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February 22, 2026
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बदलाव की पुकार: कैसे एक गाँव ने भ्रष्टाचार और अन्याय को हराया

पाञ्चजन्यं हृषीकेशो देवदत्तं धनञ्जय: | पौण्ड्रं दध्मौ महाशङ्खं भीमकर्मा वृकोदर: || 15||

यह श्लोक भगवद गीता के 1.15 श्लोक से लिया गया है। इसमें भगवान श्री कृष्ण अपने कर्णधार पाञ्चजन्य शंख की ध्वनि करते हैं। इसके बाद अर्जुन देवदत्त शंख को बजाते हैं। भीम, जो महाशक्ति के प्रतीक हैं, पौण्ड्र नामक शंख को बजाते हैं। यह शंख युद्ध के आरंभ का संकेत है, जिसका उद्देश्य समाज में अच्छाई की स्थापना और बुराई का नाश करना है।

आज से कुछ साल पहले, एक छोटे से गाँव में एक लड़का था, जिसका नाम अर्जुन था। वह बड़ा ही साधारण था, लेकिन उसमें एक खास बात थी – वह किसी भी हाल में दूसरों की मदद करता था। गाँव में हर कोई जानता था कि अगर कोई मुसीबत में हो, तो अर्जुन जरूर मदद करेगा।

लेकिन एक दिन गाँव में कुछ ऐसी घटनाएँ घटने लगीं, जो अर्जुन के दिल को छूने लगीं। कुछ लोग अपनी स्वार्थी इच्छाओं के चलते दूसरों को नुकसान पहुँचाने लगे थे। सच्चाई और ईमानदारी को लोग तुच्छ समझने लगे थे।

अर्जुन ने सोचा, “क्या यह सही है? क्या मुझे खड़ा नहीं होना चाहिए?” एक दिन उसने दिल में फैसला किया कि वह अब चुप नहीं रहेगा। जैसे भगवान श्री कृष्ण ने गीता में अर्जुन को युद्ध करने के लिए कहा था, वैसे ही उसने भी अपना शंख बजाने का निर्णय लिया।

वह अपने गाँव में सबसे पहले एक बैठक बुला कर सबको अपनी आवाज़ सुनाने गया। उसने कहा, “हम सब को मिलकर सच्चाई का साथ देना होगा। हम सब अगर चुप रहते हैं तो बुराई का फैलाव होगा। यह समय है शंख बजाने का।”

इस शंख की ध्वनि ने गाँव के हर व्यक्ति के दिल को जागरूक किया। अर्जुन की आवाज़ ने सभी को एकजुट किया, और सब मिलकर गाँव में फैली बुराई को खत्म करने लगे।

धीरे-धीरे गाँव में परिवर्तन आया। लोग अपने स्वार्थ को छोड़कर एक-दूसरे के लिए काम करने लगे। अर्जुन के शंख की ध्वनि ने एक नई उम्मीद और परिवर्तन का संकेत दिया था।

आज जब भी हम अर्जुन की तरह समाज में बदलाव की बात करते हैं, तो हमें यह याद रखना चाहिए कि हमें शंख बजाना होगा – हम सब मिलकर, न डरते हुए, न थकते हुए।

संदेश:
जैसे अर्जुन ने भगवान श्री कृष्ण के आदेश पर युद्ध के लिए शंख बजाया था, वैसे ही हमें आज की दुनिया में सच्चाई, अच्छाई और नैतिकता के लिए अपनी आवाज़ बुलंद करनी चाहिए। अगर हम चुप रहते हैं तो बुराई फैलती जाएगी, लेकिन अगर हम एकजुट होकर खड़े हो जाएं, तो हम समाज में बदलाव ला सकते हैं।

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