Meenakshi Pancharatnam | मीनाक्षी पंचरत्नम: दोस्तों नमस्कार, आज हम आप लोगों को इस पोस्ट के माध्यम से मीनाक्षी पंचरत्नम के बारे में बताएँगे। मीनाक्षी पंचरत्नम् एक पवित्र स्तोत्र है, जिसे देवी मीनाक्षी की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए गाया जाता है। यह “मीनाक्षी के पाँच रत्न” नाम से प्रसिद्ध स्तोत्र है, जिसकी रचना महान संत आदि शंकराचार्य ने की थी।
यह “मीनाक्षी” शब्द दो भागों से मिलकर बना है। “मीन” जिसका अर्थ है मछली, और “अक्षी” जिसका अर्थ है नेत्र। उन्हें मछली के समान नेत्रों वाली देवी पार्वती का अवतार माना जाता है, जिनका मुख पूर्णिमा के चन्द्रमा की तरह तेजस्वी है। मीनाक्षी देवी का तेज हजारों उदित होते सूर्यों के समान बताया गया है। उनके कंगन और हार दिव्य आभा से चमकते हैं।
मीनाक्षी पंचरत्नम
उद्यद्भानुसहस्रकोटिसदृशां केयूरहारोज्ज्वलां
विम्बोष्ठीं स्मितदन्तपङ्क्तिरुचिरां पीताम्बरालङ्कृताम् ।
विष्णुब्रह्मसुरेन्द्रसेवितपदां तत्त्वस्वरूपां शिवां
मीनाक्षीं प्रणतोऽस्मि सन्ततमहं कारुण्यवारांनिधिम् ॥१॥
मुक्ताहारलसत्किरीटरुचिरां पूर्णेन्दुवक्त्रप्रभां
शिञ्जन्नूपुरकिङ्किणीमणिधरां पद्मप्रभाभासुराम् ।
सर्वाभीष्टफलप्रदां गिरिसुतां वाणीरमासेवितां ।
मीनाक्षीं प्रणतोऽस्मि सन्ततमहं कारुण्यवारांनिधिम् ॥२॥
श्रीविद्यां शिववामभागनिलयां ह्रीङ्कारमन्त्रोज्ज्वलां
श्रीचक्राङ्कितबिन्दुमध्यवसतिं श्रीमत्सभानायिकाम् ।
श्रीमत्षण्मुखविघ्नराजजननीं श्रीमज्जगन्मोहिनीं ।
मीनाक्षीं प्रणतोऽस्मि सन्ततमहं कारुण्यवारांनिधिम् ॥३॥
श्रीमत्सुन्दरनायिकां भयहरां ज्ञानप्रदां निर्मलां
श्यामाभां कमलासनार्चितपदां नारायणस्यानुजाम् ।
वीणावेणुमृदङ्गवाद्यरसिकां नानाविधामम्बिकां ।
मीनाक्षीं प्रणतोऽस्मि सन्ततमहं कारुण्यवारांनिधिम् ॥४॥
नानायोगिमुनीन्द्रहृत्सुवसतिं नानार्थसिद्धिप्रदां
नानापुष्पविराजिताङ्घ्रियुगलां नारायणेनार्चिताम् ।
नादब्रह्ममयीं परात्परतरां नानार्थतत्त्वात्मिकां ।
मीनाक्षीं प्रणतोऽस्मि सन्ततमहं कारुण्यवारांनिधिम् ॥५॥
इति श्रीमत्परमहंस परिव्राजकाचार्यस्य
श्रीगोविन्द भगवत्पूज्य पादशिष्यस्य
श्रीमच्छङ्करभगवतः कृतौ
मीनाक्षी पंचरत्नम् सम्पूर्णम् ।
Meenakshi Pancharatnam
Udyad Bhanu Sahasra-Koti Sadrsham Keyura Haarojwalam
Bimboshteem Smitha Danta Pankthi Ruchiram Peetambara-Alankrtam ।
Vishnu Brahma Surendra Sevita Padaam Tatvaswa Rupam Sivaam
Meenakshim Pranathosmi Santata Maham Karunya Vaaraam Nidhim । 1 ।
Mukthahaara Lasat Kireeta Ruchiram Poornendu Vakthra Prabham
Shinjannupura Kimkini Mani Dharam Padma-Prabha Bhaasuram ।
Sarvabheestha Phalapradam Girisutam Vaani Rama Saevitam ।
Meenakshim Pranathosmi Santata Maham Karunya Vaaraam Nidhim। 2 ।
Shree-Vidyaam Shiva Vamabhagha Nilayam Hreemkaara Mantrojwalam
Srichakrankitha Bindhu Madhya Vasathim Srimath Sabhaa Nayekaam ।
Srimath Shamukha Vignaraja Jananeem Srimajjagan Mohineem ।
Meenakshim Pranathosmi Santata Maham Karunya Vaaraam Nidhim। 3 ।
Srimat Sundara Nayakeem Bhayaharaam Gnaana Pradam Nirmalaam
Shyamabhaam Kamalasanaarchitha-Padam Narayanasyaanujam ।
Veena Veenu Mrudanga Vaadya Rasikaam Nanavidhaam Ambhikam ।
Meenakshim Pranathosmi Santata Maham Karunya Vaaraam Nidhim । 4 ।
Nanaayogi Muneendra Hruthya Vasathim Nanaardha Siddi Pradam
Nanaa Pushpa Virajithanghri Yughalam Narayanae-Narchitham ।
Naada Brahma Mayeem Paraath Parataram Nanardha Tatvatmikaam ।
Meenakshim Pranathosmi Santata Maham Karunya Vaaraam Nidhim । 5 ।
Iti Srimatparamahamsa Parivrajakaacharyasya
Srigovinda Bhagavatpujya Padashishyasya
Srimacchankara Bhagavatah Krutau
Meenakshi Pancharatnam Sampoornam.
॥ ମୀନାକ୍ଷୀ ପଞ୍ଚରତ୍ନମ୍ ॥
ଉଦ୍ୟଦ୍ଭାନୁ ସହସ୍ରକୋଟିସଦୃଶାଂ କେୟୂରହାରୋଜ୍ଜ୍ୱଲାଂ
ବିମ୍ବୋଷ୍ଠୀଂ ସ୍ମିତଦନ୍ତପଂକ୍ତିରୁଚିରାଂ ପୀତାମ୍ବରାଲଂକୃତାମ୍ ।
ବିଷ୍ଣୁବ୍ରହ୍ମସୁରେନ୍ଦ୍ରସେବିତପଦାଂ ତତ୍ୱସ୍ୱରୂପାଂ ଶିବାଂ
ମୀନାକ୍ଷୀଂ ପ୍ରଣତୋଽସ୍ମି ସଂତତମହଂ କାରୁଣ୍ୟବାରାଂନିଧିମ୍ ॥ ୧ ॥
ମୁକ୍ତାହାରଲସତ୍କିରୀଟରୁଚିରାଂ ପୂର୍ଣେନ୍ଦୁବକ୍ତ୍ର ପ୍ରଭାଂ
ଶିଞ୍ଜନ୍ନୂପୁରକିଂକିଣିମଣିଧରାଂ ପଦ୍ମପ୍ରଭାଭାସୁରାମ୍ ।
ସର୍ୱାଭୀଷ୍ଟଫଲପ୍ରଦାଂ ଗିରିସୁତାଂ ବାଣୀରମାସେବିତାଂ
ମୀନାକ୍ଷୀଂ ପ୍ରଣତୋଽସ୍ମି ସଂତତମହଂ କାରୁଣ୍ୟବାରାଂନିଧିମ୍ ॥ ୨ ॥
ଶ୍ରୀବିଦ୍ୟାଂ ଶିବବାମଭାଗନିଲୟାଂ ହ୍ରୀଂକାରମନ୍ତ୍ରୋଜ୍ଜ୍ୱଲାଂ
ଶ୍ରୀଚକ୍ରାଙ୍କିତ ବିନ୍ଦୁମଧ୍ୟବସତିଂ ଶ୍ରୀମତ୍ସଭାନାୟକୀମ୍ ।
ଶ୍ରୀମତ୍ଷଣ୍ମୁଖବିଘ୍ନରାଜଜନନୀଂ ଶ୍ରୀମଜ୍ଜଗନ୍ମୋହିନୀଂ
ମୀନାକ୍ଷୀଂ ପ୍ରଣତୋଽସ୍ମି ସଂତତମହଂ କାରୁଣ୍ୟବାରାଂନିଧିମ୍ ॥ ୩ ॥
ଶ୍ରୀମତ୍ସୁନ୍ଦରନାୟକୀଂ ଭୟହରାଂ ଜ୍ଞାନପ୍ରଦାଂ ନିର୍ମଲାଂ
ଶ୍ୟାମାଭାଂ କମଲାସନାର୍ଚିତପଦାଂ ନାରାୟଣସ୍ୟାନୁଜାମ୍ ।
ବୀଣାବେଣୁମୃଦଙ୍ଗବାଦ୍ୟରସିକାଂ ନାନାବିଧାମମ୍ବିକାଂ var ନାନାବିଧାଡମ୍ବିକାଂ
ମୀନାକ୍ଷୀଂ ପ୍ରଣତୋଽସ୍ମି ସଂତତମହଂ କାରୁଣ୍ୟବାରାଂନିଧିମ୍ ॥ ୪ ॥
ନାନାୟୋଗିମୁନୀନ୍ଦ୍ରହୃନ୍ନିବସତୀଂ ନାନାର୍ଥସିଦ୍ଧିପ୍ରଦାଂ
ନାନାପୁଷ୍ପବିରାଜିତାଂଘ୍ରିୟୁଗଲାଂ ନାରାୟଣେନାର୍ଚିତାମ୍ ।
ନାଦବ୍ରହ୍ମମୟୀଂ ପରାତ୍ପରତରାଂ ନାନାର୍ଥତତ୍ୱାତ୍ମିକାଂ
ମୀନାକ୍ଷୀଂ ପ୍ରଣତୋଽସ୍ମି ସଂତତମହଂ କାରୁଣ୍ୟବାରାଂନିଧିମ୍ ॥ ୫ ॥
ଇତି ଶ୍ରୀମତ୍ପରମହଂସପରିବ୍ରାଜକାଚାର୍ୟସ୍ୟ
ଶ୍ରୀଗୋବିନ୍ଦଭଗବତ୍ପୂଜ୍ୟପାଦଶିଷ୍ୟସ୍ୟ
ଶ୍ରୀମଚ୍ଛଂକରଭଗବତଃ କୃତୌ
ମୀନାକ୍ଷୀ ପଞ୍ଚରତ୍ନଂ ସମ୍ପୂର୍ଣମ୍ ।
Credit the Video: LilaSakura by Swami Brahmananda Saraswati, of Chinmaya Mission YouTube Channel
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