिवकरी विश्वेश्वरी श्रीधरी ।
दक्षाक्रन्दकरी निरामयकरी काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी ॥ १० ॥

अन्नपूर्णे सदापूर्णे शङ्करप्राणवल्लभे ।
ज्ञानवैराग्यसिद्ध्यर्थं भिक्षां देहि च पार्वति ॥ ११ ॥

माता च पार्वती देवी पिता देवो महेश्वरः ।
बान्धवाः शिवभक्ताश्च स्वदेशो भुवनत्रयम् ॥ १२ ॥

॥ इति श्री अन्नपूर्णा स्तोत्रम संपूर्णम् ॥

Annapurna Ashtakam

Goddess Annapoorneshwari

Nityanandakari Varabhayakari Saundaryaratnakari
Nirdhutakhilaghorapavanakari Pratyaxamaheshvari
Praleyachalavanshapavanakari Kashipuradhishvari
Bhiksham Dehi Kripavalambanakari Matanapurneshvari ॥ 1 ॥

Nanaratnavichitrabhushanakari Hemambaradambari
Muktaharavilambamana Vilasath Vaxojakumbhantari
Kashmiragaruvasita Ruchikarii Kashipuradhishvari
Bhiksham Dehi Kripavalambanakari Matanapurneshvari ॥ 2 ॥

Yoganandakari Ripukshayakari Dharmarthanishthakari
Chandrarkanalabhasamanalahari Trailokyaraksakari
Sarvaishvaryasamastavajnchitakari Kashipuradhishvari
Bhiksham Dehi Kripavalambanakari Matanapurneshvari ॥ 3 ॥

Kailasachalakandaralayakari Gauri Uma Shankari
Kaumari Nigamarthagocharakari Onkarabijaksari
Moksadvarakapatapatanakari Kashipuradhishvari
Bhiksham Dehi Kripavalambanakari Matanapurneshvari ॥ 4 ॥

Drishyadrishya Vibhutivahanakari Brahmandabhandodari
Lilanatakasutrabhedanakari Vigyanadipankuri
Shrivishveshamanah Prasadanakari Kashipuradhishvari
Bhiksham Dehi Kripavalambanakari Matanapurneshvari ॥ 5 ॥

Urvi Sarvajaneshvari Bhagavati Matanapurneshvari
Veninilasamanakuntaladhari Nityanadaneshvari
Sarvanandakari Sadashubhakari Kashipuradhishvari
Bhiksham Dehi Kripavalambanakari Matanapurneshvari ॥ 6 ॥

Adikshantasamastavarnanakari Shambhostribhavakari
Kashmira Trijaleshvari Trilahari Nityankura Sharvari
Kamakanxakari Janodayakari Kashipuradhishvari
Bhiksham Dehi Kripavalambanakari Matanapurneshvari ॥ 7 ॥

Devi Sarvavicitraratnaracita Daksayani Sundari
Vame Svadupayodhara Priyakari Saubhagya Mahesvari
Bhaktabhistakari Sadasubhakari Kasipuradhisvari
Bhiksam Dehi Krpavalambanakari Matanapurneshvari ॥ 8 ॥

Candrarkanalakotikotisadrsa Candramsubimbadhari
Candrarkagnisamanakundaladhari Candrarkavarnesvari
Malapustakapasasankusadhari Kasipuradhisvari
Bhiksam Dehi Krpavalambanakari Matanapurneshvari ॥ 9 ॥

Ksatratranakari Maha’bhayakari Mata Kṛpasagari
Saksanmoksakari Sada Sivakari Visvesvari Sridhari
Daksakrandakari Niramayakari Kasipuradhisvari
Bhiksam Dehi Krpavalambanakari Matanapurneshvari ॥ 10 ॥

Anapurne Sadapurne Shankarapranavallabhe
Gyanavairagyasiddhyartham Bhiksham Dehi Cha Parvati ॥ 11 ॥

Mata Cha Parvati Devi Pita Devo Maheshvarah
Bandhavah Shivabhaktashcha Svadesho Bhuvanatrayamh ॥ 12 ॥

॥ Ithi Sri Annapurna Stotram Sampoornam ॥

Credit the Video: Rajalakshmee Sanjay – Topic YouTube Channel

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