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June 15, 2026
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नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा, जानें रंग, पूजा विधि, मंत्र और स्तुति

Skandamata

नवरात्रि का पावन पर्व माँ दुर्गा के नौ दिव्य स्वरूपों को समर्पित होता है। नवरात्र के पांचवें दिन यानी पंचमी तिथि की अधिष्ठात्री देवी स्कन्द माता हैं। नवरात्र के पांचवें दिन मां दुर्गा के पंचम स्वरुप मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। यह कमल के आसन पर विराजमान हैं। इसलिए इन्हें पद्मासन देवी भी कहा जाता है। इनका वाहन भी सिंह है। आइए जानते हैं मां स्कंदमाता के बारे में, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, रंग और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी।

मां स्कंदमाता कौन हैं? पूजा का महत्व

मां पार्वती को मां स्कंदमाता तब कहा गया, जब वे भगवान स्कंद (कार्तिकेय या मुरुगन) की माता बनीं। मां स्कंदमाता की पूजा से भक्तों को विशेष आशीर्वाद मिलता है।

  • माना जाता है कि मां स्कंदमाता बुध ग्रह को नियंत्रित करती हैं। उनकी पूजा से भगवान कार्तिकेय की कृपा भी मिलती है।

  • मां स्कंदमाता सिंह पर सवार होती हैं, कमल पर विराजमान रहती हैं, और गोद में बाल मुरुगन को धारण करती हैं।

  • उनके चार हाथ हैं। ऊपरी दो हाथों में कमल, एक हाथ अभय मुद्रा में, और एक हाथ से वे बाल कार्तिकेय को थामती हैं।

  • मां ममता, देखभाल और मार्गदर्शन का प्रतीक हैं। उनकी पूजा से बुद्धि, स्पष्टता और कठिन परिस्थितियों में सही निर्णय लेने की शक्ति मिलती है।

नवरात्रि 2025, दिन 5: दिन का रंग

पांचवें दिन का रंग है हरा। यह रंग प्रकृति, नई शुरुआत, विकास, शांति और समृद्धि का प्रतीक है। हरे रंग के वस्त्र पहनकर आप जीवन में शांति और संतुलन को आकर्षित कर सकते हैं।

पूजा विधि, सामग्री और भोग

पांचवें दिन भक्तों को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर हरे रंग के नए कपड़े पहनने चाहिए। मां स्कंदमाता की पूजा के लिए निम्नलिखित विधि और सामग्री जरूरी हैं:

  • पूजा विधि: पूजा स्थल पर दीप जलाएं। मां को लाल फूलों की माला अर्पित करें। मंत्रों का जाप करें और भोग चढ़ाएं।

  • सामग्री: लाल फूल, अक्षत, बताशा, पान, सुपारी, लौंग, धूप, और केले।

  • भोग: मां को केला अर्पित करें। केले का हलवा या केले से बनी मिठाई भी चढ़ाई जा सकती है। इसके अलावा फल, मिठाई, मिश्री और खीर भी भोग में शामिल करें।

मां दुर्गा के पंचम स्वरुप मां स्कंदमाता के मंत्र और स्तुति

प्रार्थना मंत्र
सिंहासना गता नित्यं पद्माश्रित करद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥

स्तुति मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

ध्यान

वन्दे वांछित कामर्थेचन्द्रार्घकृतशेखराम्।
सिंहारूढाचतुर्भुजास्कन्धमातायशस्वनीम्
धवलवर्णाविशुद्ध चक्रस्थितांपंचम दुर्गा त्रिनेत्राम।
अभय पदमयुग्म करांदक्षिण उरूपुत्रधरामभजेम्
पटाम्बरपरिधानाकृदुहज्ञसयानानालंकारभूषिताम्।
मंजीर हार केयूर किंकिणिरत्नकुण्डलधारिणीम।।
प्रभुल्लवंदनापल्लवाधरांकांत कपोलांपीन पयोधराम्।
कमनीयांलावण्यांजारूत्रिवलींनितम्बनीम्घ् स्तोत्र
नमामि स्कन्धमातास्कन्धधारिणीम्।
समग्रतत्वसागर अपरमपार पारगहराम्
शिप्रभांसमुल्वलांस्फुरच्छशागशेखराम्।
ललाटरत्‍‌नभास्कराजगतप्रदीप्तभास्कराम्
महेन्द्रकश्यपाद्दचतांसनत्कुमारसंस्तुताम्।
सुरासेरेन्द्रवन्दितांयथार्थनिर्मलादभुताम्
मुमुक्षुभिद्दवचिन्तितांविशेषतत्वमूचिताम्।
नानालंकारभूषितांकृगेन्द्रवाहनाग्रताम्।।
सुशुद्धतत्वातोषणांत्रिवेदमारभषणाम्।
सुधाद्दमककौपकारिणीसुरेन्द्रवैरिघातिनीम्
शुभांपुष्पमालिनीसुवर्णकल्पशाखिनीम्।
तमोअन्कारयामिनीशिवस्वभावकामिनीम्
सहस्त्रसूर्यराजिकांधनच्जयोग्रकारिकाम्।
सुशुद्धकाल कन्दलांसुभृडकृन्दमच्जुलाम्
प्रजायिनीप्रजावती नमामिमातरंसतीम्।
स्वकर्मधारणेगतिंहरिप्रयच्छपार्वतीम्
इनन्तशक्तिकान्तिदांयशोथमुक्तिदाम्।
पुनरूपुनर्जगद्धितांनमाम्यहंसुराद्दचताम्
जयेश्वरित्रिलाचनेप्रसीददेवि पाहिमाम्

कवच

ऐं बीजालिंकादेवी पदयुग्मधरापरा।
हृदयंपातुसा देवी कातिकययुताघ्
श्रींहीं हुं ऐं देवी पूर्वस्यांपातुसर्वदा।
सर्वाग में सदा पातुस्कन्धमातापुत्रप्रदाघ्
वाणवाणामृतेहुं फट् बीज समन्विता।
उत्तरस्यातथाग्नेचवारूणेनेत्रतेअवतुघ्
इन्द्राणी भैरवी चौवासितांगीचसंहारिणी।
सर्वदापातुमां देवी चान्यान्यासुहि दिक्षवैघ्

नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा से जीवन में शांति, बुद्धि और समृद्धि प्राप्त करें।

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