May 12, 2026
Bhajan

Vrindavan Ramya Sthana | वृंदावन रम्य स्थान दिव्य चिंतामणि धाम

Vrindavan Ramya Sthana

Vrindavan Ramya Sthana | वृंदावन रम्य स्थान दिव्य चिंतामणि धाम: दोस्तों नमस्कार, आज हम आपको इस लेख के जरिए वृंदावन रम्य स्थान दिव्य चिंतामणि धाम भजन के बारे में बात करेंगे। वृन्दावन एक दिव्य और अत्यंत सुंदर स्थान है। यह आध्यात्मिक आकाश है, जहाँ सब कुछ चिंतामणि से बना हुआ है, जो सभी इच्छाओं को पूर्ण करने वाला है। वहाँ के सभी मंदिर बहुमूल्य रत्नों से सुसज्जित हैं।

उस दूरस्थ दिव्य स्थान में यमुना नदी बहती है, जो कमल के फूलों से भरी हुई है। उन असंख्य कमलों के मध्य में एक स्वर्णिम नौका है, जो एक बड़े कमल के फूल के समान प्रतीत होती है। उस कमल के आठ पंखुड़ी हैं, जो वास्तव में आठ प्रमुख गोपियाँ हैं, जो सदा श्री राधा और श्री कृष्ण को चारों ओर से घेरे रहती हैं। उन पंखुड़ियों के बीच में एक स्वर्णिम सिंहासन है, जिस पर दो दिव्य प्रेमी श्री राधा और श्री कृष्ण विराजमान हैं। किन्तु उन सबमें अधिष्ठात्री देवी श्रीमती राधारानी ही हैं। राधारानी की सुंदरता और उनके दिव्य शरीर की आभा की कोई तुलना नहीं है। उनके सौंदर्य के सामने चंद्रमा की तथाकथित सुंदरता भी मानो धरती पर गिर गई हो। उस सभा में, जहाँ राधा-कृष्ण और उनके मुख्य सखा-सखियाँ उपस्थित हैं, हँसी-मज़ाक और आनंद की बाढ़ सी आई रहती है, जब वे एक-दूसरे से प्रेमपूर्वक वार्तालाप करते हैं।

नरोत्तम दास कहते हैं कि राधा-कृष्ण की नित्य लीलाएँ प्रतिदिन दिव्य आनंद से परिपूर्ण होती हैं। हमें समय-समय पर उन लीलाओं का स्मरण करना चाहिए, ताकि हम इस भौतिक संसार में रहते हुए भी सच्चे आनंद का अनुभव कर सकें।

Vrindavan Ramya Sthana

वृंदावन रम्य स्थान दिव्य चिंतामणि धाम

वृंदावन रम्य-स्थान,
दिव्य-चिन्तामणि-धाम,
रतन-मंदिर मनोहर

आवृत कालिंदी-नीरे,
राज-हंस केलि कोरॆ
ताहे शोभे कनक-कमल

तार मध्ये हेम-पीठ,
अष्ट-दले वेष्टित,
अष्ट-दले प्रधाना नायिका

तार मध्ये रत्नासने,
बोसि आछॆन् दुइ-जने,
श्याम-संगे सुंदरी राधिका

ओ रूप-लावण्य-राशि,
अमिया पोडिछे खसि,
हास्य-परिहास-संभाषणे

नरोत्तम-दास कोय्,
नित्य-लीला सुख-मोय्,
सदाइ स्फुरुक मोर मने

Credit the Video : Times Music Spiritual YouTube Channel

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