Shri Kashi Vishwanath Mangal Stotram | श्री काशी विश्वनाथ मंगल स्तोत्र: दोस्तों नमस्कार, आज हम आपको इस लेख के जरिए जगज्जालपालं चलत्कण्ठमालं के बारे में बात करेंगे। माना जाता है कि विवाह संबंधी किसी समस्या के लिए इस स्तोत्र का नियमित रूप से 57 दिनों तक जाप करने से परिस्थितियों में सुधार मिल सकता है।
Shri Kashi Vishwanath Mangal Stotram
श्री काशी विश्वनाथ मंगल स्तोत्र
॥ अथ श्री विश्वनाथमङ्गलस्तोत्रम् ॥
गङ्गाधरं शशिकिशोरधरं त्रिलोकी-
रक्षाधरं निटिलचन्द्रधरं त्रिधारम् ।
भस्मावधूलनधरं गिरिराजकन्या-
दिव्यावलोकनधरं वरदं प्रपद्ये ॥ १॥
काशीश्वरं सकलभक्तजनातिहारं
विश्वेश्वरं प्रणतपालनभव्यभारम् ।
रामेश्वरं विजयदानविधानधीरं
गौरीश्वरं वरदहस्तधरं नमामः ॥ २॥
गङ्घोत्तमाङ्ककलितं ललितं विशालं
तं मङ्गलं गरलनीलगलं ललामम् ।
श्रीमुण्डमाल्यवलयोज्ज्वलमञ्जुलीलं
लक्ष्मीशवरार्चितपदाम्बुजमाभजामः ॥ ३॥
दारिव्र्यदुःखदहनं कमनं सुराणां
दीनार्तिदावदहनं दमनं रिपूणाम् ।
दानं श्रियां प्रणमनं भुवनाधिपानां
मानं सतां वृषभवाहनमानमामः ॥ ४॥
श्रीकृष्णचन्द्रशरणं रमणं भवान्याः
शशवत्प्रपन्नभरणं धरणं धरायाः ।
संसारभारहरणं करुणं वरेण्यं
संतापतापकरणं करवै शरण्यम् ॥ ५॥
चण्डीपिचण्डिलवितुण्डधृताभिषेकं
श्रीकार्तिकेयकलनृत्यकलावलोकम् ।
नन्दीशवरास्यवरवाद्यमहोत्सवाढ्यं
सोल्लासहासगिरिजं गिरिशं तमीडे ॥ ६॥
श्रीमोहिनीनिविडरागभरोपगूढं
योगेश्वरेशवरहदम्बुजवासरासम् ।
सम्मोहनं गिरिसुताञ्चितचन्द्रचूडं
श्रीविश्वनाथमधिनाथमुपैमि नित्यम् ॥ ७॥
आपद् विनश्यति समृध्यति सर्वसम्पद्
विघ्नाः प्रयान्ति विलयं शुभमभ्युदेति ।
योग्याङ्गनाप्तिरतुलोत्तमपुत्रलाभो
विश्वेश्वरस्तवमिमं पठतो जनस्य ॥ ८॥
वन्दी विमुक्तिमधिगच्छति तूर्णमेति
स्वास्थ्यं रुजार्दित उपैति गृहं प्रवासी ।
विद्यायशोविजय इष्टसमस्तलाभः
सम्पद्यतेऽस्य पठनात् स्तवनस्य सर्वम् ॥ ९॥
कन्या वरं सुलभते पठनादमुष्य
स्तोत्रस्य धान्यधनवृद्धिसुखं समिच्छन् ।
किं च प्रसीदति विभुः परमो दयालुः
श्रीविश्वनाथ इह सम्भजतोऽस्य साम्बः ॥ १०॥
काशीपीठाधिनाथेन शङ्कराचार्यभिक्षुणा ।
महेश्वरेण ग्रथिता स्तोत्रमाला शिवारपिता ॥ ११॥
॥ इति काशीपीठाधीश्वरशङ्कराचार्यश्रीस्वामिमहेश्वरानन्दसरस्वतीविरचितं श्रीविश्वनाथमङ्गलस्तोत्रं सम्पूर्णम्॥
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