26.1 C
Bhubaneswar
August 13, 2026
Blog

महामाया में महाष्टमी की भक्ति, पीठ पर महानवमी की नीतिकांति की चमक

रायपुर: नवरात्रि का पवित्र पर्व शहर में भक्ति की लहरें बिखेर रहा है। मंगलवार को महामाया मंदिर में महाष्टमी का उत्साह चरम पर था। सुबह से ही मंदिर में भक्तों की कतारें लगीं। मां दुर्गा के दर्शन के लिए लोग उत्साहित दिखे। मंदिर को फूलों, रंग-बिरंगी लाइटों और चुनरियों से सजाया गया। हवा में भक्ति की सुगंध बिखर रही थी।

महामाया में भक्ति का रंग

महामाया मंदिर में सुबह से ही पूजा-अर्चना का दौर शुरू हुआ। भक्तों ने मां दुर्गा को फूल, मिठाई और प्रसाद चढ़ाया। हवन की धुनी से मंदिर परिसर पवित्र हो उठा। पंडित गोविंद शर्मा ने बताया, “महाष्टमी का दिन मां की शक्ति की आराधना का विशेष दिन है। भक्तों का विश्वास मां की कृपा से पूरा होता है।”

कन्या पूजन का आयोजन भी खास रहा। छोटी-छोटी कन्याओं को भोजन कराया गया। उन्हें उपहार और आशीर्वाद दिए गए। एक भक्त राधा देवी ने कहा, “मां के दर्शन से मन को शांति मिलती है। हर साल यहां आना सौभाग्य है।”

पीठ मंदिर में महानवमी की तैयारी

दूसरी ओर, पीठ मंदिर में महानवमी की तैयारियां जोरों पर हैं। नीतिकांति की विशेष पूजा बुधवार को होगी। मंदिर को भव्य रूप दिया जा रहा है। मंदिर समिति के सचिव राकेश तिवारी ने बताया, “महानवमी के लिए विशेष सजावट की गई है। भक्तों की सुविधा के लिए अतिरिक्त काउंटर और बैठने की व्यवस्था की गई है।”

महानवमी पर होने वाली नीतिकांति पूजा भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र है। इस पूजा में मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना होगी। भक्तों का मानना है कि इस दिन मां की कृपा से जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

शहर में नवरात्रि की रौनक

शहर के हर कोने में नवरात्रि की धूम है। मंदिरों में भक्ति भजनों की गूंज सुनाई दे रही है। जगह-जगह गरबा और डांडिया की रंगीन शामें सज रही हैं। स्थानीय निवासी प्रिया साहू ने कहा, “नवरात्रि का उत्साह हर दिल को जोड़ता है। मां की भक्ति में डूबकर मन को सुकून मिलता है।”

महामाया और पीठ मंदिर के अलावा, शहर के अन्य मंदिरों में भी भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। नवरात्रि का यह पर्व भक्ति, उत्साह और एकजुटता का प्रतीक बनकर उभर रहा है। जैसे-जैसे विजयादशमी नजदीक आ रही है, भक्तों का उत्साह और बढ़ता जा रहा है।

Related posts

Ganesha Visarjan Mantra | श्री गणेश विसर्जन के मंत्र

Bimal Kumar Dash

महालया अमावस्या: पितृपक्ष का अंत, माँ दुर्गा का स्वागत

Bimal Kumar Dash

हिंदू नववर्ष और अंग्रेजी नए साल में इतना फर्क क्यों?

Bimal Kumar Dash