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September 25, 2026
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Om Namah Shivaya | जानें भगवान शिव के इस चमत्कारी मंत्र का प्रभाव

Om Namah Shivay

Om Namah Shivaya | जानें भगवान शिव के इस चमत्कारी मंत्र का प्रभाव: ॐ नमः शिवाय मंत्र भगवान शिव को समर्पित है, इस मंत्र की महत्ता शिव महापुराण में वर्णन है। ॐ नम: शिवाय जो हमारे शरीर का शुद्धीकरण करता है। इन्हें पंचाक्षर कहा गया है, जो पंचाक्षर प्रकृति में मौजूद पांच तत्वों के प्रतीक हैं। जेसे सृष्टि के निर्माण पांच तत्व में हैं उसी तारा मानव शरीर पांच तत्व के निर्माण खंड हैं, और भगवान शिव इन पांच तत्वों के स्वामी हैं।

ॐ नमः शिवाय

ओम नमः शिवाय

ओम नमः शिवाय

Om Namah Shivaya

Om Namah Shivaya

ॐ (ओम-Om) अर्थ – पृथ्वी मंडल, ग्रह मंडल, अंतरिक्ष मंडल तथा सभी आकाश गंगाओं की गतिशीलता से उत्पन्न महान शोर ही ईश्वर की प्रथम पहचान प्रणव अक्षर ॐ है।

अ + उ + म = ऊॅं
“अ” मतलब “वह”
“उ” मतलब “है”
“म” मतलब “मैं”

मैं कौन हूं? मैं ये हाड़ मांस का पुतला नहीं हूं। मैं ही वह ऊर्जा हूं, मैं आत्मा हूं, मैं शाश्वत हूं जो अमर है, अविनाशी है। एक दिन यह शरीर मरने वाला है लेकिन मैं हमेशा के लिए जीने वाला हूं।

नमः शिवाय अर्थ – न-Na, म-Ma, शि-Shi, वा-Va, य-Ya : ये पांच तत्वों संस्कृत में पंच भूत के रूप में जाने जाते हैं। पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और ईथर को इंगित करते हैं।

न  – Na   – (पृथ्वी – Earth)        – First Chakra       – Basic Chakra  – Maa Kali – Red Color – Positive Energy coming from Earth & build the Foundation Level.
म  – Ma  – (जल – Water)         – Second Chakra – Sex Chakra     – Lord Bishnu – White Color – Represented water element & solve all the issues of sexuality on an emotional level.
शि – Shi – (अग्नि – Fire/Shiva)  – Third Chakra    – Solar Plexus    – Maha Rudra Shiva – Yellow Color– Located above Naval – How to cut all the negative cord.
वा – Va   – (वायु – Air)                – Fourth Chakra  – Heart Chakra  – Ganesh – Green Color – Located in Heart Center – How to clean all the blockages.
य  – Ya   – (ईथर – Sky / Ether)  – Fifth Chakra      – Throat Chakra – Saraswati – Blue Color – Located in Throat Center- Solve all the issues of expression, so how to speak & heard right way.

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित प्रसिद्ध ग्रन्थ रामचरितमानस मैं वर्णन है:

तारा बिकल देखि रघुराया।
दीन्ह ग्यान हरि लीन्ही माया॥

छिति जल पावक गगन समीरा।
पंच रचित अति अधम सरीरा

भगवान् राम ने जब बाली को मार दिया, उसके बाद उसकी पत्नी रोतेहुए उनके पास आई, तब राम जी ने उसको समझाया। श्री रघुनाथजी ने उसे ज्ञान दिया और उसकी माया (अज्ञान) हर ली। भगवान् राम ने कहा : पृथ्वी, जल, अग्नि, आकाश और वायु– इन पाँच तत्वों से यह अत्यंत अधम शरीर रचा गया है। फिर तुम किसके लिए रो रही हो।

Credit the Video : Bhakti Bharat Ki YouTube Channel

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