Dhanvantari Aarti | धन्वंतरि जी की आरती | धनतेरस आरती | भगवान धन्वंतरि की आरती: दोस्तों नमस्कार, आज हम इस लेख माध्यम से धन्वंतरि जी की आरती (Dhanvantari Aarti) के बारे में बताएंगे। हर साल कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को धनतेरस मनाया जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि हाथ में सोने का अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे।
Dhanvantari Aarti
धनतेरस आरती
धन्वंतरि जी की आरती
जय धन्वंतरि देवा, जय धन्वंतरि जी देवा ।
जरा-रोग से पीड़ित, जन-जन सुख देवा ॥
॥ ॐ जय धन्वन्तरि देवा ॥
तुम समुद्र से निकले, अमृत कलश लिए ।
देवासुर के संकट आकर दूर किए ॥
॥ ॐ जय धन्वन्तरि देवा ॥
आयुर्वेद बनाया, जग में फैलाया ।
सदा स्वस्थ रहने का, साधन बतलाया ॥
॥ ॐ जय धन्वन्तरि देवा ॥
भुजा चार अति सुंदर, शंख सुधा धारी ।
आयुर्वेद वनस्पति से शोभा भारी ॥
॥ ॐ जय धन्वन्तरि देवा ॥
तुम को जो नित ध्यावे, रोग नहीं आवे ।
असाध्य रोग भी उसका, निश्चय मिट जावे ॥
॥ ॐ जय धन्वन्तरि देवा ॥
हाथ जोड़कर प्रभुजी, दास खड़ा तेरा ।
वैद्य-समाज तुम्हारे चरणों का घेरा ॥
॥ ॐ जय धन्वन्तरि देवा ॥
धन्वंतरिजी की आरती जो कोई नर गावे ।
रोग-शोक न आए, सुख-समृद्धि पावे ॥
॥ ॐ जय धन्वन्तरि देवा ॥
Credit the Video : Glare Music Bhakti YouTube Channel
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