May 12, 2026
Mantra

Om Sachidananda Parabrahma | ॐ सच्चिदानंद परब्रह्म | ॐ सत चित आनंद परब्रह्मा

Om Sachidananda Parabrahma

Om Sachidananda Parabrahma | ॐ सच्चिदानंद परब्रह्म | ॐ सत चित आनंद परब्रह्मा: दोस्तों नमस्कार, आज हम आपको इस लेख के जरिए ॐ सत चित आनंद परब्रह्मा के बारे में बात करेंगे। Sat-Chit-Ananda or सत्-चित्-आन्द = (सचिदानंद – अटूट सत्य, चेतना और आनंद) सच्चिदानंद। सत + चित + आनंद को मिलाकर शब्द बना है सच्चिदानंद। परमात्मा अर्थात परम आत्मा ही सत चित आनंद है। परमात्मा ही सच्चिदानंद है। इसलिए परमात्मा ही सम्पूर्ण सत्य है, सम्पूर्ण चेतना है, और सम्पूर्ण सुख है। केवल मनुष्य ही इस सच्चिदानंद को प्राप्त कर सकता है।

ॐ सच्चिदानंद परब्रह्म

ॐ सत चित आनंद परब्रह्मा

ॐ सच्चिदानंद परब्रह्म
पुरुषोतमा परमात्मा
श्री भगवती समेत:
श्री भगवते नम:

हरी ॐ तत्सत
हरी ॐ तत्सत
हरी ॐ तत्सत
हरी ॐ तत्सत
हरी ॐ तत्सत

Om Sachidananda Parabrahma

Om Sat Chit Ananda Parabrahma

Om Sat Chit Ananda Parabrahma
Purushothama Paramathma
Sri Bhagavathi Sametha
Sri Bhagavathe Namaha

Hari Om Tat Sat
Hari Om Tat Sat
Hari Om Tat Sat
Hari Om Tat Sat
Hari Om Tat Sat 

-सबसे शक्तिमान परमऊर्जा का आवाहन कर रहें हैं हम

सत – अर्थात सत्य (True) – निराकार (अनंत, अरूप, सनातन अस्तित्व)

चित – अर्थात चेतना (Consciousness) – सृष्टि का चेतन तत्व (अनंत ज्ञान स्वरूपा चेतना, सब कुछ का ज्ञान रखने वाली)

आनंद – अर्थात सुखी (Pure Happiness) – पवित्र प्रेम आह्लाद और ख़ुशी

परब्रह्मा – अर्थात (Universal Consciousness) – परम रचेता। पर (Para – उच्चतम या परम), ब्रह्मा (Brahma – दिव्य, ब्रह्माण्डिक या विश्वजन्य), अर्थात परब्रह्मा का अर्थ होता है उच्चतम या परम ब्रह्मा। अनन्त चेतना या परम वास्तविकता

पुरुषोतमा – जो मनुष्य रूप में मनुष्यता का मार्गदर्शन, निदेशन करने के लिए प्रकट हुआ है।

परमात्मा – जो मेरे हृदय में मेरी अंदरूनी(आंतरिक) आवाज़ बन के कभी भी बुलाने पे आ जाता है। (मेरा हृदय ही जिसका वास है, इसीलिए वह वासु है वासुदेव है)

श्री भगवती – दिव्यश्री माँ, शक्ति स्वरूपा पहलू सृष्टि का (प्रकृति और पुरुष इसी से तो सृष्टि है )

समेत – एक साथ अंदर और बाहर भी

श्री भगवते – सृष्टि पिता, मालिक

नम – मैं तुम्हारा धन्यावाद (शुक्रिया, साधुवाद) करता हूँ, इस होने को, आपकी मौजूदगी को मान्य पाता हूँ, तस्दीक करता हूँ, मानता हूँ। तुमसे पथ – प्रदर्शन मिलते रहने की हर दम मांग करता हूँ।

Credit the Video : Bhakti Bharat Ki YouTube Channel

Credit the Video : Simmi Sanatan YouTube Channel

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