Radha Ashtami Vrat Katha | राधा अष्टमी पूजा विधि, व्रत कथा और उपवास नियम: दोस्तों नमस्कार, आज हम आप लोगों को इस लेख के माध्यम से राधा अष्टमी पूजा विधि, व्रत कथा और उपवास नियम के बारे में बताने वाले हैं। जिस व्यक्ति ने जीवन में कभी भी कोई भी व्रत नहीं किया, ऐसा व्यक्ति यदि राधाष्टमी का व्रत करता है, तो भगवान उस व्यक्ति से प्रसन्न होते हैं। यदि कोई व्यक्ति 20 करोड़ एकादशी का व्रत करने पर जो फल मिलता है, वह केवल एक निर्जला एकादशी का व्रत करने से मिल जाता है। यदि कोई व्यक्ति 20 करोड़ निर्जला एकादशी का व्रत करने पर जो फल मिलता है, वो केवल एक जन्माष्टमी से मिल जाता है। यदि कोई व्यक्ति 20 करोड़ जन्माष्टमी के व्रत से जो फल मिलता है, वो केवल एक राधाष्टमी व्रत से प्राप्त हो जाता है। यदि आपके घर में लड्डू गोपाल है, राधा रानी का विग्रह नहीं है, तो यह व्रत आपको कैसे करना, किस प्रकार से अभिषेक करवाना है, किस विधि से पूजा करना, इस का संपूर्ण जानकारी बताएंगे।
Radha Ashtami Vrat Katha
राधा अष्टमी पूजा विधि, व्रत कथा और उपवास नियम
इस बार 19 सितंबर को यह व्रत किया जाएगा। आपको सवेरे जल्दी उठना है, और 11 बार ओम वृषभानुजाय विद्महे कृष्ण प्रियाय च धीमहि तन्नो श्री राधा प्रचोदयात इस दिव्य मंत्र का उच्चारण करना है। यह राधा रानी का गायत्री मंत्र है, इसका जाप राधा अष्टमी के व्रत में अवश्य करना चाहिए। राधा रानी के जन्म की कथा, व्रत की कथा, राधा अष्टमी के दिन अवश्य सुननी चाहिए।
यदि आप व्रत करने की सोच रहे हैं, तो सबसे पहले ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करके शुद्ध हो जाएँ। इसके बाद राधा रानी का विग्रह, लड्डू गोपाल जी का विग्रह अथवा राधा-कृष्ण की तस्वीर अपने पूजा स्थान पर स्थापित करें। फिर पंचामृत के माध्यम से उनका अभिषेक करें। सबसे पहले थाली में स्वस्तिक बनाना है। इसके बाद भगवान के चरणों में प्रेमपूर्वक लाल गुलाब के पुष्प अर्पित करें। फिर लड्डू गोपाल या राधा रानी को आपने विराजमान करना है। दूध, दही, घी, शक्कर और शहद इन पांच चीजों से आपने राधा रानी का या लड्डू गोपाल का दिव्य अभिषेक करना है। यह सवेरे ब्रह्म मुहूर्त में आपने करना है। उसके बाद में आपने लड्डू गोपाल या राधा रानी को सुंदर श्रृंगार करना है। नीले रंग की पोशाक राधा रानी को धारण करवानी है। उसके बाद राधा रानी की आरती करनी है। आरती करने के पश्चात आप हाथ में जल लीजिए। उसके बाद दक्षिणा जितना भी संभव हो, ₹11 या ₹51 उतना ले लीजिए।
हाथ में एक पुष्प रखिए और व्रत का संकल्प करिए। आपको व्रत का संकल्प में बोलना है, श्री विष्णु हूं। श्री विष्णु हूं। श्री विष्णु हूं। उसके बाद में आप अपने व्रत की मनोकामना बोलनी है, कि हे राधा रानी हम आपके लिए यह व्रत करने जा रहे हैं। हमारे ऊपर आप आशीर्वाद बनाकर रखना, ताकि इस व्रत को हम सधि पूर्वक पूरा करें। आप हमारे इस व्रत से प्रसन्न हो जाइए, हमारे ऊपर अपना प्रेम बना करके रखिए। हमारे जीवन में किसी भी प्रकार का संकट ना आए, अपनी कृपा आशीष बना कर रखना। आप हमारी सारी मनोकामना पूरी करना।
उसके बाद उस दक्षिणा को जो आपने जल इत्यादि हाथ में लिया हुआ है, धरती पर उसको छोड़ देना है। जो दक्षिणा है वो पंडित जी को दान कर देनी है। उसके बाद में आपने कृष्ण नाम या ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः इस मंत्र का जाप कर सकते हैं। या इस महामंत्र हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे, हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे 16 माला जाप करना, राधा रानी को बहुत प्रसन्नता होती है। उसके बाद में आपने दोपहर में 12:00 बजे दोबारा से राधा रानी का अभिषेक करना है। इसी विधि से आपने अभिषेक और श्रृंगार करना है। श्रृंगार करने के बाद आरती करनी है। आरती करने के बाद आपने राधा रानी को राधा रानी का सबसे प्रिय भोग कढ़ी चावल और अरबी की सब्जी का भोग लगाना है, यह राधा रानी को बहुत ज्यादा प्रसन्नता होती है।
याद रखिए व्रत हमेशा सूर्योदय से लेकर के सूर्योदय तक चलता है। अधिकांश लोग 12:00 बजे के बाद राधाष्टमी का व्रत खोल देते हैं। तो व्रत टूट जाता है, व्रत करने का कोई फल नहीं मिलता है। इसलिए आपको व्रत अगले दिन सूर्य उदय के बाद इस व्रत का पारण करना है। यदि आपके पास जगन्नाथ भगवान का महाप्रसाद है, तो ठाकुर जी और राधा रानी की सेवा, स्नान, आरती इत्यादि करके भोग लगा करके, एक दाना ग्रहण कर सकते हैं। आपके व्रत का पारण हो जाएगा। यदि आपके पास भगवान पर चढ़ा हुआ तुलसी दल है, तो वहां से एक थोड़ा सा ग्रहण करके व्रत का पारण आप कर सकते हैं।
यदि आपके पास सात प्रकार का अनाज है, तो ब्राह्मणों को दान करके, उसके बाद में बनाए गए भोजन से गौ माता को एक थाली निकाल करके, भोग इत्यादि लगा करके आप पारण कर सकते हैं। इस विधि से पारण करना चाहिए। इस व्रत में जितना हो सके कृष्ण नाम, राम नाम जाप करना है। इसी से हमारी किशोरी जी प्रसन्न होती हैं। हमारे शास्त्रों में लिखा हुआ है, श्री श्री राधा मतलब जो, अपने भक्तों के दुखों को सुनकर के एक पल में री जाए, वो हमारी राधा रानी, किशोरी जी हैं।
नोट: इतना कष्टदायक व्रत या निर्जल उपवास न करें कि आपका स्वास्थ्य बिगड़ जाए। व्रत सदैव अपनी शारीरिक सामर्थ्य और स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर करना चाहिए।
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