Shree Gurudevashtakam | श्री श्री गुरुवाष्टकम् | ଶ୍ରୀ ଗୁରୁଦେବାଷ୍ଟକମ୍: दोस्तों नमस्कार, आज हम आपको इस लेख के जरिए श्री श्री गुरुवाष्टकम् के बारे में बात करेंगे। श्री गुरुवाष्टकम जो इस्कॉन (ISKCON) परंपरा में गाई जाने वाली अत्यंत लोकप्रिय प्रार्थना है। श्रीमद विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर द्वारा रचित यह स्तोत्र, आध्यात्मिक गुरु के आठ (8) गुणों का वर्णन करता है। जिनका नियमित पाठ शिष्य के लिए अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है।
श्री श्री गुरुवाष्टकम्
संसार – दावानल – लीढ – लोक – त्राणाय कारुण्य – घनाघनत्वम् ।
प्राप्तस्य कल्याण – गुणार्णवस्य वन्दे गुरोः श्रीचरणारविन्दम् ॥ १ ॥
महाप्रभोः कीर्तन – नृत्य – गीत – वादित्र – माद्यन् – मनसो रसेन ।
रोमांच – कम्पाश्रु – तरंग – भाजो वन्दे गुरोः श्रीचरणारविन्दम् ॥ २ ॥
श्री – विग्रहाराधन – नित्य – नाना – श्रृंगार – तन् – मन्दिर – मार्जनादौ ।
युक्तस्य भक्तांश्च नियुजतोऽपि वन्दे गुरोः श्रीचरणारविन्दम् ॥ ३ ॥
चतुर्विध – श्रीभगवत् – प्रसाद – स्वाद्वन्न तृप्तान् हरि – भक्त – संधान ।
कृत्वैव तृप्तिं भजतः सदैव वन्दे गुरोः श्रीचरणारविन्दम् ॥ ४ ॥
श्रीराधिका – माधवयोरपार – माधुर्य – लीला – गुण – रुप – नाम्नाम् ।
प्रतिक्षणास्वादन – लोलुपस्य वन्द गुरोः श्रीचरणारविन्दम् ॥ ५ ॥
निकुंज – यूनो रति – केलि – सिद्धयै या यालिभिर् युक्तिर् अपेक्षणीया ।
तत्राति – दक्ष्याद् अति – वल्लभस्य वन्दे गुरोः श्रीचरणारविन्दम् ॥ ६ ॥
साक्षाद – धरित्वेन समस्त शास्त्रर् उक्तस् तथा भाव्यत एवं सद्भिः ।
किन्तु प्रभोर् यः प्रिय एवं तस्य वन्दे गुरोः श्रीचरणारविन्दम् ॥ ७ ॥
यस्य प्रसादाद् भगवत् प्रसादो यस्या प्रसादान् न गातिः कुतोऽपि ।
ध्यायन् स्तुवंस् तस्य यशस् त्रि – सन्ध्यं वन्दे गुरोः श्रीचरणारविन्दम् ॥ ८ ॥
फलश्रुति: जो व्यक्ति ब्रह्म मुहूर्त में उठकर ध्यान से इस सुंदर प्रार्थना का पाठ करता है, उसे अपनी मृत्यु के समय वृंदावन के स्वामी कृष्ण की प्रत्यक्ष सेवा प्राप्त होती है।
Shree Gurudevashtakam
Samsara-Davanala-Lidha-Lokatranaya
Karunya-Ghanaghanatvam
Praptasya Kalyana-Gunarnavasya
Vande Guroh Sri-Charanaravindam ॥ 1 ॥
Mahaprabhoh Kirtana-Nritya-Gitavaditra-
Madyan-Manaso Rasena
Romancha-Kampashru-Taranga-Bhajo
Vande Guroh Sri-Charanaravindam ॥ 2 ॥
Sri-Vigraharadhana-Nitya-Nanashringara-
Tan-Mandira-Marjanadau
Yuktasya Bhaktams Cha Niyunjato Pi
Vande Guroh Sri-Charanaravindam ॥ 3 ॥
Chatur-Vidha-Sri-Bhagavat-Prasadasvadv-
Anna-Triptan Hari-Bhakta-Sanghan
Kritvaiva Triptim Bhajatah Sadaiva
Vande Guroh Sri-Charanaravindam ॥ 4 ॥
Sri-Radhika-Madhavayor Aparamadhurya-
Lila Guna-Rupa-Namnam
Prati-Kshanasvadana-Lolupasya
Vande Guroh Sri-Charanaravindam ॥ 5 ॥
Nikunja-Yuno Rati-Keli-Siddhyai
Ya Yalibhir Yuktir Apekshaniya
Tatrati-Dakshyad Ati-Vallabhasya
Vande Guroh Sri-Charanaravindam ॥ 6 ॥
Sakshad-Dharitvena Samasta-Shastrair
Uktas Tatha Bhavyata Eva Sadbhih
Kintu Prabhor Yah Priya Eva Tasya
Vande Guroh Sri-Charanaravindam ॥ 7 ॥
Yasya Prasadad Bhagavat-Prasado
Yasyaprasadan Na Gatih Kuto Pi
Dhyayan Stuvams Tasya Yashas Tri-Sandhyam
Vande Guroh Sri-Charanaravindam ॥ 8 ॥
ଶ୍ରୀ ଗୁରୁଦେବାଷ୍ଟକମ୍
ସଂସାରଦାବାନଲଲୀଢଲୋକ
ତ୍ରାଣାୟ କାରୁଣ୍ୟଘନାଘନତ୍ଵମ୍ ।
ପ୍ରାପ୍ତସ୍ୟ କଲ୍ୟାଣଗୁଣାର୍ଣବସ୍ୟ
ବନ୍ଦେ ଗୁରୋଃ ଶ୍ରୀଚରଣାରବିନ୍ଦମ୍ ॥ ୧॥
ମହାପ୍ରଭୋଃ କୀର୍ତନନୃତ୍ୟଗୀତ
ବାଦିତ୍ରମଦ୍ୟନ୍ମନସୋ ରସେନ ।
ରୋମାଞ୍ଚକମ୍ପାଶ୍ରୁତରଙ୍ଗଭାଜୋ
ବନ୍ଦେ ଗୁରୋଃ ଶ୍ରୀଚରଣାରବିନ୍ଦମ୍ ॥ ୨॥
ଶ୍ରୀବିଗ୍ରହାରାଧନନିତ୍ୟନାନା
ଶୃଙ୍ଗାରତନ୍ମନ୍ଦିରମାର୍ଜନାଦୌ ।
ୟୁକ୍ତସ୍ୟ ଭକ୍ତାଂଶ୍ଚ ନିୟୁଞ୍ଜତୋଽପି
ବନ୍ଦେ ଗୁରୋଃ ଶ୍ରୀଚରଣାରବିନ୍ଦମ୍ ॥ ୩॥
ଚତୁର୍ବିଧଶ୍ରୀଭଗବତ୍ପ୍ରସାଦ
ସ୍ଵାଦ୍ଵନ୍ନତୃପ୍ତାନ୍ ହରିଭକ୍ତସଙ୍ଘାନ୍ ।
କୃତ୍ଵୈବ ତୃପ୍ତିଂ ଭଜତଃ ସଦୈବ
ବନ୍ଦେ ଗୁରୋଃ ଶ୍ରୀଚରଣାରବିନ୍ଦମ୍ ॥ ୪॥
ଶ୍ରୀରାଧିକାମାଧବୟୋରପାର
ମାଧୁର୍ୟଲୀଲାଗୁଣରୂପନାମ୍ନାମ୍ ।
ପ୍ରତିକ୍ଷଣାସ୍ଵାଦନଲୋଲୁପସ୍ୟ
ବନ୍ଦେ ଗୁରୋଃ ଶ୍ରୀଚରଣାରବିନ୍ଦମ୍ ॥ ୫॥
ନିକୁଞ୍ଜୟୂନୋ ରତିକେଲିସିଦ୍ଧ୍ୟୈ
ୟା ୟାଲିଭିର୍ୟୁକ୍ତିରପେକ୍ଷଣୀୟା ।
ତତ୍ରାତିଦାକ୍ଷ୍ୟାଦତିବଲ୍ଲଭସ୍ୟ
ବନ୍ଦେ ଗୁରୋଃ ଶ୍ରୀଚରଣାରବିନ୍ଦମ୍ ॥ ୬॥
ସାକ୍ଷାଦ୍ଧରିତ୍ଵେନ ସମସ୍ତଶାସ୍ତ୍ରୈ-
ରୁକ୍ତସ୍ତଥା ଭାବ୍ୟତ ଏବ ସଦ୍ଭିଃ ।
କିନ୍ତୋ ପ୍ରଭୋର୍ୟଃ ପ୍ରିୟ ଏବ ତସ୍ୟ
ବନ୍ଦେ ଗୁରୋଃ ଶ୍ରୀଚରଣାରବିନ୍ଦମ୍ ॥ ୭॥
ୟସ୍ୟ ପ୍ରସାଦାଦ୍ଭଗବତ୍ପ୍ରସାଦୋ
ୟସ୍ୟାପ୍ରସାଦାନ୍ ନ ଗତିଃ କୁତୋଽପି ।
ଧ୍ୟାୟନ୍ ସ୍ତୁବଂସ୍ତସ୍ୟ ୟଶସ୍ତ୍ରିସନ୍ଧ୍ୟଂ
ବନ୍ଦେ ଗୁରୋଃ ଶ୍ରୀଚରଣାରବିନ୍ଦମ୍ ॥ ୮॥
ଶ୍ରୀମଦ୍ଗୁରୋରଷ୍ଟକମେତଦୁଚ୍ଚୈ-
ର୍ବ୍ରାହ୍ମେ ମୁହୂର୍ତେ ପଠତି ପ୍ରୟତ୍ନାତ୍ ।
ୟସ୍ତେନ ବୃନ୍ଦାବନନାଥ ସାକ୍ଷାତ୍
ସେବୈବ ଲଭ୍ୟା ଜୁଷଣୋଽନ୍ତ ଏବ ॥ ୯॥
Credit the Video: aaksi utkal by Pratap Chandra Tripathy YouTube Channel
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