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March 9, 2026
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Yogena Chittasya Mantra | योगेन चित्तस्य

Yogena Chittasya Mantra | योगेन चित्तस्य: दोस्तों नमस्कार, आज हम आपको इस लेख के जरिए योगेन चित्तस्य मंत्र के बारे में बात करेंगे। यह मंत्र योगेन चित्तस्य (Yoga Sutras of Patanjali) से लिया गया है, जिससे आधुनिक योग अभ्यास की परंपरा विकसित हुई है। इस मंत्र का पाठ योग अभ्यास शुरू करने से पहले किया जाता है। यह मंत्र मन, शरीर और वाणी को शुद्ध करता है।
यह मंत्र Patanjali के प्रति प्रार्थना और उनकी शक्तियों का आह्वान माना जाता है। माना जाता है कि महर्षि पतंजलि हजार फनों वाले सर्प के अवतार थे।

योगेन चित्तस्य

योगेन चित्तस्य पदेन वाचां।
मलं शरीरस्य च वैद्यकेन॥
योऽपाकरोत्तं प्रवरं मुनीनां।
पतञ्जलिं प्राञ्जलिरानतोऽस्मि॥

आबहु पुरुषाकारं।
शङ्खचक्रासि धारिणं॥
सहस्र शीरसं श्वेतं।
प्रनमामि पतञ्जलिम्॥

॥ ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति: ॐ ॥

भावार्थ:
जो हमारे मन को शुद्ध करता है, शरीर को स्वस्थ बनाता है और वाणी को स्पष्ट तथा निर्बाध रूप से बोलने की शक्ति देता है, ऐसे महर्षि पतंजलि को हम प्रणाम करते हैं। इस मंत्र के नियमित जप से व्यक्ति की एकाग्रता बढ़ती है, मन शांत होता है और निर्णय लेने की क्षमता भी बेहतर हो जाती है।

Yogena Chittasya Mantra

Aum

Yogena Chittasya Padena Vacha
Malam Sharirasya Cha Vaidya Kena
Yopakarotham Pravaram Muninam
Patanjalim Pranjali Ranatosmi

Abahu Purusakaram
Sankha Cakrasi Dharinam
Sahasra Sirasam Svetam
Ranamami Patanjalim

॥ Aum Shanti Shanti Shanti Aum॥

Credit the Video : GEBY MANTRA SOUNDS YouTube Channel

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