26.2 C
Bhubaneswar
October 12, 2026
Blog

Radha Ashtami Puja Vidhi | राधा अष्टमी व्रत संकल्प, पूजा विधि, भोग और पारण की पूरी जानकारी

Radha Ashtami Puja Vidhi

Radha Ashtami Puja Vidhi | राधा अष्टमी व्रत संकल्प, पूजा विधि, भोग और पारण की पूरी जानकारी: दोस्तों नमस्कार, आज हम आप लोगों को इस लेख के माध्यम से राधा अष्टमी व्रत संकल्प, पूजा विधि, भोग और पारण की पूरी जानकारी के बारे में बताने वाले हैं। प्रिय भक्तजनों राधा अष्टमी का व्रत से लेकर पूजा, पारण तक केवल उपवास रखने का नहीं, बल्कि यह श्री राधा रानी की भक्ति, श्रद्धा और प्रेम का पावन अवसर है।

Radha Ashtami Puja Vidhi

राधा अष्टमी व्रत संकल्प, पूजा विधि, भोग और पारण की पूरी जानकारी

पुराण के अनुसार श्री राधा अष्टमी का व्रत, सर्वप्रथम स्नान आदि दैनिक कर्मों से निवृत्त होकर स्वच्छ एवं शुद्ध वस्त्र धारण करें। तदानु उपरांत एक मंडप के भीतर एक मंडल की श्री रचना कर उसके मध्य में मिट्टी अथवा तांबे का कलश स्थापित करें। कलश के ऊपर एक तांबे का पात्र रखें। उस तांबे के पात्र के ऊपर देवी श्री राधा रानी की स्वर्णमय प्रतिमा विधिपूर्वक स्थापित करें। प्रतिमा को दो नवीन वस्त्रों से ढक दें।

आप बाल राधा रानी, नहीं तो लड्डू गोपाल का श्रृंगार राधा रानी रूप में करके पूजा कर सकते हैं। बस आपके मन में भाव होना चाहिए। हम बाल राधा रानी व्रत इसलिए करते हैं ताकि हमारा मन सात्विक रहे। व्रत हम अपनी श्रद्धा से रखें, पारण उसी दिन कर लें। राधा रानी को आपके प्रेम से भरे मन की जरूरत है। राधा रानी दया की मूर्ति हैं, आपका मन देखते हैं तन नहीं। तत्पश्चात मध्यकाल में राधा रानी की शोडस उपचार विधि द्वारा श्रद्धा पूर्वक पूजा अर्चना करें।

यदि सामर्थ्य हैं तो पूर्ण दिवस उपवास करें। हमें आलस्य ना आए, हम भगवान का ध्यान अच्छे से कर पाएं, ताकि राधा रानी की कृपा प्राप्त हो। व्रत आप अपनी शारीरिक क्षमता और भाव के अनुसार ही करें। आप इस व्रत को निर्जल भी कर सकते हैं। आप फलाहार करके भी कर सकते हैं, चाहे तो व्रत शाम तक करें या दोपहर की पूजा 12:00 बजे के बाद, व्रत खोल सकते हैं। या व्रत आगामी दिवस पर सुहागिन स्त्रियों को प्रेम पूर्वक भोजन कराएं। तदानु उपरांत आचार्य को श्रद्धापूर्वक दान-दक्षिणा एवं भोजन कराएं। इसके पश्चात कुटुंबीजनों सहित स्वयं भोजन ग्रहण करके व्रत का विधिपूर्वक पारण करें। इस प्रकार श्री राधा अष्टमी की व्रत विधि संपन्न होती है।

Disclaimer: Bhakti Bharat Ki / भक्ति भारत की (https://bhaktibharatki.com) वेबसाइट का उद्देश्य किसी की आस्था या भावनाओं को ठेस पहुंचना नहीं है। इस वेबसाइट पर प्रकाशित उपाय, रचना और जानकारी को भिन्न – भिन्न लोगों की मान्यता, जानकारियों के अनुसार और इंटरनेट पर मौजूदा जानकारियों को ध्यान पूर्वक पढ़कर, और शोधन कर लिखा गया है। इस पोस्ट पर दिए गए जानकारी केवल सामान्य ज्ञान और शैक्षिक उद्देश्य के लिए बनाया गया है। यहां यह बताना जरूरी है कि Bhakti Bharat Ki / भक्ति भारत की (https://bhaktibharatki.com) इसमें चर्चा की गई किसी भी तरह जानकारी, मान्यता, सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता की पूर्ण रूप से गारंटी नहीं देते। राधा अष्टमी व्रत संकल्प, पूजा विधि, भोग और पारण की पूरी जानकारी का अर्थ और महत्व को अमल में लाने से पहले कृपया संबंधित योग्य विशेषज्ञ अथवा पंड़ित की सलाह अवश्य लें। राधा अष्टमी व्रत संकल्प, पूजा विधि, भोग और पारण की पूरी जानकारी का उच्चारण करना या ना करना आपके विवेक पर निर्भर करता है। इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी का उपयोग पूरी तरह से उपयोगकर्ता की अपनी ज़िम्मेदारी पर है। किसी भी प्रकार की हानि, नुकसान, या परिणाम के लिए हम प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार नहीं होंगे।

Facebook
Instagram
YouTube

Related posts

गलती और पाप में क्या है अंतर? प्रेमानंद महाराज ने बताया जीवन बदलने वाला सत्य

Bimal Kumar Dash

बदलाव की पुकार: कैसे एक गाँव ने भ्रष्टाचार और अन्याय को हराया

Bimal Kumar Dash

राधा नाम जप से खुलता है भगवान का द्वार: श्री हित प्रेमानंद जी

Bimal Kumar Dash