Amarnath Ashtakam | श्री अमरनाथाष्टकम्: दोस्तों नमस्कार, आज हम आप लोगों को इस पोस्ट के माध्यम से श्री अमरनाथाष्टकम् के बारे में बताएँगे। सबसे पहले भगवान शिव और माँ पार्वती को मैं नमन करता हूँ।
पौराणिक कथाओं में वर्णित है कि एक बार मां पार्वती ने भगवान शिव से पूछा कि आपके अमरत्व का रहस्य क्या है। इस पर महादेव ने माता पार्वती को इस पवित्र अमरनाथ की गुफा में अमरत्व यानी मोक्ष मार्ग का रहस्य बताया था। इस तत्वज्ञान को ‘अमरकथा’ के नाम से जाना जाता।
Amarnath Ashtakam
श्री अमरनाथाष्टकम्
भागीरथीसलिलसान्द्रजटाकलापम्
शीतांशुकान्ति-रमणीय-विशाल-भालम् ।
कर्पूरदुग्धहिमहंसनिभं स्वतोजम्
नित्यं भजाम्यऽमरनाथमहं दयालुम् ॥ १॥
गौरीपतिं पशुपतिं वरदं त्रिनेत्रम्
भूताधिपं सकललोकपतिं सुरेशम् ।
शार्दूलचर्मचितिभस्मविभूषिताङ्गम्
नित्यं भजाम्यऽमरनाथमहं दयालुम् ॥ २॥
गन्धर्वयक्षरसुरकिन्नर-सिद्धसङ्घैः
संस्तूयमानमनिशं श्रुतिपूतमन्त्रैः ।
सर्वत्रसर्वहृदयैकनिवासिनं तम्
नित्यं भजाम्यऽमरनाथमहं दयालुम् ॥ ३॥
व्योमानिलानलजलावनिसोमसूर्य
होत्रीभिरष्टतनुभिर्जगदेकनाथः ।
यस्तिष्ठतीह जनमङ्गलधारणाय
तं प्रार्थयाम्यऽमरनाथमहं दयालुम् ॥ ४॥
शैलेन्द्रतुङ्गशिखरे गिरिजासमेतम्
प्रालेयदुर्गमगुहासु सदा वसन्तम् ।
श्रीमद्गजाननविराजित दक्षिणाङ्कम्
नित्यं भजाम्यऽमरनाथमहं दयालुम् ॥ ५॥
वाग्बुद्धिचित्तकरणैश्च तपोभिरुग्रैः
शक्यं समाकलयितुं न यदीयरूपम् ।
तं भक्तिभावसुलभं शरणं नतानाम्
नित्य भजाम्यऽमरनाथमहं दयालुम् ॥ ६॥
आद्यन्तहीनमखिलाधिपतिं गिरीशम्
भक्तप्रियं हितकरं प्रभुमद्वयैकम् ।
सृष्टिस्थितिप्रलयलीलमनन्तशक्तिम्
नित्यं भजाम्यऽमरनाथमहं दयालुम् ॥ ७॥
हे पार्वतीश वृषभध्वज शूलपाणे
हे नीलकण्ठ मदनान्तक शुभ्रमूर्ते ।
हे भक्तकल्पतरुरूप सुखैकसिन्धो
मां पाहि पाहि भवतोऽमरनाथ नित्यम् ॥ ८॥
। इति स्वामी वरदानन्दभारतीविरचितं श्रीअमरनाथाष्टकं सम्पूर्णम् ।
Credit the Video : Nothing but Shiva YouTube Channel
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