Radhashtami Ka Vrat Kaise Karna Chahiye | राधाष्टमी का व्रत कैसे करना चाहिए: दोस्तों नमस्कार, आज हम आप लोगों को इस लेख के माध्यम से राधाष्टमी का व्रत कैसे करना चाहिए के बारे में बताने वाले हैं। वैष्णव परंपरा के अनुसार, जिस प्रकार जन्माष्टमी और एकादशी का व्रत रखा जाता है, उसी प्रकार राधाष्टमी का व्रत भी पूरे दिन किया जाता है। अगले दिन पारण करके व्रत का समापन किया जाता है।
Radhashtami Ka Vrat Kaise Karna Chahiye
राधाष्टमी का व्रत कैसे करना चाहिए
यदि आप राधाष्टमी का व्रत कर रहे हैं, तो पूरे दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखें। यहां उत्सव का महत्व बहुत ज्यादा है। तो आप सबसे पहले ब्रह्म मुहूर्त में आप उठिए, स्नान करिए, स्वच्छ हो जाइए और नीलांबर धारण करिए। उसके बाद में श्री जी के पास में जाकर व्रत का संकल्प लीजिए। अब आप व्रत का संकल्प लेने के पश्चात श्रीजी का विधिपूर्वक अभिषेक कर सकते हैं। 12:00 बजे अपने घर में जो पूजा होती है, उस पूजा में स्थापित श्री राधा रानी के विग्रह को पंचामृत से अभिषेक करें।
उनकी प्रसन्नता के लिए जन्माष्टमी पर सब लोग पीला वस्त्र पहनते हैं, क्योंकि कृष्ण पीतांबरी धारण करते हैं। राधा रानी का जो प्रिय रंग नीला, तो राधाष्टमी के दिन आप श्री राधा रानी को नीलांबर वस्त्र पहना सकते हैं। जैसे जन्माष्टमी पर हम पीले वस्त्र पहनते हैं, राधा अष्टमी पर आप नीला वस्त्र धारण कर सकते हैं। श्री जी को नीलांबर धारण कराइए। श्री जी का सुंदर सा श्रृंगार करिए। ठाकुर जी का सुंदर सा श्रृंगार करिए। उसके बाद अपने भाव से श्री जी को जो जो खाने में पसंद है, जैसे आलू बुखारा, अरबी की सब्जी इन सब चीजों का भोग लगा सकते हैं।
दोपहर 12:00 बजे के बाद आप अपने घर पर, ज्यादा से ज्यादा श्री राधा नाम कीर्तन करिए। श्री राधा रानी के 28 नामों का जप करिए। श्री राधा रानी को कृष्ण नाम प्रिय है, तो आप उस दिन श्री राधा रानी की प्रसन्नता हरि नाम संकीर्तन करें। सुबह, दोपहर और संध्या को अभिषेक के समय पूरा परिवार बैठकर थोड़ी देर के लिए श्री राधा रानी को हरि नाम सुनाएं, कृष्ण नाम सुनाए, राधा नाम सुनाएं। राधाष्टमी के पावन अवसर पर संकीर्तन का उपहार श्री राधा रानी जी के चरणों में अर्पित करें। शास्त्र कहता है अगर आप यह व्रत करते हैं, तो इससे आपको अनेकानेक एकादशियों का फल प्राप्त हो जाता है। तो राधा अष्टमी का व्रत अवश्य करें।
ब्रह्मा जी ने भी कहा है कि यदि आप श्री राधा रानी के 28 नामों का जप करते हैं तो आप जीवन मुक्त हो जाते हैं। उसके साथ-साथ में हमारी श्री जी को हरिवंश नाम और कृष्ण नाम बहुत ज्यादा पसंद है। तो इस दिन आप ज्यादा से ज्यादा राधावल्लभ श्री हरिवंश जप सकते हैं। आप हरे कृष्ण महामंत्र का भी जप कर सकते हैं, श्री जी बहुत ज्यादा प्रसन्न हो जाएंगी।
उसके बाद, अगले दिन सूर्योदय के बाद आप अपने व्रत का पारण विधिपूर्वक कर सकते हैं। राधाष्टमी के दिन आप श्री राधा रानी जी के लिए प्रेमपूर्वक अच्छे-अच्छे व्यंजन बनाकर उन्हें भोग के रूप में अर्पित कर सकते हैं। आप अपने घर पर श्री राधा रानी के लिए छप्पन भोग बनाएं। श्री राधा रानी को अरबी की सब्जी और कढ़ी यह दो वस्तु बहुत प्रिय है।
सबसे बड़ी बात इस दिन आप किसी प्रकार के छल कपट, झूठ बोलने से बचिए। ब्रह्मचर्य का पालन करिए, सात्विक तरीके से रहिए, हमारे श्री जी बहुत प्रसन्न हो जाएंगी।
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