Jai Ram Rama Ramanam Samanam | जय राम रमा रमनं समनं: दोस्तों नमस्कार, आज हम आप लोगों को इस पोस्ट के माध्यम से जय राम रमा रमनं समनं मंत्र के बारे में बताएँगे। यह स्तुति भगवान शिव द्वारा प्रभु राम के अयोध्या वापस आपने के उपलक्ष्य में गाई गई है। जिसके अंतर्गत सभी ऋषिगण, गुरु, कुटुम्बी एवं अयोध्या वासी कैसे अधीर हो कर अपने प्रभु रूप राजा राम की प्रतीक्षा कर रहे हैं। तथा श्री राम के आगमन पर कैसे सभी आनन्दित हैं, श्रीराम अपने महल को चलते है, आकाश से फूलों की वृष्टि होरही है। सब का वर्णन है इस स्तुति में। तो आइये सुमिरन करते हैं जय राम रमा रमनं समनं:
जय राम रमा रमनं समनं
॥ छन्द: ॥
जय राम रमा रमनं समनं ।
भव ताप भयाकुल पाहि जनम ॥
अवधेस सुरेस रमेस बिभो ।
सरनागत मागत पाहि प्रभो ॥
राजा राम, राजा राम,
सीता राम, सीता राम ॥
दससीस बिनासन बीस भुजा ।
कृत दूरी महा महि भूरी रुजा ॥
रजनीचर बृंद पतंग रहे ।
सर पावक तेज प्रचंड दहे ॥
राजा राम, राजा राम,
सीता राम, सीता राम ॥
महि मंडल मंडन चारुतरं ।
धृत सायक चाप निषंग बरं ॥
मद मोह महा ममता रजनी ।
तम पुंज दिवाकर तेज अनी ॥
राजा राम, राजा राम,
सीता राम, सीता राम ॥
मनजात किरात निपात किए ।
मृग लोग कुभोग सरेन हिए ॥
हति नाथ अनाथनि पाहि हरे ।
बिषया बन पावँर भूली परे ॥
राजा राम, राजा राम,
सीता राम, सीता राम ॥
बहु रोग बियोगन्हि लोग हए ।
भवदंघ्री निरादर के फल ए ॥
भव सिन्धु अगाध परे नर ते ।
पद पंकज प्रेम न जे करते॥
राजा राम, राजा राम,
सीता राम, सीता राम ॥
अति दीन मलीन दुखी नितहीं ।
जिन्ह के पद पंकज प्रीती नहीं ॥
अवलंब भवंत कथा जिन्ह के ।
प्रिय संत अनंत सदा तिन्ह के ॥
राजा राम, राजा राम,
सीता राम, सीता राम ॥
नहीं राग न लोभ न मान मदा ।
तिन्ह के सम बैभव वा बिपदा ॥
एहि ते तव सेवक होत मुदा ।
मुनि त्यागत जोग भरोस सदा ॥
राजा राम, राजा राम,
सीता राम, सीता राम ॥
करि प्रेम निरंतर नेम लिएँ ।
पड़ पंकज सेवत सुद्ध हिएँ ॥
सम मानि निरादर आदरही ।
सब संत सुखी बिचरंति मही ॥
राजा राम, राजा राम,
सीता राम, सीता राम ॥
मुनि मानस पंकज भृंग भजे ।
रघुबीर महा रंधीर अजे ॥
तव नाम जपामि नमामि हरी ।
भव रोग महागद मान अरी ॥
राजा राम, राजा राम,
सीता राम, सीता राम ॥
गुण सील कृपा परमायतनं ।
प्रणमामि निरंतर श्रीरमनं ॥
रघुनंद निकंदय द्वंद्वघनं ।
महिपाल बिलोकय दीन जनं ॥
राजा राम, राजा राम,
सीता राम, सीता राम ॥
॥ दोहा: ॥
बार बार बर मागऊँ हरषी देहु श्रीरंग।
पद सरोज अनपायनी भगति सदा सतसंग॥
बरनि उमापति राम गुन हरषि गए कैलास।
तब प्रभु कपिन्ह दिवाए सब बिधि सुखप्रद बास
Jai Ram Rama Ramanam Samanam
Jay Raam Ramaa Ramanam Shamanam
॥ Chhand: ॥
Jay Raam Ramaa Ramanam Shamanam ।
Bhav Taap Bhayaakul Paahi Janam ॥
Aavadhes Sures Rames Vibho ।
Sharanaagat Maangat Paahi Prabho ॥
Raja Ram, Raja Ram,
Sita Ram, Sita Ram ॥
Dasasiis Vinaasan Biis Bhujaa ।
Krit Duuri Mahaa Mahi Bhuuri Rujaa ॥
Rajanichar Brind Patang Rahe ।
Sar Paavak Tej Prachand Dahe ॥
Raja Ram, Raja Ram,
Sita Ram, Sita Ram ॥
Mahi Mandal Mandan Chaarutaram ।
Dhrit Saayak Chaap Nishang Varam ॥
Mad Moh Mahaa Mamata Rajani ।
Tam Punj Divaakar Tej Anii ॥
Raja Ram, Raja Ram,
Sita Ram, Sita Ram ॥
Manajaat Kiraat Nipaat Kiye ।
Mrig Log Kubhog Saren Hiye ॥
Hati Naath Anaathani Paahi Hare ।
Vishhayaa Ban Paanvar Bhuuli Pare ॥
Raja Ram, Raja Ram,
Sita Ram, Sita Ram ॥
Bahu Rog Biyoginhi Log Haye ।
Bhavadanghri Niraadar Ke Phal E ॥
Bhav Sindhu Agaadh Pare Nar Te ।
Pad Pankaj Prem N Je Karate ॥
Raja Ram, Raja Ram,
Sita Ram, Sita Ram ॥
Ati Diin Maliin Duhkhii Nitahiin ।
Jinh Ken Pad Pankaj Priit Nahiin ॥
Avalamb Bhavant Kathaa Jinh Ken ।
Priya Sant Anant Sadaa Tinh Ken ॥
Raja Ram, Raja Ram,
Sita Ram, Sita Ram ॥
Nahin Raag N Lobh N Maan Madaa ।
Tinh Ken Sam Baibhav Vaa Bipadaa ॥
Ehi Te Tav Sevak Hot Mudaa ।
Muni Tyaagat Jog Bharos Sadaa ॥
Raja Ram, Raja Ram,
Sita Ram, Sita Ram ॥
Kari Prem Nirantar Nem Liyen ।
Pad Pankaj Sevat Shuddh Hiyen ॥
Sam Maani Niraadar Aadarahii ।
Sab Sant Sukhii Bicharanti Mahii ॥
Raja Ram, Raja Ram,
Sita Ram, Sita Ram ॥
Muni Maanas Pankaj Bhring Bhaje ।
Raghuviir Mahaa Ranadhiir Aje ॥
Tav Naam Japaami Namaami Harii ।
Bhav Rog Mahaamad Maan Arii ॥
Raja Ram, Raja Ram,
Sita Ram, Sita Ram ॥
Gun Siil Ripaa Paramaayatanam ।
Pranamaami Nirantar Shriiramanam ॥
Raghunand Nikanday Dvandv Ghanam ।
Mahipaal Bilokay Diin Janam ॥
Raja Ram, Raja Ram,
Sita Ram, Sita Ram ॥
॥ Doha:॥
Baar Baar Bar Magoun Harshi Dehu Shrirang ।
Pad Saroj Anpayani Bhagti Sada Satsang ॥
Barani Umapati Ram Gun Harshi Gaye Kailash ।
Tab Prabhu Kapinh Dibaye Saba Bidhi Sukhprad Bas ॥
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