July 27, 2026
Bhajan

Ram Naam Mahima Kavitavali Tulsidas | राम नाम महिमा-कवितावली-तुलसीदास

Ram Naam Mahima Kavitavali Tulsidas

Ram Naam Mahima Kavitavali Tulsidas | राम नाम महिमा-कवितावली-तुलसीदास: दोस्तों नमस्कार, आज हम आपको इस लेख के जरिए राम नाम महिमा-कवितावली-तुलसीदास के बारे में बात करेंगे। गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा कवितावली मे केवल राम राम रटने से जो चाहे वो पाओ। सब साधन छोड़कर बस एकमात्र करुणानिधान राम नाम जपिये।

Ramnavami Bhajan 

Ram Naam Mahima Kavitavali Tulsidas 

राम नाम महिमा-कवितावली-तुलसीदास

रामु बिहाइ ‘मरा’ जपतें बिगरी सुधरी कबिकोकिलहू की।
नामहि तें गजकी, गनिकाकी, अजामिलकी चलि गै चलचूकी॥

नामप्रताप बड़ें कुसमाज बजाइ रही पति पांडुबधूकी।
ताको भलो अजहूँ ‘तुलसी’ जेहि प्रीति-प्रतीति है आखर दूकी॥

नाम अजामिल-से खल तारन, तारन बारन-बारबधूको।
नाम हरे प्रहलाद-बिषाद, पिता-भय-साँसति सागरु सूको॥

नामसों प्रीति-प्रतीति-बिहीन गिल्यो कलिकाल कराल, न चूको।
राखिहैं रामु सो जासु हिएँ तुलसी हुलसै बलु आखर दूको॥

जीव जहानमें जायो जहाँ, सो तहाँ ‘तुलसी’ तिहुँ दाह दहो है।
दोसु न काहू,कियो अपनो, सपनेहूँ नहीं सुखलेसु लहो है॥

रामके नामतें होउ सो होउ, न सोउ हिएँ, रसना हीं कहो है।
कियो न कछू,करिबो न कछू, कहिबो न कछू, मरिबोइ रहो है॥

जीजे न ठाउँ, न आपन गाउँ, सुरालयहू को न संबलु मेरें।
नामु रटो,जमबास क्यों जाउँ, को आइ सकै जमकिंकरु नेरें॥

तुम्हरो सब भाँति तुम्हारिअ सौं, तुम्ह ही बलि हौ मोको ठाहरु हेरें।
बैरख बाँह बसाइए पै तुलसी-घरु ब्याध-अजामिल-खेरें॥

का कियो जोगु अजामिलजू, गनिकाँ मति पेम पगाई।
ब्याधको साधुपनो कहिए, अपराध अगाधनि में ही जनाई॥

करुनाकरकी करुना करुना हित, नाम-सुहेत जो देत दगाई।
काहेको खीझिअ, रीझिअ पै, तुलसीहु सों है, बलि सोइ सगाई॥

जे मद-मार-बिकार भरे, ते अचार-बिचार समीप न जाहीं।
है अभिमानु तऊ मनमें, जनु भाषिहै दूसरे दीनन पाहीं?॥

जौ कछु बात बनाइ कहौं, तुलसी तुम्हमें, तुम्हहू उर माहीं।
जानकीजीवन! जानत हौ, हम हैं तुम्हरे, तुम में ,सकु नाहीं ॥

दानव-देव, अहीस-महीस, महामुनि-तापस, सिध्द-समाजी।
जग-जाचक, दानि दुतीय नहीं, तुम्ह ही सबकी सब राखत बाजी॥

एते बड़े तुलसीस! तऊ सबरीके दिए बिनु भूख न भाजी।
राम गरीबनेवाज! भए हौ गरीबनेवाज गरीब नेवाजी॥

आगम, बेद, पुरान बखानत मारग कोटिन, जाहिं न जाने।
जे मुनि ते पुनि आपुहि आपुको ईसु कहावत सिध्द सयाने॥

धर्म सबै कलिकाल ग्रसे, जप,जोग बिरागु लै जीव पराने।
को करि सोचु मरै ‘तुलसी’, हम जानकीनाथके हाथ बिकाने॥

Credit the Video : Amrita Chaturvedi YouTube Channel

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