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June 12, 2026
Mantra

Karagre Vasate Laxmi | प्रातःकाल के मंत्र कराग्रे वसते लक्ष्मी | କରାଗ୍ରେ ବସତି ଲକ୍ଷ୍ମୀ

Karagre Vasate Laxmi

Karagre Vasate Laxmi | प्रातःकाल के मंत्र कराग्रे वसते लक्ष्मी | କରାଗ୍ରେ ବସତି ଲକ୍ଷ୍ମୀ: दोस्तों नमस्कार, आज हम आपको इस लेख के जरिए प्रातःकाल के मंत्र कराग्रे वसते लक्ष्मी के बारे में बात करेंगे। कराग्रे वसते लक्ष्मी (Karagre Vasate Laxmi’s) मंत्र मूल रूप से विष्णु पुराण का एक श्लोक है। विष्णु पुराण और भारतीय ऋषि-मुनियों के अनुसार दिन का आरंभ शुभ हो इसलिए जब आप सुबह नींद से जागें तो अपनी करदर्शनम यानी हथेलियों का दर्शन करें। काराग्रे वसते लक्ष्मी मंत्र देवी लक्ष्मी, देवी सरस्वती और भगवान विष्णु को समर्पित है। हाथ के अग्रभाग में भगवती लक्ष्मी का निवास है, मध्य भाग में विद्यादात्री सरस्वती और मूल भाग में भगवान विष्णु का निवास है। देवी लक्ष्मी धन की प्रदाता हैं, देवी सरस्वती बुद्धि की दाता हैं और भगवान विष्णु समृद्धि के दाता हैं। इसलिए हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि ऐसे कर्म करें जिससे जीवन में धन, सुख और ज्ञान प्राप्त कर सकें। हमारे हाथों से कोई बुरा काम न हो एवं दूसरों की मदद के लिए हमेशा हाथ आगे बढ़ें। सुबह के समय बोलें ये शक्तिशाली मंत्र कराग्रे वसते लक्ष्मी।

Karagre Vasate Laxmi

॥ Karagre Vasate Laxmi ॥

Karaagre Vasate Lakshmi, Karamadhye Saraswati ।
Karamoole Tu Govinda, Prabhaate Karadarshanam ॥

Karagre Vasate Lakshmi, Karamadhye Sarasvati ।
Karamule Sthita Gauri, Prabhate Karadarshanam ॥

Samudravasane Devi, Parvata Statanmandale ।
Visnupatni Namastubhyam, Padasparsam Ksamasva Me ॥

प्रातःकाल के मंत्र कराग्रे वसते लक्ष्मी

॥ कराग्रे वसते लक्ष्मी ॥

कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती ।
करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम ॥

अपनी आँखें बंद करें, अपने दोनों हाथों को जोड़ें, इसके बाद आप मंत्र का उच्चारण करें।

कराग्रे वसते लक्ष्मी, करमध्ये सरस्वती।
करमूले स्थिता गौरी, प्रभाते करदर्शनम्॥

समुद्रवासने देवी, पर्वत स्तनमण्डले।
विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यं, पादस्पर्शं क्षमस्व मे॥

କରାଗ୍ରେ ବସତି ଲକ୍ଷ୍ମୀ 

॥ କରାଗ୍ରେ ବସତି ଲକ୍ଷ୍ମୀ ମନ୍ତ୍ର ॥

କରାଗ୍ରେ ବସତି ଲକ୍ଷ୍ମୀ କରମଧ୍ୟେ ସରସ୍ୱତୀ ।
କରମୂଳେ ତୁ ଗୋବିନ୍ଦଃ ପ୍ରଭାତେ କରଦର୍ଶନ ॥

मंत्र का अर्थ:

मैं अपनी उंगलियों पर ध्यान केंद्रित करता हूं (कारा: हाथ; आगरा: ऊपर / टिप) जाह्ना देवी लक्ष्मी निवास करती हैं
मैं अपनी हथेलियों के केंद्र पर ध्यान केंद्रित करता हूं (कारा: हाथ, मध्य: मध्य) जाह्ना देवी सरस्वती निवास करती हैं
मैं अपनी हाथ के आधार पर (कारा: हाथ, मूल: नीचे) जाह्ना भगवान विष्णु निवास करते हैं

कर-Kara हस्त-Hand
अग्रे-Agre अग्र भाग-Beginning of the hand
वसते-Vasate वास है-Resides
लक्ष्मी-Lakshmi मां लक्ष्मी-Deity of Wealth-Goddess Lakshmi
कराग्रे वसते लक्ष्मी: अर्थात् हस्त के ऊपरी भाग में मां लक्ष्मी का वास है।
करमध्ये-Kara-Madhye हस्त के मध्य-In the middle of Hand
सरस्वती-Saraswati मां सरस्वती-Deity of Knowledge-Goddess Saraswati
करमध्ये सरस्वती: अर्थात् हस्त के मध्य में मां सरस्वती का वास है।
करमूले-Kara-Moole हस्त के मूल-In the base of the hand
तू-Tu बैठना-Sit
गोविंद-Govinda विष्णु-Deity of Prosperity-Lord Vishnu
करमूले तु गोविंद: अर्थात् हस्त के मूल में प्रभु विष्णु आपश्री उपस्थित हैं।
प्रभाते-Prabhaate सुबह में-In the Morning
करदर्शनम-Karadarshanam हाथों के दर्शन-Seeing
प्रभाते करदर्शनम: अर्थात् सुप्रभात समय में हस्त दर्शन कर मैं आपका स्मरण कर प्रणाम करता हूं।
इसलिए हमें प्रत्येक सुबह सर्वप्रथम अपनी हथेली देखकर यह श्लोक अवश्य पढ़ना चाहिए ।

कर दर्शन करने का यह फायदा :

  • इससे आपकी आंखों की रोशनी धीरे-धीरे स्थिर हो जाती है।
  • यह मंत्र आपको सकारात्मक चिंता प्रदान करता है।
  • यह मंत्र आपको आत्मविश्वास प्रदान करता है।
  • यह मंत्र को प्रति दिन की शानदार शुरुआत प्रदान करता है।
  • सात्विक कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करता है।

Credit the Video : Rajshri Soul YouTube Channel

Credit the Video : Bal Sanskar Kendra – Odia YouTube Channel

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