29.1 C
Bhubaneswar
April 29, 2026
Blog

शिवलिंग पर कितने बेलपत्र चढ़ाने चाहिए?

शिवलिंग पर कितने बेलपत्र चढ़ाने चाहिए?

आदि देव महादेव काे धरती लोक में शिवलिंग के रूप में पूजा जाता है। बेलपत्र आदि देव महादेव को सबसे प्रिय है। इसे पुष्प की श्रेणी में रखा जा सकता है। बेलपत्र एक औषधिय वृक्ष है। इसके पत्तों का सेवन करने से गंभीर रोगों से निजात पाया जा सकता है। आज का लेख बेलपत्र से संबंधित है। पोस्ट के जरिए हम जानेंगे कि, शिवलिंग पर कितने बेलपत्र चढ़ाने चाहिए और बेलपत्र चढ़ाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए तथा कौन मन्त्र का जाप करना चाहिए।

शिवलिंग पर कितने बेलपत्र चढ़ाने चाहिए (shivling par kitne belpatra chadhana chahie)

हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार शिवलिंग पर 3 से लेकर 11 बेलपत्र चढ़ाने का नियम है। ध्यान रहे कि, बेलपत्र को चिकनी परत की तरफ से ही शिवलिंग पर चड़ाया जाता है। आदि शंकर की आरधना में बेलपत्र की भूमिका बहुत ही अत्यधिक है साथ ही दूध और जल को भी पूजन में शामिल करना जरुरी है। पर इसे चढ़ाते समय की बातों का ध्यान भी रखना होता है।

जैसे बेलपत्र तीन पत्तियों से कम का नहीं होना चाहिए इससे अधिक का हो तो बहुत ही शुभ है। बिना धारियों वाला बेलपत्र ही शिव जी को चढ़ाना चाहिए। इसे हमेशा स्वच्छ पानी से साफ करने के बाद ही चढ़ाया जाता है। बेलपत्र को चढ़ाने के पूर्व इसे दूध में धो ले फिर गंगाजल में डूबने के बाद भगवान शंकर को अर्पण करें।

इसे भी पढ़ेंः चार मुखी रुद्राक्ष की पहचान

ध्यान रहे कि, किसी भी तरह से कटा फटा बेलपत्र नहीं चढ़ाना चाहिए। ऐसे बेलपत्र चढाना वर्जित होता है। क्योंकि इस तरह के कटे फाटे पत्तो वाले बेलपत्र को खंडित माना जाता है। आपको बेलपत्र चढ़ाते समय त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रिधायुतम् त्रिजन्मपापसंहारं बिल्वपत्रं शिवार्पणम् मन्त्र का जाप करना चाहिए।

शंकर भगवान की पूर्ण निष्ठा से आराधना करने से आपकी सारी मनोकामनाए पूर्ण होती है। इतना ही नहीं मनुष्य जीवन में सुख समृद्धि बनी रहती है। आपके सारे कष्ट भगवान भोलेनाथ हर लेते हैं।

नोट : शिवलिंग पर कितने बेलपत्र चढ़ाने- हिंदू धर्म ग्रंथों को पढ़ने के बाद समायोजित कर लिखा गया। भक्ति भारत की वेबसाइट का इससे सीधा कोई संबंध नहीं है। पूजन और बेलपत्र चढ़ाने को लेकर यदि आपके मन में कोई शंका हैं तो पहले उसका निदान करें।

कुछ और महत्वपूर्ण लेख:

Hari Sharanam
नित्य स्तुति और प्रार्थना
Om Damodarai Vidmahe
Rog Nashak Bishnu Mantra
Dayamaya Guru Karunamaya

Related posts

अवधेशानंद गिरी महाराज: जीवन को समझने और नकारात्मक विचारों को दूर करने की प्रेरणा

Bimal Kumar Dash

आज का सूर्य ग्रहण: 122 साल बाद दुर्लभ खगोलीय घटना, राशियों पर असर

Bimal Kumar Dash

एक नज़र, एक मुस्कान: वृंदावन का आध्यात्मिक रहस्य

Bimal Kumar Dash