Ganga Ke Kinare Baith Ke | चाँद को निहारूं शिव को पुकारूं गंगा के किनारे बैठ के: दोस्तों नमस्कार, आज हम आपको इस लेख के जरिए गंगा के किनारे भजन के बारे में बात करेंगे।
Chaand Ko Niharu Shiv Ko Pukaru
Ganga Ke Kinare Baith Ke
गंगा के किनारे बैठ के
चांद को निहारूं, शिव को पुकारूं,
चांद को निहारूं, शिव को पुकारूं ॥
गंगा के किनारे बैठ के, बैठ के,
गंगा के किनारे बैठ के, बैठ के,
गंगा के किनारे बैठ के ॥
रूह को सवारूं, आरती उतारूं,
गंगा के किनारे बैठ के, बैठ के,
गंगा के किनारे बैठ के॥
हम तु हमारे ही जीवन से है इतने सताय हुए,
तूटे हैं बिखरे हैं हम तो सबके भुलाए हुए,
कहते हैं आए जो गंगा नहाए,
हर जाते हैं सब रोग ॥
अब हमने समझा है, अब हमने जाना,
क्यों गंगा आते हैं लोग ॥
थक गए थे हम दुखों को उठा के,
अब चैन आया, आई अब सांसें,
गंगा के किनारे बैठ के, बैठ के,
गंगा के किनारे बैठ के, बैठ के,
गंगा के किनारे बैठ के ॥
क्यों रोएं हर बात में बंदेआ,
क्या लाया था साथ में बंदेआ,
जाने दे जो चला गया है,
कुछ भी नहीं तेरे हाथ में बंदेआ ॥
क्यों रोएं हर बात में बंदेआ,
क्या लाया था साथ में बंदेआ,
जाने दे जो चला गया है,
कुछ भी नहीं तेरे हाथ में बंदेआ ॥
मन नहीं भरता जितना भी ताकें,
इतना सुकून है भर गई आँखें,
गंगा के किनारे बैठ के ॥
गंगा धाराय शिव गंगा धाराय,
हर हर भोले नमः शिवाय ॥
गंगा धाराय शिव गंगा धाराय,
हर हर भोले नमः शिवाय ॥
गंगा धाराय शिव गंगा धाराय,
हर हर भोले नमः शिवाय ॥
गंगा धाराय शिव गंगा धाराय,
हर हर भोले नमः शिवाय ॥
Credit the Video : Kripa Record YouTube Channel
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