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June 16, 2026
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भीष्म और अन्य योद्धा – एक कहानी

भवान्भीष्मश्च कर्णश्च कृपश्च समितिञ्जय: | अश्वत्थामा विकर्णश्च सौमदत्तिस्तथैव च || 8||

कुरुक्षेत्र युद्ध

कुरुक्षेत्र का मैदान धूल से अटा पड़ा था। युद्ध की गूँज हवाओं में थी। भीष्म खड़े थे, तलवार चमक रही थी। उनके साथ कर्ण, कृपाचार्य, अश्वत्थामा, विकर्ण तथा सोमदत्त का पुत्र भूरिश्रवा आदि महा पराक्रमी योद्धा हैं जो युद्ध में सदा विजेता रहे हैं। सभी शक्तिशाली। पर उनके मन में एक ही प्रश्न था। क्या यह युद्ध सही है? क्या यह धर्म है?

आज का समाज भी ऐसा ही मैदान है। हर ओर संघर्ष। लोग अपनी मान्यताओं के लिए लड़ते हैं। पर क्या हम सही लड़ाई चुन रहे हैं? कुरुक्षेत्र में भीष्म जानते थे। उनका कर्तव्य था, पर मन में संदेह था। कार्ण का गुस्सा, अश्वत्थामा की महत्वाकांक्षा, सभी के अपने कारण थे। फिर भी, वे एक साथ खड़े थे।

कल्पना करो, एक छोटा सा गाँव। नाम है सूरजपुर। यहाँ राहुल नाम का एक नौजवान रहता था। वह मेहनती था। पर गाँव में झगड़े बढ़ रहे थे। पानी की कमी थी। लोग बँट गए थे। एक समूह नदी का पानी चाहता था। दूसरा कुएँ का। राहुल दोनों पक्षों को जानता था। दोनों में अच्छे लोग थे। फिर भी, वे लड़ रहे थे।

राहुल ने सोचा, “यह युद्ध क्यों?” उसने गाँव वालों को बुलाया। एक पेड़ के नीचे सब बैठे। उसने कहा, “हम सब सूरजपुर के हैं। पानी हमारा है। इसे बाँट क्यों रहे हैं?” कुछ लोग चुप रहे। कुछ ने विरोध किया। पर राहुल ने हार नहीं मानी। उसने एक योजना बनाई। नदी और कुएँ का पानी मिलाकर बाँटा जाए। सबको हिस्सा मिले।

शुरू में लोग हँसे। “यह असंभव है,” उन्होंने कहा। पर राहुल ने कोशिश की। उसने दोनों पक्षों के बड़े-बूढ़ों को मनाया। एक नया तालाब बनाया गया। नदी और कुएँ का पानी उसमें आया। गाँव फिर हरा-भरा हुआ। लोग एक हुए।

भीष्म और उनके साथी योद्धाओं की तरह, राहुल भी एक युद्ध में था। पर उसने हथियार नहीं उठाया। उसने बातचीत चुनी। उसने समझदारी दिखाई। आज का समाज भी ऐसा ही है। हमारी लड़ाइयाँ अलग हैं। कभी जाति, कभी धर्म, कभी पैसा। पर क्या हम राहुल की तरह एक हो सकते हैं?

कुरुक्षेत्र में योद्धा अपने कर्तव्य के लिए लड़े। पर आज हमें अपने कर्तव्य को समझना होगा। लड़ना नहीं, जोड़ना होगा। पानी की तरह, जो बाँटने से बढ़ता है। समाज को एक करने की शक्ति हम में है। बस, एक कदम उठाना है।

राहुल की कहानी सिखाती है। भीष्म, कार्ण, और अन्य योद्धाओं की तरह, हमें अपने मन के संदेह को सुनना होगा। सही रास्ता चुनना होगा। क्योंकि युद्ध मैदान में नहीं, मन में जीता जाता है।

N.B

Bhishma: The respected elder, known for his honor and wisdom.

Karna: A skilled fighter whose choices were often affected by his loyalty.

Kripacharya: A wise and respected teacher who still took part in the war.

Ashwatthama: Drona’s son, a powerful warrior driven by revenge.

Vikarna: A lesser-known Kaurava who stayed true to his beliefs, even when they went against his family.

Somadatta: A courageous warrior who remained loyal to the Kauravas.

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