Nirakhi Aarti Mangal Bhor | निरखि आरती मंगल भोर: दोस्तों नमस्कार, आज हम आपको इस लेख के जरिए निरखि आरती मंगल भोर आरती के बारे में बात करेंगे। यह मंगल आरती श्री राधावल्लभ लाल जी के चरणों में नित्य सेवा, प्रेम, भक्ति और समर्पण का अंग है। प्रातः काल की इस पावन मंगल आरती के माध्यम से सभी के कल्याण की साझा की गई है। यह आरती जो मन को शांति, श्रद्धा और आनंद से भर देती है।
Nirakhi Aarti Mangal Bhor
निरखि आरती मंगल भोर
निरखि आरती मंगल भोर। मंगल स्यामा स्याम किशोर ॥
मंगल श्रीवृन्दावन धाम। मंगल कुंज महल अभिराम ॥
मंगल घंटा नाद सु होत। मंगल थार मणिनु की जोति ॥
मंगल दुंदुभी धुनि छबि छाई। मंगल सहचरी दरसन आई ॥
मंगल वीणा मृदंग बजावैं। मंगल ताल झाँझ झर लावैं ॥
मंगल सखी यूथ कर जोरैं। मंगल चंवर लिये चहुँ ओरैं॥
मंगल पुष्पावलि बरसाई। मंगल जोति सकल वन छाई ॥
जै श्रीरूपलाल हित हृदय प्रकाश। मंगल अद्भुत युगल विलास ॥
Credit the Video : Bhajanawali YouTube Channel
Disclaimer: Bhakti Bharat Ki / भक्ति भारत की (https://bhaktibharatki.com) वेबसाइट का उद्देश्य किसी की आस्था या भावनाओं को ठेस पहुंचना नहीं है। इस वेबसाइट पर प्रकाशित उपाय, रचना और जानकारी को भिन्न – भिन्न लोगों की मान्यता, जानकारियों के अनुसार और इंटरनेट पर मौजूदा जानकारियों को ध्यान पूर्वक पढ़कर, और शोधन कर लिखा गया है। इस पोस्ट पर दिए गए जानकारी केवल सामान्य ज्ञान और शैक्षिक उद्देश्य के लिए बनाया गया है। यहां यह बताना जरूरी है कि Bhakti Bharat Ki / भक्ति भारत की (https://bhaktibharatki.com) इसमें चर्चा की गई किसी भी तरह जानकारी, मान्यता, सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता की पूर्ण रूप से गारंटी नहीं देते। निरखि आरती मंगल भोर आरती का अर्थ और महत्व को अमल में लाने से पहले कृपया संबंधित योग्य विशेषज्ञ अथवा पंड़ित की सलाह अवश्य लें। निरखि आरती मंगल भोर आरती का उच्चारण करना या ना करना आपके विवेक पर निर्भर करता है। इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी का उपयोग पूरी तरह से उपयोगकर्ता की अपनी ज़िम्मेदारी पर है। किसी भी प्रकार की हानि, नुकसान, या परिणाम के लिए हम प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार नहीं होंगे।
