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April 19, 2024
Chalisa

Shri Giriraj Chalisa | श्री गिरिराज चालीसा

Credit the Video: Brijwani Cassettes YouTube Channel

Shri Giriraj Chalisa

Badahu vina vadini, dhari Ganpati ko dhyan,
Mahashakti Radha, sahit Krishna karo kalyan;

Sumiran kari sab devgan, guru pitu barambar,
Barnau Shri Giriraj yash, nij mati ke anusar.

Jai ha jai bandit Giri raja,
braj mandal ke Shri maharaja,

Vishnu roop tum ho avtari,
sundarta pai jag balihari,

Surna shikhar aati sobha paave,
sur muni gan darshan ko aave,

Shant kandara swarg samana,
jaha tapasvi dharte dhayana,

Drongiri ke tum yuvraja,
bhaktan ke sadho ho kaja,

Muni Pulastayji ke man bhaye,
jor vinay kar tum koo laaye,

Munivar sangh jab braj mein aaye,
lakhi brajbhumi yaha thahraye,

Vishnu dham gaulok suhavan,
Yamuna Govardhan Vrindavan,

Dekh dev man mein lalchaye,
vaas karan bahut roop banaye,

Kou banar kou mrug ke roopa,
kou vruksh kou lata swarupa,

Anand le gaulok dham ke,
param upasak roop naam ke,

Dwapar aant bhaye avtari,
Krishnachandra anand murari,

Mahima tumhari Krishna bhakhani,
puja karibe ki man thani,

Brijwasi sabke liye bulai,
Govardhan puja karvai,

Poojan ku vyanjan banvaye,
Brajwasi ghar-ghar te laye,

Gwal baal mili puja kini,
sahas bhuja tumne kar lini,

Swayam pragat ho krishna puja mein,
mang-mang ke bhojan paave,

Lakhi nar-nari man harsave,
jai jai jai Girivar gun gave,

Devraj man mein risiyaye,
nast karan Braj medh bulaye,

Chaya kar braj liyo bachaye,
ekau bund na niche aaye,

Saat divas bhai barsa bhari,
thake medh bhari jaal dhari,

Krishnachandra ne nakh pe dhare,
namo namo braj ke rakhware,

Kari abhiman thake sursai,
kshma mang puni astuti gayi,

Trahi mam mein sharan tihari,
kshma karo prabhu chuk hamari,

Bar-bar binati aati kini,
saat kosh parikrama dini,

Sang Shurabhi Aairavat laye,
hath jodkar bhet gahaye,

Abhay daan pa Indra sihaye,
kari pranam nij lok sidhave;

Jo yah katha suno chitt lave,
ant samay surpati pad pave;

Govardhan hai naam tiharo,
karate bhaktan ko nistaro;

Jo nar tumhare darshan pave,
tinke dukh dur ho jave;

Kundan mein jo kare aachman,
dhanya dhanya vah manav jeevan;

Mansi Ganga mein jo nahave,
sidhe swarg lok ku jave;

Dudh chadha jo bhog lagave,
aadhi-vyadhi tehi pas na aave,

Jal phal tulsi patra chadhave,
man vanchit phal nischit pave,

Jo nar det dudh ki dhara,
Bharo rahe tako bhandara,

Kare jagran jo nar koi,
dukh daridra bhay tahi na hoi,

Shyam shilamai nij jan trata,
bhakti mukti sarbas ke data,

Putra hin jo tum ko dhyave,
taku putra prapti ho jave,

Dandoti, parikrama karahi,
te sahjahi bhavsagar tarahi,

Kali mein tum sam dev na duja,
sur nar muni sab karte puja;

Jo yah chalisa padhe
sune sugh chit lay;

Satya satya yah satya hai,
Girivar kare sahay;

Kshma karahu apradh mama,
trahi mam Giriraj;

Shyam Bihari sharan mein,
Govardhan Maharaj.

श्री गिरिराज चालीसा

॥ दोहा ॥

बन्दहुँ वीणा वादिनी,
धरि गणपति को ध्यान ।
महाशक्ति राधा सहित,
कृष्ण करो कल्याण ॥ १ ॥

सुमिरन करि सब देवगण,
गुरु पितु बारम्बार ।
बरनो श्री गिरिराज यश,
निज मति के अनुसार ॥ २ ॥

॥ चौपाई ॥

जय हो जय बंदित गिरिराजा ।
ब्रज मण्डल के आप हो महाराजा ॥ १ ॥

विष्णु रूप तुम हो अवतारी ।
सुन्दरता पे जग बलिहारी ॥ २ ॥

स्वर्ण शिखर अति शोभा पावें ।
सुर मुनि गण दरशन कूं आवें ॥ ३ ॥

शांत कंदरा स्वर्ग समाना ।
जहाँ तपस्वी धरते ध्याना ॥ ४ ॥

द्रोणगिरि के तुम युवराजा ।
भक्तन के साधौ तुम काजा ॥ ५ ॥

मुनि पुलस्त्य जी के मन भाये ।
जोर विनय कर तुम कूं लाये ॥ ६ ॥

मुनिवर संघ जब ब्रज में आये ।
लखि ब्रजभूमि यहाँ ठहराये ॥ ७ ॥

विष्णु धाम गौलोक सुहावन ।
यमुना गोवर्धन वृन्दावन ॥ ८ ॥

देख देव मन में ललचाये ।
बास करन बहुत रूप बनाये ॥ ९ ॥

कोउ बानर कोउ मृग के रूपा ।
कोउ वृक्ष कोउ लता स्वरूपा ॥ १० ॥

आनन्द लें गौलोक धाम के ।
परम उपासक रूप नाम के ॥ ११ ॥

द्वापर अंत भये अवतारी ।
कृष्णचन्द्र आनन्द मुरारी ॥ १२ ॥

महिमा तुम्हरी कृष्ण बखानी ।
पूजा करिबे की मन ठानी ॥ १३ ॥

ब्रजवासी सब के लिये बुलाई ।
गोवर्धन पूजा करवाई ॥ १४ ॥

पूजन को व्यंजन बनवाये ।
ब्रजवासी घर घर से लाये ॥ १५ ॥

ग्वाल बाल मिलि पूजा कीनी ।
सहस भुजा तुमने कर लीनी ॥ १६ ॥

स्वयं प्रकट हो कृष्ण पूजा में ।
मांग मांग के भोजन पावें ॥ १७ ॥

लखि नर नारि मन हरषावें ।
जै जै जै गिरिवर गुण गावें ॥ १८ ॥

देवराज मन में रिसियाए ।
नष्ट करन ब्रज मेघ बुलाए ॥ १९ ॥

छाया कर ब्रज लियो बचाई ।
एकउ बूंद न नीचे आई ॥ २० ॥

सात दिवस भई बरसा भारी ।
थके मेघ भारी जल धारी ॥ २१ ॥

कृष्णचन्द्र ने नख पे धारे ।
नमो नमो ब्रज के रखवारे ॥ २२ ॥

करि अभिमान थके सुरसाई ।
क्षमा मांग पुनि अस्तुति गाई ॥ २३ ॥

त्राहि माम मैं शरण तिहारी, ।
क्षमा करो प्रभु चूक हमारी ॥ २४ ॥

बार बार बिनती अति कीनी,
सात कोस परिकम्मा दीनी ॥ २५ ॥

संग सुरभि ऐरावत लाये ।
हाथ जोड़ कर भेंट चढाये ॥ २६ ॥

अभय दान पा इन्द्र सिहाये ।
करि प्रणाम निज लोक सिधाये ॥ २७ ॥

जो यह कथा सुने चित लावें ।
अन्त समय सुरपति पद पावैं ॥ २८ ॥

गोवर्धन है नाम तिहारौ ।
करते भक्तन को निस्तारौ ॥ २९ ॥

जो नर तुम्हरे दर्शन पावें ।
तिनके दु:ख दूर हो जावे ॥ ३० ॥

कुण्डन में जो करें आचमन ।
धन्य धन्य वह मानव जीवन ॥ ३१ ॥

मानसी गंगा में जो नहावे ।
सीधे स्वर्ग लोक को जावें ॥ ३२ ॥

दूध चढ़ा जो भोग लगावें ।
आधि व्याधि तेहि पास न आवें ॥ ३३ ॥

जल फल तुलसी पत्र चढ़ावें,
मन वांछित फल निश्चय पावें ॥ ३४ ॥

जो नर देत दूध की धारा ।
भरा रहे ताके भण्डारा ॥ ३५ ॥

करे जागरण जो नर कोई ।
दु:ख दरिद्र भय ताहि न होई ॥ ३६ ॥

श्याम शिलामय निज जन त्राता ।
भक्ति मुक्ति सरबस के दाता ॥ ३७ ॥

पुत्रहीन जो तुम को ध्यावें ।
ताकूं पुत्र प्राप्ति हो जावें ॥ ३८ ॥

दण्डौती परिकम्मा करहीं ।
ते सहजहिं भवसागर तरहीं ॥ ३९ ॥

कलियुग में तुम जैसा देव न दूजा,
सुर नर मुनि सब करते आपकी पूजा ॥ ४० ॥

॥ दोहा ॥

जो यह चालीसा पढ़ै,
सुने शुद्ध चित्त लाय ।
सत्य सत्य यह सत्य है,
गिरिवर करे सहाय ॥ १ ॥
क्षमा करहुँ अपराध मम,
त्राहि माम् गिरिराज ।
श्याम बिहारी शरण में,
गोवर्धन गिरी महाराज ॥ २ ॥

॥ इति श्री गिरिराज चालीसा सम्पूर्ण ॥

Credit the Video: Shemaroo Bhakti YouTube Channel

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