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September 9, 2026
Stotram

Ganesha Stotram | गणेश स्तवन

Ganesha Stotram

Ganesha Stotram | गणेश स्तवन: दोस्तों नमस्कार, आज हम आपको इस लेख के जरिए गणेश स्तवन के बारे में बात करेंगे।

Ganesha Stotram

गणेश स्तवन

अजं निर्विकल्पं निराकारमेकं
निरानन्दमानन्दमद्वैतपूर्णम् ।
परं निर्गुणं निर्विशेषं निरीहं
परब्रह्मरूपं गणेशं भजेम ॥१॥

गुणातीतमानं चिदानन्दरूपं
चिदाभासकं सर्वगं ज्ञानगम्यम् ।
मुनिध्येयमाकाशरूपं परेशं
परब्रह्मरूपं गणेशं भजेम ॥२॥

जगत्कारणं कारणज्ञानरूपं
सुरादिं सुखादिं गुणेशं गणेशम् ।
जगद्वयापिनं विश्ववन्द्यं सुरेशं
परब्रह्मरूपं गणेशं भजेम ॥३॥

रजोयोगतो ब्रह्मरूपं श्रुतिज्ञं
सदाकार्यसक्तं हृदाऽचिंत्यरूपम् ।
जगत्कारणं सर्वविद्यानिधानं
परब्रह्मरूपं गणेशं भजेम ॥४॥

सदा सत्वयोगं मुदा क्रीडमानं
सुरारीन् हरन्तं जगत्पालयन्तम् ।
अनेकावतारं निजाज्ञानहारं
सदा विष्णुरूपं गणेशं नमामः ॥५॥

तपोयोगिनां रुद्ररूपं त्रिणेत्रं
जगद्धारकं तारकं ज्ञानहेतुम् ।
अनेकागमैः स्वं जनं बोधयन्तं
सदा शर्वरूपं गणेशं नमामः ॥६॥

तमस्तोमहारं जनाज्ञानहारं
त्रयीवेदसारं परब्रह्मपारम् ।
मुनिज्ञानकारं विदूरे विकारं
सदा ब्रह्मरूपं गणेशं नमामः ॥७॥

निजैरोषधीस्तर्पयन्तं करौघैः
सुरौघान् कलाभिः सुधास्राविणीभिः ।
दिनेशांशु संतापहारं द्विजेशं
शशांकस्वरूपं गणेशं नमामः ॥८॥

प्रकाशस्वरूपं नभोवायुरूपं
विकारादिहेतुं कलाकालभूतम् ।
अनेकक्रियानेकशक्तिस्वरूपं
सदा शक्तिरूपं गणेशं नमामः ॥९॥

प्रधानस्वरूपं महत्तत्वरूपं
धरावारिरूपं दिगीशादिरूपम् ।
असत्सत्स्वरूपं जगद्धेतुभूतं
सदा विश्वरूपं गणेशं नमामः ॥१०॥

त्वदीये मनः स्थापयेदंघ्रिपद्मे
जनो विघ्नसंघान्न पीडां लभेत ।
लसत्सूर्यबिंबे विशाले स्थितोऽयं
जनो ध्वांतबाधां कथं वा लभेत ॥११॥

वयं भ्रामिताः सर्वथा ज्ञानयोगात्
अलब्ध्वा तवाङ्घ्रिं बहून् वर्षपूगान् ।
इदानीमवाप्तं तवैव प्रसादात्
प्रपन्नानिमान् पाहि विश्वंभराद्य ॥१२॥

इदं यः पठेत् प्रातरुत्थाय
धीमान् त्रिसंध्यं सदा भक्तियुक्तो विशुद्धः ।
स पुत्रान् श्रियं सर्वकामान् लभेत
परब्रह्मरूपो भवेदन्तकाले ॥१३॥

इति गणेशपुराणे उपासनाखंडे त्रयोदशोऽध्याये श्रीगणपतिस्तवः ।

Credit the Video : Lata Creation YouTube Channel

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