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September 20, 2026
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Madhava Panchakam | माधव पंचकम

Madhava Panchakam

Madhava Panchakam | माधव पंचकम: दोस्तों नमस्कार, आज हम आप लोगों को इस लेख के माध्यम से माधव पंचकम के बारे में बताने वाले हैं। माधव पंचकम भगवान श्रीकृष्ण (माधव) को समर्पित एक भावपूर्ण भक्ति रचना है। जिसकी रचना ऊत्तुक्काडु वेंकट कवि ने की है। इसकी की दिव्य सुंदरता, शांत और मधुर धुन, पारंपरिक भक्ति भाव तथा हृदयस्पर्शी गायन मन में शांति, भक्ति और आध्यात्मिक चिंतन का वातावरण उत्पन्न करते हैं।

Madhava Panchakam

माधव पंचकम 

Ragam: Yamunakalyani
मंगल तुंग निरन्तर चन्द्र धुरन्धर बृन्द धराधिपते
माधव गौर वसन मणि नूपुर मरकत हार सुराधिपते
अंकित चन्दन अनुपम संगुण अंजन रूषित नयनपते
हरि हरि माधव मधुसूदन जय आनक दुन्दुभि भाग्यपते
Ragam: Naadhanaamakriya
शंख गदा वनमाला सुदर्शन धारण तरुण कर ज्वलसे
चल चल नयन सुधाकर भाषण तन्त्र स्वतन्त्र स्वरूप निधे
अमर गणैरपि वाञ्छित पदयुग विमल कमलदल सौम्य निधे
हरि हरि माधव मधुसूदन जय आनक दुन्दुभि भाग्यपते
Ragam: Kaapi (Peelu)
भद्र विचित्र चरित्र पवित्र सुमित्र सुमित्र सुमित्र पते
भावित लोक चराचर पालन पाद युगल करुणा जलधे
अगणित मुनिगण घोषण घोषित हरि हरि नाम सुदासयुते
हरि हरि माधव मधुसूदन जय आनक दुन्दुभि भाग्यपते
Ragam: Ahir Bhairav
ललना लालित ललित विलुलित ललाट ललामक लसित पते
नव नव भाव मनोहर खेद निकृन्तन हेतु विनोद गते
आनन विकसित मंद हसन भर अकलुष सुन्दर रूप निधे
हरि हरि माधव मधुसूदन जय आनक दुन्दुभि भाग्यपते
Ragam: Sindhu Bhairavi
रम्य सुगंध मधुकर मधुक मतराग मपाद म पाद प मा
नाद गीत पर कंजर युतवन नानाविध दल हार पते
अमित रमित घन कोलाहल शिखिनार्पित पिंछक चिकुर पते
हरि हरि माधव मधुसूदन जय आनक दुन्दुभि भाग्यपते

श्लोक 1 – भावार्थ:
मंगल तुंग निरंतर चंद्र धुरंधर — हे निरंतर मंगलमय एवं चंद्रमा के समान तेजस्वी प्रभु, आप श्रेष्ठ हैं।
वृंद धराधिपते माधव — हे तुलसी की माला धारण करने वाले, हे माधव, हे समस्त संसार के स्वामी!
गौर वसन — हे श्वेत वस्त्र धारण करने वाले प्रभु!
मणि नूपुर मरकत हार सुराधिपते — हे देवताओं के अधिपति, आप रत्नजड़ित नूपुर और पन्ने के हार से सुशोभित हैं।
अंकित चंदन अनुपम सद्गुण अंजन रूषित नयनपते — हे प्रभु, आपके अंग चंदन से सुशोभित हैं और आपके नेत्र काजल से सजे हुए हैं। आपके सद्गुण अनुपम हैं।
हरि हरि माधव मधुसूदन — हे हरि! हे माधव! हे मधुसूदन! आपकी जय हो!
जय अनक दुंदुभि भाग्यपते — हे अनक दुंदुभि के सौभाग्य, आपकी जय हो!
नोट: अनक दुंदुभि भगवान श्रीकृष्ण के पिता वसुदेव जी का एक अन्य नाम है।

श्लोक 2 – भावार्थ:
शंख गदा वनमाला: हे शंख, गदा और वन-पुष्पों की माला धारण करने वाले प्रभु!
सुदर्शन धारण तरुण कर ज्वलसे: हे प्रभु, अपने कोमल एवं सुंदर हाथ में सुदर्शन चक्र धारण करके आप तेजस्वी दिखाई देते हैं।
चल चल नयन: हे चंचल एवं सुंदर नेत्रों वाले प्रभु!
सुधाकर भाषण: हे प्रभु, आपकी वाणी अमृत के समान मधुर और आनंददायक है।
तंत्र स्वतंत्र स्वरूप निधे: हे प्रभु, आपका स्वरूप सभी मतों और सिद्धांतों से स्वतंत्र एवं परम है।
अमर गणैरपि वाञ्छित पदयुग विमल कमलदल: हे प्रभु, आपके दोनों निर्मल कमल समान चरणों की कामना देवगण भी करते हैं।
सौम्यनिधे: हे सौम्यता और करुणा के भंडार प्रभु!

श्लोक 3 – भावार्थ:
भद्र विचित्र चरित्र: हे मंगलमय एवं अद्भुत लीलाओं वाले प्रभु!
पवित्र सुमित्र: हे पवित्र एवं श्रेष्ठ मित्रों से युक्त प्रभु!
सुमित्र सुमित्रपते: हे उत्तम मित्रों के स्वामी, हे अपने भक्तों के परम हितैषी प्रभु!
भावित लोक: हे समस्त संसार के सृजनकर्ता एवं पालनकर्ता प्रभु!
चराचर पालन पादयुगल: हे अपने दोनों चरणों से समस्त चर-अचर जगत की रक्षा करने वाले प्रभु!
करुणा जलधे: हे करुणा के अथाह सागर प्रभु!
अगणित मुनिगण घोषण घोषिता हरि हरि नाम सुदास युते: हे प्रभु, जिनका “हरि-हरि” नाम असंख्य मुनियों द्वारा गाया और उच्चारित किया जाता है, तथा जो अपने श्रेष्ठ भक्तों से सदैव घिरे रहते हैं!

श्लोक 4 – भावार्थ:
ललना लालित ललित विलुलित ललाट ललामक लसित पते: हे प्रभु, सुंदर ललनाओं के स्नेह से स्पर्शित आपके ललाट पर सुशोभित तिलक और भी मनोहर दिखाई देता है।
नव नव भाव मनोहर: हे प्रभु, आपके नित-नवीन भाव मन को मोह लेने वाले हैं।
खेद निकृन्तन हेतु विनोद गते: हे प्रभु, आपकी आनंदमयी लीलाएँ भक्तों के दुख और संताप को दूर करने वाली हैं।
आनन विकसित मंद हसन भर: हे प्रभु, आपके मुख पर खिली हुई मंद-मंद मुस्कान अत्यंत मनोहर और आनंददायक है।
अकलुष सुंदर रूपनिधे: हे निष्कलंक एवं परम सुंदर स्वरूप के भंडार प्रभु!

श्लोक 5 – भावार्थ:
रम्य सुगंध मधुकर मधुक मत राग मपाद मपामानाद गीत पर: हे प्रभु, सुंदर और सुगंधित वन में गूंजते भ्रमरों की मधुर गुंजार आपको अत्यंत प्रिय है, जो मानो “म-प-ध-प-म” जैसे मधुर स्वरों का संगीत हो।
कंजर युत वन नानाविध दल हारपते: हे प्रभु, आप हाथियों से युक्त वन के विभिन्न प्रकार के पत्तों और पुष्पों से बनी सुंदर मालाएँ धारण करते हैं।
शिखिना अर्पित पिञ्जल चिकुरपते: हे प्रभु, आपके केशों में मोर द्वारा अर्पित सुंदर पंख सुशोभित हो रहा है।
अमित रमित घन कोलाहल: हे प्रभु, चारों ओर उठने वाली वह मधुर और मनोहर ध्वनि वातावरण को आनंद से भर देती है।

Audio Credits:
Song: Madhava Panchakam
Composer: Otthukkadu Venkata Subbaiyer
Language: Tamil
Ragam: Chalanaattai (Ragamalika- Yamuna Kalyani, Nada Namakria, Kapi, Chakravaham, Sindhu Bhairavi)
Talam: Adi
Aro: S R3 G3 M1 P D3 N3 S
Ava: S N3 D3 P M1 G3 R3 S

Vocals: Sai Manogna Darbha, Sai Pranavi Darbha
Flute: Poornima Krishna Emani
Violin: Koundinya Pannala
Mridangam: Challa Padmaja
Audio Editing and mixing: Rhythm Pavan, Manogna

https://www.youtube.com/watch?v=CFONwt5bvrA

Credit the Video: Sai Darbha Sisters YouTube Channel

Credit the Video: Sooryagayathri YouTube Channel

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