Arak Ka Phool Kis Bhagwan Ko Chadhaya Jata Hai | अर्क का फूल किस भगवान को चढ़ाया जाता हैं: दोस्तों नमस्कार, आज हम आपको इस लेख के जरिए अर्क का फूल किस भगवान को चढ़ाया जाता हैं के बारे में बात करेंगे। आक, मदार एवं अर्क एक ही पौधे के अलग अलग नाम हैं। जिसका वानस्पतिक नाम ‘Calotropis Gigantea’ हैं।
Arak Ka Phool Kis Bhagwan Ko Chadhaya Jata Hai
अर्क का फूल किस भगवान को चढ़ाया जाता हैं
ये एक प्रकार के औषधीय और समृद्धि प्रदान करने वाला, ईश्वर को प्रसन्न रखने वाला एक सर्व गुण युक्त चमत्कारी पौधा हैं। इसे अकौआ के नाम से भी जानते हैं। इसका वृक्ष 5 से 7 फ़ीट ऊँचा होता हैं और इनके पत्तियां मोटे बरगद के पत्तियों के समान होते हैं। आक के फल आम के आकार में होते है परंतु इसके अंदर रुई के समान पदार्थ पाये जाते हैं जिसका कोई उपयोग नहीं हैं। आक का पौधा या पुष्प में जितना औषधीय गुण पाया जाता हैं उससे कही ज्यादा इसमें विषैले गुण पाए जाते हैं। ज्यादा मात्रा में इसका सेवन कर लेने से ग्रसित व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती हैं।
इस पौधे को उपविष की संज्ञा दी गयी हैं। परंतु आयुर्वेद चिकित्सक सही मात्रा में आक के पुष्प और पौधे का इस्तेमाल कर जटिल से जटिल रोग से छुटकारा दिला सकते हैं। इस आक के तने से उजला दूध के समान द्रव्य निकलता हैं जो आंखों को अंधा भी कर सकता हैं। कहने का तात्पर्य यह हैं कि आक या अर्क का फूल जितना आवश्यक हैं उतना खतरनाक भी हैं। जादू टोना और तांत्रिक क्रिया विधि में भी आक के फूल का उपयोग किया जाता हैं।
कहाँ कहाँ पाये जाते हैं आक के पौधा
भारत के सभी उच्च भूमियों पर या वैसे स्थानों पर जो शुष्क और रेतीली हो वहाँ इनकी उत्पत्ति हो जाती हैं। भारत के पड़ोसी देशों में भी आक के पौधे की उपस्थिति देखी जा सकती हैं। गर्मी के मौसम में आक का पौधा अपनी पूर्ण आकार को प्राप्त कर लेता हैं। परंतु बारिश के मौसम के दौरान अपनी क्षमता को धीरे धीरे खोने लगता हैं और अंततः सुख जाता हैं।
आक के पौधे का प्रकार
अर्क या आक के पौधे की तीन उप जातीया भी पाई जाती हैं। पहली जाती में श्वेत रंग का फूल होते हैं। जबकि दूसरी जाति में इसके फूल हल्की पीली परंतु श्वेत होते हैं। जिसे मंदार कहा जाता हैं। जिसमे विषैले दूध की मात्रा अधिक होती हैं। जबकि आक के तीसरी जाति के पौधे में केवल एक तना होता हैं, जिस पर चार पत्ते होते हैं जिसे राजार्क कहते हैं। और इनके फूल चांदी के समान उजले होते हैं परंतु वर्तमान में ये आक के दुर्लभ जाति हैं। भारत में इसकी पहली और दूसरी जातियॉ पाई जाती हैं।
आक के पुष्प या पौधे का वास्तु दोष के महत्व
जिस प्रकार से आक विषैले पौधे के श्रेणी में आता हैं उसी प्रकार से इसके वास्तु दोष से संबंधित अपने मायने हैं। जिस भी घर में आक का पौधा मौजूद हो तो उस घर के सदस्यों के ऊपर नकारात्मक ऊर्जा अपना प्रभाव दर्ज नही कर सकती। जिस घर में अशांति, नकारात्मक ऊर्जा, छोटी छोटी लड़ाई झगड़े, होते रहते हैं उनको आक के पौधे को मुख्य द्वार पर लगाना चाहिए। आक का पौधा शनि के साढ़ेसाती को कम करने का काम करता हैं। जिस घर में आक का पौधा होता हैं वहाँ लक्ष्मी जी का वास होने लगता हैं। अगर किसी व्यक्ति को बुरी नजर की समस्या बार बार होती रहती हैं तो वो आक के पौधे की जड़ को ताबीज में बांध कर गले मे धारण कर समस्या से निजात पा सकता हैं।
आक के पुष्प या पौधे का औषधीय महत्व
विषैला पौधा होने के साथ साथ आक का पौधा औषधीय गुणों से युक्त हैं। आक के पौधे का जड़, तना, फूल सभी औषधि के रूप में प्रयोग किये जाते हैं। नाखूना रोग, शीत ज्वर, गठिया रोग के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता हैं। खांसी, खतरनाक रोग हैजा, खाज खुजली इत्यादि में भी आक के पौधे का प्रयोग किया जाता हैं। अर्क से दातुन करने से दांतों के समस्त रोगों से मुक्ति पाया जा सकता हैं। किडनी रोग में भी आक का पौधे से जरूरी औषधि बनाया जाता हैं। लेकिन ध्यान रहे बिना आयुर्वेद चिकित्सक के सलाह के आक के पौधे से चिकित्सा नहीं करनी चाहिए ।
अर्क का फूल किस भगवान को चढ़ाना चाहिए
वैसे तो आक का फूल लगभग सभी देवी देवताओं को चढ़ाया जा सकता हैं। अगर आप आक के पुष्प को श्रद्धापूर्वक भगवान शिव के चरणों मे अर्पित करते हैं तो भगवान भोले जल्द ही प्रसन्न होकर आपकी मनोकामना को पूर्ण कर देंगे। माना जाता है कि अर्क के पौधे में भगवान श्री गणेश जी का वास होता हैं। इसीलिये गणेश भगवान के पूजन में आक का पुष्प चढ़ाने से भगवान गणेश जी हर इच्छा की पूर्ति करते हैं।
आक के पौधे से संबंधित सावधानियां
जिस प्रकार से आक के पौधे और उसके पुष्प में औषधीय और ईश्वर को प्रसन्न करने के गुण पाये जाते हैं उससे भी खतरनाक इनमें मनुष्य को मारने की गुण भी मौजूद होते हैं। इसीलिए आक के पौधे से कोई भी चिकित्सकीय उपचार बिना किसी आचार्य के सलाह पर नहीं करना चाहिए। बच्चों को आक के पौधे से दूर रखना चाहिए क्योंकि इससे निकलने वाले सफेद दूध जैसे निकलने वाले द्रव्य आंखों को अंधे कर सकते हैं।
नोट: अर्क का पौधा या पुष्प में जितना औषधीय गुण पाया जाता हैं, उससे कही ज्यादा इसमें विषैले गुण पाए जाते हैं। ज्यादा मात्रा में इसका सेवन कर लेने से ग्रसित व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती हैं। किसी भी बीमारी का पूर्ण उपचार के लिए अर्क का फूल के प्रयोग से पहले डॉक्टरी सलाह जरूर लें। डॉक्टरी परामर्श पर ही अर्क का फूल का इस्तेमाल किया जाता है।
Disclaimer: Bhakti Bharat Ki / भक्ति भारत की (https://bhaktibharatki.com) वेबसाइट का उद्देश्य किसी की आस्था या भावनाओं को ठेस पहुंचना नहीं है। इस वेबसाइट पर प्रकाशित उपाय, रचना और जानकारी को भिन्न – भिन्न लोगों की मान्यता, जानकारियों के अनुसार और इंटरनेट पर मौजूदा जानकारियों को ध्यान पूर्वक पढ़कर, और शोधन कर लिखा गया है। इस पोस्ट पर दिए गए जानकारी केवल सामान्य ज्ञान और शैक्षिक उद्देश्य के लिए बनाया गया है। यहां यह बताना जरूरी है कि Bhakti Bharat Ki / भक्ति भारत की (https://bhaktibharatki.com) इसमें चर्चा की गई किसी भी तरह जानकारी, मान्यता, सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता की पूर्ण रूप से गारंटी नहीं देते। अर्क का फूल किस भगवान को चढ़ाया जाता हैं का अर्थ और महत्व को अमल में लाने से पहले कृपया संबंधित योग्य विशेषज्ञ अथवा पंड़ित की सलाह अवश्य लें। अर्क का फूल किस भगवान को चढ़ाया जाता हैं का उच्चारण करना या ना करना आपके विवेक पर निर्भर करता है। इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी का उपयोग पूरी तरह से उपयोगकर्ता की अपनी ज़िम्मेदारी पर है। किसी भी प्रकार की हानि, नुकसान, या परिणाम के लिए हम प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार नहीं होंगे।
