योगिनी एकादशी | Yogini Ekadashi | योगिनी एकादशी के विधि, महत्व और मंत्र: दोस्तों नमस्कार, आज हम आप लोगों को इस पोस्ट के माध्यम से योगिनी एकादशी के विधि, महत्व और मंत्र (ISKCON Ekadashi) के बारे में बताएँगे। यह व्रत कब रखा जाएगा और इस व्रत को रखने का धार्मिक महत्व क्या है। हिन्दू धर्म में एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित हैं, जिसका वर्णन महाभारत काल में मिलता है। यह व्रत आषाढ़ कृष्ण एकादशी के दिन रखा जाता है। योगिनी एकादशी (Yogini Ekadashi) को हिंदुओं द्वारा सबसे महत्वपूर्ण एकादशी व्रत माना जाता है। योगिनी एकादशी को भगवान श्रीकृष्ण और योगिनी माता की पूजा और व्रत के रूप में मनाया जाता है। मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति को भगवान कृष्ण की कृपा, संतान, धन, सुख-शांति, आशीर्वाद और पापों से मुक्ति मिलती है।
Yogini Ekadashi | योगिनी एकादशी के विधि, महत्व और मंत्र
योगिनी एकादशी व्रत विधि :
सुबह जल्दी उठकर नित्यकर्म के बाद स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।
इसके बाद भगवान विष्णु का ध्यान और पूजा करनी चाहिए।
पूरे दिन भगवान स्मरण-ध्यान व जाप करना चाहिए।
पूरे दिन और एक रात व्रत रखने के बाद अगली सुबह सूर्योदय के बाद सुबह नहा धोकर तैयार हो जाएं।
पूजा करके गरीबों, ब्रह्मणों को दान या भोजन कराना चाहिए।
इसके बाद खुद भी भगवान का भोग लगाकर प्रसाद लेना चाहिए।
योगिनी एकादशी मंत्र
Yogini Ekadashi Mantra
भगवान विष्णु मूल मंत्र
ॐ नमोः नारायणाय॥
भगवते वासुदाय मंत्र
ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय॥
विष्णु गायत्री मंत्र
ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि|
तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥
विष्णु शांताकरम मंत्र
शान्ताकारम् भुजगशयनम् पद्मनाभम् सुरेशम्
विश्वाधारम् गगनसदृशम् मेघवर्णम् शुभाङ्गम् |
लक्ष्मीकान्तम् कमलनयनम् योगिभिर्ध्यानगम्यम्
वन्दे विष्णुम् भवभयहरम् सर्वलोकैकनाथम्॥
शक्तिशाली विष्णु मंत्र
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः |
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
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