April 3, 2026
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मैथिली ठाकुर: लोक संगीत की मिठास से विधानसभा की कुर्सी तक का सफर

दरभंगा: बिहार की धरती से निकली एक ऐसी आवाज़, जो मैथिली लोक गीतों की मिठास से लाखों दिलों को छू चुकी है। मैथिली ठाकुर, जिनकी उम्र महज़ 25 बरस है, आज न सिर्फ संगीत की दुनिया की चहेती हैं, बल्कि बिहार विधानसभा की सबसे युवा विधायक भी। हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनाव में अलिनगर सीट से बीजेपी की टिकट पर जीत हासिल करने वाली मैथिली का यह सफर किसी सपने से कम नहीं लगता। लेकिन इस सफलता के पीछे छिपी है एक मेहनती बेटी की कहानी, जो संगीत की धुन से राजनीति की धारा तक बह चली। आइए, उनकी संपत्ति, शो के दाम और जीत की इस मंजिल पर नज़र डालें।

मैथिली का जन्म 25 जुलाई 2000 को मधुबनी जिले के बेनीपट्टी में हुआ। उनके पिता रमेश ठाकुर दिल्ली में मैथिली संगीत के शिक्षक हैं, तो मां भारती ठाकुर ने घर में ही संगीत की बीज बोई। दादा पंडित बिहारीलाल ठाकुर की गोद में बैठकर मैथिली ने हारमोनियम, तबला और मैथिली लोक संगीत सीखा। बड़े भाई ऋषव तबला बजाते हैं, तो छोटे भाई आयाची भी संगीत में रंग भरते हैं। बचपन में घर की आर्थिक तंगी ने परिवार को दिल्ली के नजफगढ़ तक खींच लिया, लेकिन मैथिली ने हार नहीं मानी। पांचवीं कक्षा तक घर पर ही पढ़ाई की, फिर एमसीडी स्कूल में दाखिला लिया। बाद में बाल भवन इंटरनेशनल स्कूल से संगीत की स्कॉलरशिप मिली और आत्मा राम संनातन धर्म कॉलेज से ग्रेजुएशन पूरा किया।

संगीत की दुनिया में मैथिली का प्रवेश 2016 में ‘आई जीनियस यंग सिंगिंग स्टार’ जीतने के साथ हुआ। 2017 में ‘राइजिंग स्टार’ रियलिटी शो में फाइनलिस्ट बनकर रनर-अप रहीं, जहां ‘ओम नमः शिवाय’ पर उनका गायन आज भी लोगों के ज़ेहन में बसा है। यूट्यूब और फेसबुक पर उनके वीडियो वायरल हुए, तो राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रस्तुतियां शुरू हो गईं। मैथिली ने हिंदी, मराठी, भोजपुरी, अवधी, मगही जैसी कई भाषाओं में लोक गीत गाए। उन्हें ‘उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार’ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ‘कल्चरल एंबेसडर ऑफ द ईयर’ अवॉर्ड मिला। 2019 में चुनाव आयोग ने उन्हें मधुबनी के ब्रांड एंबेसडर बनाया। लेकिन उनकी कमाई का राज़ तो उनके लाइव शो में छिपा है। एक प्रदर्शन के लिए मैथिली 5 से 7 लाख रुपये चार्ज करती हैं। महीने में 10-12 शो कर लेती हैं, तो यूट्यूब, सोशल मीडिया और ब्रांड एंडोर्समेंट से सालाना आय 50 लाख से 90 लाख तक पहुँच जाती है। 2019-20 में 12.02 लाख की कमाई 2023-24 में बढ़कर 28.67 लाख हो गई।

अब बात उनकी संपत्ति की। चुनावी हलफनामे के मुताबिक, मैथिली के पास कुल 3.8 से 4 करोड़ रुपये की मूवेबल और इमूवेबल संपत्ति है। मूवेबल एसेट्स में 2.32 करोड़ का निवेश है – इसमें उनकी प्रोप्राइटरशिप फर्म ‘एम/एस मैथिली ठाकुर’ का बड़ा हिस्सा, 408 ग्राम सोने के गहने (मूल्य 52-53 लाख), बैंक डिपॉजिट और म्यूचुअल फंड जैसे बीओआई मिडकैप, एसबीआई मल्टी एसेट, एचडीएफसी फ्लेक्सी कैप, आईसीआईसीआई प्रू लार्ज कैप। नकदी में 1.80 लाख रुपये हैं। इमूवेबल संपत्ति में दिल्ली के द्वारका में रेसिडेंशियल फ्लैट का 50% शेयर (बाजार मूल्य 1.5 करोड़) और 2022 में 47 लाख में खरीदी ज़मीन (अब 1.5 करोड़ की) शामिल है। कोई लोन या आपराधिक केस नहीं – सब कुछ सेल्फ-अक्वायर्ड।

और फिर आया राजनीति का मोड़। अक्टूबर 2025 में मैथिली ने बीजेपी जॉइन की। पार्टी ने उन्हें दरभंगा जिले के अलिनगर विधानसभा क्षेत्र से टिकट दिया, जो आरजेडी का गढ़ माना जाता था। अलिनगर, जो दरभंगा लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है, में अलिनगर, तर्दीह, घनश्यामपुर ब्लॉक और मोतीपुर पंचायत आती है। जनवरी 2025 में नामांकन दाखिल किया, तो विपक्षी आरजेडी के बिनोद मिश्रा से सीधी टक्कर हुई। लेकिन मैथिली की सांस्कृतिक अपील ने कमाल कर दिया। 14 नवंबर को आए नतीजों में उन्होंने 84,915 वोट हासिल कर 11,730 वोटों से जीत दर्ज की। सबसे युवा विधायक बनकर उन्होंने बिहार विधानसभा में इतिहास रच दिया। जीत के बाद मैथिली ने कहा, “यह सपने जैसा है। लोग मुझसे बहुत उम्मीदें रखते हैं। मैं अपनी पहली टर्म में क्षेत्र के लिए बेटी की तरह सेवा करूँगी।”

मैथिली की जीत सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि बिहार की युवा ऊर्जा और सांस्कृतिक जड़ों का प्रतीक है। अलिनगर जैसे क्षेत्र में, जहाँ सड़कें, कनेक्टिविटी और विकास की प्यास है, वह नई हवा ला सकती हैं। संगीत से राजनीति तक का यह सफर बताता है कि जुनून और मेहनत से कोई मंज़िल दूर नहीं। अब सवाल यह है कि क्या मैथिली ठाकुर विधानसभा में भी उतनी ही मधुर धुन गाएँगी, जितनी स्टेज पर गाती रहीं? समय बताएगा, लेकिन उनकी शुरुआत तो ज़बरदस्त रही है।

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