Chaitra Navratri | चैत्र नवरात्रि पूजा: सनातन धर्म और हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हमारे देश में वर्ष में चार बार नबारात्री का त्योहार मनाई जाती हैं, जिनमें आश्विन और चैत्र मास की नवरात्रि सबसे ज्यादा समाज में प्रचलित है। शारदीय नवरात्रि का तारा चैत्र नवरात्रि (वसंत नवरात्रि) से आरंभ हो कर राम नवमी के साथ समाप्त होता है। कहा जाता है कि सतयुग में सबसे ज्यादा प्रसिद्ध और प्रचलित चैत्र नवरात्रि थी, इसी दिन से युग का आरंभ भी माना जाता है।
हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) देवी दुर्गा को समर्पित है। सनातन परंपरा के अनुसार नौ दिनों की पूजा का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि मां दुर्गा को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद पाने के लिए नवरात्रि का समय सबसे श्रेष्ठ समझा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो साधक नियम का पालन करते हुए नवरात्रि के इन नौ दिनो तक अंखड ज्योति जला कर मां दुर्गा का पूजन सच्चे मन से भक्ति करता है उसका बेड़ा पार हो जाता है।
कलश स्थापना और चैत्र नवरात्रि पूजन
हिंदू पंचांग के अनुसार नवरात्रि का व्रत रखने वालों प्रात:काल उठकर स्नान करके सूर्य को अर्घ्य दें । उसके बाद घर के पूजन स्थल को पानी में गंगाजल डालकर सफाई करके पूरे विधि विधान के साथ पूजा अर्चना करनी चाहिए। इसके बाद व्रत संकल्प करें और पूजा घर पर लाल कपड़ा बिछाएं। सबसे पहले ही कलश में जल भरकर कलश स्थापना करके पूजा स्थल पर एक दीप जलाएं। उसके बाद माता की मूर्ति स्थापित करें। इसके बाद कलश के मुख पर कालावा बांधें और फिर ऊपर आम के पत्ते रखकर नारियल रख दें। कलश में सुपारी, अक्षत के पत्ते और एक सिक्का डालें। इसके बाद मां दुर्गा को गंगाजल अर्पित करके अक्षत, सिंदूर, लाल रंग के फूल माता के सामने अर्पित करें। पूजन विधि संपन्न करने के बाद धूप व दीप में मां अम्बे की आरती का पाठ करें। पूजा करते हुए दुर्गा चालीसा का पाठ भी कर सकते हैं। इसके बाद प्रसाद अर्पित कर सबको प्रसाद बांट दें। माना जाता है कि जो कोई भी सच्चे मन से और विधि विधान से मां दुर्गा की आराधना करता है उनकी सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं।
वार के अनुसार:
- सोमवार को घट स्थापना होगी तो – हाथी पर
- मंगलवार को घट स्थापना होगी तो – घोड़े पर
- बुधवार को घट स्थापना होगी तो – नौका पर सवार होकर
- गुरवार को घट स्थापना होगी तो – डोली में बैठकर
- शुक्रवार को घट स्थापना होगी तो – डोली में बैठकर
- शनिवार को घट स्थापना होगी तो – घोड़े पर
सवार होकर आने का शुभ-अशुभ:
गजे च जलदा देवी क्षत्र भंग स्तुरंगमे।
नोकायां सर्वसिद्धि स्या ढोलायां मरणंधुवम्।।-देवी भागवत पुराण
- माता रानी हाथी पर सवार होकर आती हैं तो पानी ज्यादा बरसता है।
- माता रानी घोड़े पर आती हैं तो युद्ध की संभावना रहती है।
- माता रानी नौका पर सवार होकर आती हैं तो सभी की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
- माता रानी डोली में बैठकर आती हैं तो महामारी का भय बना रहता हैं।
हिंदू ऋतुओं और देवी भागवत के अनुसार चार नवरात्रियों का नाम:
- माघ नवरात्रि – शीतकालीन
- चैत्र नवरात्रि – वसंत
- आषाढ़ नवरात्रि – मानसून
- शरद नवरात्रि – शारदीय के नाम पर रखा गया है
Chaitra Navratri Vrat: चैत्र नवरात्रि व्रत
- पहला व्रत मां शैलपुक्षी कू पूजा
- दूसरा व्रत मां ब्रह्मचारिणी की पूजा
- तीसरा व्रत मां चंद्रघंटा की पूजा
- चौथा व्रत मां कूष्मांडा की पूजा
- पांचवा व्रत मां स्कंदमाता की पूजा
- छठा व्रत मां कात्यायनी की पूजा
- सातवां व्रत मां कालरात्रि की पूजा
- आठवां व्रत मां महागौरी की पूजा
- नवमी व्रत मां महागौरी की पूजा, राम नवमी तिथि
*(यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है, इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है)
Disclaimer: Bhakti Bharat Ki / भक्ति भारत की (https://bhaktibharatki.com) वेबसाइट का उद्देश्य किसी की आस्था या भावनाओं को ठेस पहुंचना नहीं है। इस वेबसाइट पर प्रकाशित उपाय, रचना और जानकारी को भिन्न – भिन्न लोगों की मान्यता, जानकारियों के अनुसार और इंटरनेट पर मौजूदा जानकारियों को ध्यान पूर्वक पढ़कर, और शोधन कर लिखा गया है। इस पोस्ट पर दिए गए जानकारी केवल सामान्य ज्ञान और शैक्षिक उद्देश्य के लिए बनाया गया है। यहां यह बताना जरूरी है कि Bhakti Bharat Ki / भक्ति भारत की (https://bhaktibharatki.com) इसमें चर्चा की गई किसी भी तरह जानकारी, मान्यता, सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता की पूर्ण रूप से गारंटी नहीं देते। चैत्र नवरात्रि पूजा का अर्थ और महत्व को अमल में लाने से पहले कृपया संबंधित योग्य विशेषज्ञ अथवा पंड़ित की सलाह अवश्य लें। चैत्र नवरात्रि पूजा का उच्चारण करना या ना करना आपके विवेक पर निर्भर करता है। इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी का उपयोग पूरी तरह से उपयोगकर्ता की अपनी ज़िम्मेदारी पर है। किसी भी प्रकार की हानि, नुकसान, या परिणाम के लिए हम प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार नहीं होंगे।
