June 26, 2026
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Ganesh Dwadash Naam | भगवान गणेश जी के द्वादश नाम, द्वादश नामों का मंत्र, द्वादश नाम स्तोत्रम

Ganesh Dwadash Naam

Ganesh Dwadash Naam | भगवान गणेश जी के द्वादश नाम, द्वादश नामों का मंत्र, द्वादश नाम स्तोत्रम: दोस्तों नमस्कार, आज हम आपको इस लेख के जरिए भगवान गणेश जी के द्वादश नाम, द्वादश नामों का मंत्र, द्वादश नाम स्तोत्रम के बारे में बात करेंगे। गणपति जी के द्वादश नाम एक दिव्य पासवर्ड है, अगर आप अपनी ज़िंदगी में वो पासवर्ड लगा दिया, आपका जीवन साधारण से असाधारण बनने की दिशा में आगे बढ़ सकता है। कहते हैं कि किसी भी पूजा, शुभ कार्य या नए कार्य की शुरुआत से पहले सबसे पहले भगवान गणपति का नाम लिया जाता है।

कहते हैं, भगवान गणपति जीवन का वह दिव्य पासवर्ड हैं। जैसे सही पासवर्ड के बिना ताला नहीं खुलता, यदि किसी भी शुभ कार्य से पहले उनका स्मरण नहीं करेंगे, तो सफलता और शुभता के द्वार नहीं खुलेंगे। इसलिए हर शुभ कार्य से पहले गणपति जी का स्मरण करना मंगल का प्रतीक माना जाता है। ऋषि-मुनियों ने भगवान गणपति के इन 12 नामों को बहुत सोच-समझकर एक विशेष क्रम में रखा है। प्रत्येक नाम भगवान गणेश के एक विशेष गुण और स्वरूप का स्मरण कराता है। जब आप अपने मुख से भगवान गणपति के इन 12 पवित्र नामों का उच्चारण करते हैं, तो आपकी वाक्-शक्ति से, आपके मन में भगवान गणपति का दिव्य स्वरूप बना देते हैं।

सुमुख, एकदन्त, कपिल, गजकर्ण, लम्बोदर, विकट, विघ्ननाशक, विनायक, धूम्रकेतु, गणाध्यक्ष, भालचन्द्र और गजानन, ये सभी गणेश जी के बारह नाम है। जिनके सुन्दर मुख है, एक दन्त है, जो गौर वर्ण के है, जो धूम्रकेतु हैं, गणों के अध्यक्ष है, जिनके सिर पर चन्द्रमा विराजमान हैं, जो हाथी के कान वाले हैं, जो विघ्न का विनाश करने वाले विनायक गणेश हैं। ऐसे भगवान गणेश के इन बारह नामों को जो स्मरण करता है, उसके सारे संकट कट जाते हैं। जो मनुष्य विद्यारंभ के समय, विवाह में, गृह प्रवेश में, यात्रा में, युद्ध में या किसी संकट के समय में, इन बारह नमो का स्मरण करता है, उसके सारे विघ्नों का नास हो जाता है।

Ganesh Dwadash Naam

भगवान गणेश जी के द्वादश नाम

श्री गणेशाय नमः

सुमुखश्चैकदन्तश्च कपिलो गजकर्णकः।
लम्बोदरश्च विकटो विघ्न नाशो विनायकः॥
धूम्रकेतुर्गणाध्यक्षो भालचन्द्रो गजाननः।
द्वादशैतानि नामानि यः पठेच्छृणुयादपि॥

विद्यारम्भे विवाहे च प्रवेशे निर्गमे तथा।
संग्राम संकटे चैव विघ्नस्तश्य न जायते॥

॥इति श्रीगणेशद्वादशनामस्तोत्रं सम्पूर्णम॥

भगवान गणेश जी के 12 नाम:

  • सुमुख (Sumukha), एकदन्त (Ekadanta), कपिल (Kapila), गजकर्णक (Gajakarnaka), लम्बोदर (Lambodara),  विकट (Vikata), विघ्नराज (Vighnaraja), विनायक (Vinayaka), धूम्रकेतु (Dhumraketu), गणाध्यक्ष (Ganadhyaksha), भालचन्द्र (Bhalachandra), गजानन (Gajanana)

Credit the Video : SacredVerses & DivineEchoes YouTube Channel

गणेश जी के 12 नामों का मंत्र

  • ॐ सुमुखाय नमः, ॐ एकदन्ताय नमः, ॐ कपिलाय नमः, ॐ गजकर्णाय नमः, ॐ लंबोदराय नमः, ॐ विकटाय नमः,               ॐ विघ्ननाशाय नमः, ॐ विनायकाय नमः, ॐ धूम्रकेतवे नमः, ॐ गणाध्यक्षाय नमः, ॐ भालचंद्राय नमः, ॐ गजाननाय नमः

Credit the Video : Veda Vidya YouTube Channel

श्री गणेश द्वादश नाम स्तोत्रम

शुक्लाम्बरधरं विश्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम् ।
प्रसन्नवदनं ध्यायेत्सर्वविघ्नोपशान्तयेः ॥ १॥

अभीप्सितार्थसिद्ध्यर्थं पूजितो यः सुरासुरैः ।
सर्वविघ्नहरस्तस्मै गणाधिपतये नमः ॥ २॥

गणानामधिपश्चण्डो गजवक्त्रस्त्रिलोचनः ।
प्रसन्नो भव मे नित्यं वरदातर्विनायक ॥ ३॥

सुमुखश्चैकदन्तश्च कपिलो गजकर्णकः ।
लम्बोदरश्च विकटो विघ्ननाशो विनायकः ॥ ४॥

धूम्रकेतुर्गणाध्यक्षो भालचन्द्रो गजाननः ।
द्वादशैतानि नामानि गणेशस्य तु यः पठेत् ॥ ५॥

विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थि विपुलं धनम् ।
इष्टकामं तु कामार्थी धर्मार्थी मोक्षमक्षयम् ॥ ६॥

विद्यारंभे विवाहे च प्रवेशे निर्गमे तथा ।
सङ्ग्रामे सङ्कटे चैव विघ्नस्तस्य न जायते ॥ ७॥

Credit the Video : Tips Bhakti Prem YouTube Channel

Ganesh Dwadash Naam Stotra

श्री गणेश द्वादश नाम स्तोत्रम

श्रीगणेशाय नमः । नारद उवाच ।

प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम् ।
भक्तावासं स्मरेन्नित्यम् आयुः कामार्थसिद्धये ॥ १॥

प्रथमं वक्रतुण्डं च एकदन्तं द्वितीयकम् ।
तृतीयं कृष्णपिङ्गाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम् ॥ २॥

लम्बोदरं पञ्चमं च षष्ठं विकटमेव च ।
सप्तमं विघ्नराजेन्द्रं धूम्रवर्णं तथाष्टमम् ॥ ३॥

नवमं भालचन्द्रं च दशमं तु विनायकम् ।
एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम् ॥ ४॥

द्वादशैतानि नामानि त्रिसन्ध्यं यः पठेन्नरः ।
न च विघ्नभयं तस्य सर्वसिद्धिकरं प्रभुः ॥ ५॥

विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम् ।
पुत्रार्थी लभते पुत्रान्मोक्षार्थी लभते गतिम् ॥ ६॥

जपेद्गणपतिस्तोत्रं षड्भिर्मासैः फलं लभेत् ।
संवत्सरेण सिद्धिं च लभते नात्र संशयः ॥ ७॥

अष्टभ्यो ब्राह्मणेभ्यश्च लिखित्वा यः समर्पयेत् ।
तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादतः ॥ ८॥

॥ इति श्रीनारदपुराणे संकटनाशनं गणेशस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

द्वादश नामों का अर्थ:

  • वक्रतुण्ड: टेढ़ी सूंड वाले। एकदन्त: एक दांत वाले। कृष्णपिङ्गाक्ष: गहरी पीली-काली आँखों वाले। गजवक्त्र: हाथी के मुख वाले। लम्बोदर: बड़े पेट वाले। विकट: विशाल या विपरीत परिस्थितियों में रक्षा करने वाले। विघ्नराज (विघ्ननाशक): बाधाओं को दूर करने वाले। धूम्रवर्ण: धुएँ के समान वर्ण वाले। भालचन्द्र: मस्तक पर चंद्रमा धारण करने वाले। विनायक: सबके विशेष नायक। गणपति: गणों के स्वामी। गजानन: हाथी के समान मुख वाले।

Credit the Video : Tips Bhakti Prem YouTube Channel

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